बुलंदशहर में नौ साल पहले हुए हाईवे कांड से न केवल एक परिवार को जीवन भर का जख्म मिला, बल्कि बुलंदशहर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कभी न मिटने वाला दाग भी लगा। तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में हुए इस जघन्य कांड में पुलिस की जल्दबाजी ने तीन बेगुनाहों को सलाखों के पीछे धकेल दिया था।
शिनाख्त परेड में तीनों निर्दोष निकले। बाद में सीबीआई जांच और हरियाणा पुलिस की कार्रवाई ने बुलंदशहर पुलिस की उस थ्योरी की धज्जियां उड़ा दीं, जिसे सही साबित करने के लिए पूरा जोर लगाया गया था।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी धर्मवीर, सुनील व नरेश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में ये वारदात खूब चर्चा में रही थी। स्थानीय पुलिस पर आरोपियों को पकड़ने का दबाव था। आनन-फानन में पुलिस ने छापा मारकर तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। दावा किया कि यही असली आरोपी हैं। उन्हें जेल भी भेज दिया, लेकिन न्याय की पहली सीढ़ी यानी शिनाख्त परेड में ही पुलिसिया कहानी धराशायी हो गई।
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हाईवे कांड की जांच करने पहुंची सीबीआई टीम। फाइल फोटो।
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जब तीनों को पीड़ितों के सामने लाया गया तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि ये वो लोग नहीं हैं, जिन्होंने उस रात हैवानियत की थी। मामला गर्माता देख जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने तीन अभियुक्तों सलीम, जुबैर और साजिद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया, लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब करीब एक साल बाद हरियाणा पुलिस ने एक कुख्यात गैंग को दबोचा।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी जुबेर व साजिद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके सदस्यों ने पूछताछ में बुलंदशहर हाईवे कांड में संलिप्त होने की बात कबूल कर सबको चौंका दिया। इनमें से एक आरोपी के सीमन से घटनास्थल पर मिले सीमन का मिलान कराया गया तो वह मैच हो गया।
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हाईवे कांड मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद आरोपी जुबेर व साजिद
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डीजीपी व प्रमुख सचिव ने किया था दौरा, एसएसपी समेत 17 पर गिरी थी गाज
वारदात की गूंज लखनऊ तक पहुंचने के बाद तत्कालीन डीजीपी व प्रमुख सचिव प्रदेश सरकार ने एक अगस्त 2016 को बुलंदशहर पहुंचकर जांच की थी। तब जांच में सामने आया था कि वारदात के दौरान जनपद में कांवड़ यात्रा चल रही थी। सड़क पर पुलिस का पहरा था, जबकि तत्कालीन मेरठ डीआईजी लक्ष्मी सिंह खुद भी गुलावठी तक दौरे पर थीं।