बरेली में आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का 106वां उर्स-ए-रजवी शुक्रवार को पूरे शबाब पर रहा। दरगाह की गलियों से लेकर उर्स स्थल तक और पुराने शहर की तमाम मस्जिदें जुमे की नमाज में भरी रहीं। शनिवार को तीन रोजा उर्स का कुल शरीफ की रस्म के साथ समापन होना है। कुल शरीफ में दो से ढाई लाख जायरीन के पहुंचने का अनुमान है। सुबह से ही रजा के दीवानों का सैलाब उमड़ पड़ रहा है। दरगाह आला हजरत की गलियों से लेकर उर्स स्थल तक जायरीनों की भीड़ दिखाई दे रही है। उधर, उर्स के मौके पर सीबीगंज के मथुरापुर स्थित मदरसा जमीयतुर्रजा को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। यहां इमाम अहमद रजा इंटरनेशनल कॉफ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें आला हजरत की जिंदगी पर रोशनी डालने के साथ समाजी मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
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दरगाह आला हजरत
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार को उर्स में करीब ढाई लाख से अधिक जायरीन पहुंचने का दावा किया गया है। सुबह से ही सड़कों पर जायरीनों का रेला दिख रहा है। उर्स स्थल इस्लामिया मैदान से आला हजरत दरगाह तक मेले जैसा माहौल है। आज कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन हो जाएगा।
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दरगाह आला हजरत को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया
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शुक्रवार को लोग आला हजरत दरगाह पर हाजिरी लगाने के लिए बेचैन दिखे। कोई कपड़ों और फूलों की चादर पेश कर रहा था तो कोई दरगाह की दरो-दीवार से लिपटा हुआ आंसुओं से सराबोर हो रहा था। वहीं सड़कों के दोनों ओर सजीं अस्थायी दुकानें रौनक बिखेर रही हैं।
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उर्स में शामिल हुए हजारों जायरीन
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को दरगाह उस्ताद-ए-जमन पर ट्रस्ट की ओर से गुलपोशी की रस्म अदा की गई है। मीडिया सेल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सिटी कब्रिस्तान स्थित दरगाह उस्ताद-ए-जमन परिसर में आला हजरत के वालिद अल्लामा नकी अली खां, उनके दादा अल्लामा रजा अली खां, भाई उस्ताद-ए-जमन, वालिदा और मौलाना मोहम्मद कैफ रजा कादरी के दादा मोहम्मद उवैस रजा खां (उवैसे मिल्लत) की मजार है। शुक्रवार को बिलगिराम शरीफ से आए सैय्यद असलम मियां हुजूर और मौलाना मोहम्मद कैफ ने रस्म को अदा किया। गुलपोशी के बाद मौलाना कैफ रजा ने मुल्क में तरक्की, अमन व शांति के लिए विशेष दुआ की।
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उर्स-ए-रजवी 2024
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मुल्क की संपत्ति और धरोहर से करें मोहब्बत : मौलाना मुख्तार
उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर जलसे का आयोजन किया गया। इसमें सुबह हजरत रेहान-ए-मिल्लत व हजरत मुफस्सिर-ए-आजम और देर रात मुफ्ती आजम हिंद के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। जलसे में मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने कहा कि मजहब-ए-इस्लाम अपने मानने वालों को यह तालीम देता है कि जिस मुल्क में रहो उस मुल्क में अपनी मजहबी पहचान कायम रखते हुए अच्छे शहरी बनों। मुल्क और मुल्क की संपत्ति और धरोहर से मोहब्बत करो। नफरतों को हराने के लिए मुहब्बत को आम करें।