फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

UP: एक साथ पढ़ाई कर बने फौजी...तीन साल में दोनों बलिदान; चचेरे भाई एसएसबी जवान मनतेज और सैनिक लखविंदर की कहानी

Wed, 04 Jun 2025 08:58 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 04 Jun 2025 08:58 AM IST
सार

पीलीभीत के गांव धुरिया पलिया निवासी तहेरे-चचेरे भाइयों ने एक साथ पढ़ाई की, इसके बाद दोनों फौजी बने। तीन साल में दोनों बलिदान हो गए। वर्ष 2023 में अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान चचेरा भाई एसएसबी जवान मनतेज सिंह बलिदान हुआ था। अब सिक्किम में हुए भूस्खलन में दूसरा भाई लखविंदर सिंह बलिदान हो गया।

विज्ञापन
Sikkim landslide havildar lakhwinder They studied together and became soldiers both sacrificed in three years
havildar lakhwinder - फोटो : संवाद
बचपन में साथ खेले... पढ़े और देश की सेवा का संकल्प लिया। तहेरे-चचेरे भाइयों ने एक साथ ही तैयारी की। एक ने एसएसबी और दूसरे ने भारतीय सेना से जुड़कर देश सेवा शुरू कर दी। वर्ष 2023 में अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान एक बलिदान हो गया। 


सोमवार को सिक्किम में हुए भूस्खलन में दूसरा भाई भी बलिदान हो गया। यह कहानी पीलीभीत के गांव धुरिया पलिया निवासी हवलदार लखविंदर सिंह और तीन साल पूर्व बलिदान हुए उसके तहेरे भाई मनतेज सिंह की है। दोनों के जज्बे को याद कर परिजन और ग्रामीणों की आंखें नम हैं। 
Sikkim landslide havildar lakhwinder They studied together and became soldiers both sacrificed in three years
हवलदार लखविंदर सिंह का फाइल फोटो - फोटो : संवाद
50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे लखविंदर
गुरदेव सिंह के पुत्र लखविंदर सिंह सेना में हवलदार थे। वह बीते दिनों 50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। बेटी के जन्म के बाद करीब डेढ़ माह पूर्व 20 अप्रैल को ड्यूटी पर वापस गए थे। सोमवार शाम उनके बलिदान होने की सूचना मिली तो परिवार में कोहराम मच गया। बुजुर्ग माता-पिता, भाई, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बुधवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की उम्मीद है। 
Sikkim landslide havildar lakhwinder They studied together and became soldiers both sacrificed in three years
मनतेज सिंह का फाइल फोटो - फोटो : संवाद
बचपन से ही दोनों को फौजी बनने का था सपना
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, लखविंदर और मनतेज सिंह दोनों ने बचपन में पढ़ाई एक साथ की। दोनों को बचपन से ही फौजी बनने का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए दोनों ने साथ ही तैयारी की। लखविंदर सिंह डोगरा रेंजीमेंट और मनतेज सिंह एसएसबी में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Sikkim landslide havildar lakhwinder They studied together and became soldiers both sacrificed in three years
भूस्खलन में बलिदान हुए हवलदार लखविंदर सिंह के घर गमगीन परिजन - फोटो : संवाद
युवाओं को फौजी बनने के लिए करते थे प्रेरित
क्षेत्रीय नागरिक जसवंत सिंह का कहना है कि दोनों गांव आते तो देश सेवा का जज्बा दिखता। अन्य युवाओं को भी फौजी बनने के लिए प्रेरित किया करते थे। इस बीच वर्ष 2023 में मनतेज सिंह अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए थे।
विज्ञापन
Sikkim landslide havildar lakhwinder They studied together and became soldiers both sacrificed in three years
हवलदार लखविंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
सिक्किम के लाचुंग में हुए भूस्खलन में लखविंदर बलिदान
अपने भाई से ज्यादा दोस्त के जाने की खबर से लखविंदर दुखी हुए, लेकिन देश सेवा में जुटे रहे। सोमवार को सिक्किम के लाचुंग में हुए भूस्खलन में वह भी बलिदान हो गए। इस खबर से परिवार और आसपास के लोग टूट गए। 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed