देशभर में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम है, यहीं से बीसीए करने के लिए मुनीर अलीगढ़ गया। डिग्री तो ले नहीं पाया लेकिन अपराध का ककहरा जरूर सीख गया। सिर्फ ककहरा ही नहीं बल्कि अपराध में पीएचडी भी कर ली। गर्लफ्रेंड और खुद के शौक पूरे करने के लिए मुनीर ने लूट और हत्या की वारदातों को अंजाम देना भी अलीगढ़ में शुरू किया।
NIA Officer Murder Case: मुनीर का अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बड़ा कनेक्शन, बीसीए नहीं अपराध में की पीएचडी, फिर ताबड़तोड़ वारदात
इसके बाद भी अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में उसका खूब आना जाना रहा। अलीगढ़ में ही उसकी दोस्ती फैजाबाद के आशुतोष मिश्रा, आजमगढ़ के शादाब, एनसीआर के अतीउल और अंबेडकरनगर निवासी सऊद से हो गई। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में चुनाव के दौरान कई झगड़े हुए। अलीगढ़ से ही मुनीर अपने साथी आशुतोष और सऊद के साथ अपराध की दुनिया में उतरा। जिसने लूटपाट करनी शुरू कर दी।
छात्रसंघ के चुनाव में दिया था करीबी का साथ
2013 में एएमयू में छात्रसंघ के चुनाव हुए। इस चुनाव में मुनीर ने एक करीबी छात्र का साथ दिया। जहां छात्र गुटों के झगड़े में उसका नाम आने लगा। साल 2013 में मुनीर के खिलाफ अलीगढ़ में जमीन कब्जे के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था।
साल 2014 में की पीतल कारोबारी की हत्या
साल 2014 को अलीगढ़ अमीरनिशां बाजार में पीतल कारोबारी फहद की मुनीर और आशुतोष ने हत्या कर दी थी। वहीं 16 सितंबर 2015 को एएमयू में छात्र आलमगीर की दिनदहाड़े हत्या हुई थी। हत्या की रिपोर्ट मुनीर, रैय्यान व सादाब निवासी आजमगढ़ व आशुतोष मिश्रा निवासी फैजाबाद के खिलाफ दर्ज कराई थी। इस केस में मुनीर नहीं पकड़ा जा सका था।
अलीगढ़ से भाग दिल्ली को बनाया ठिकाना
हत्या और लूट के बाद जब पुलिस पीछे लगी तो मुनीर अलीगढ़ छोड़कर बटाला हाऊस दिल्ली में किराए पर रहने लगा। बटाला हाऊस से साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर शाहीन बाग में सपरिवार रहने वाले तंजील अहमद के संपर्क में मुनीर आ गया। सहसपुर के मूल निवासी तंजील अहमद एनआईए में डीएसपी थे। एक ही कस्बे का होने का कारण नजदीकियां बढ़ती चली गई। मुनीर ने तंजील अहमद से फ्लैट और हथियार दिलाने को कहा।