बचपन में साथ खेले... पढ़े और देश की सेवा का संकल्प लिया। तहेरे-चचेरे भाइयों ने एक साथ ही तैयारी की। एक ने एसएसबी और दूसरे ने भारतीय सेना से जुड़कर देश सेवा शुरू कर दी। वर्ष 2023 में अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान एक बलिदान हो गया।
सोमवार को सिक्किम में हुए भूस्खलन में दूसरा भाई भी बलिदान हो गया। यह कहानी पीलीभीत के गांव धुरिया पलिया निवासी हवलदार लखविंदर सिंह और तीन साल पूर्व बलिदान हुए उसके तहेरे भाई मनतेज सिंह की है। दोनों के जज्बे को याद कर परिजन और ग्रामीणों की आंखें नम हैं।
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हवलदार लखविंदर सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद
50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे लखविंदर
गुरदेव सिंह के पुत्र लखविंदर सिंह सेना में हवलदार थे। वह बीते दिनों 50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। बेटी के जन्म के बाद करीब डेढ़ माह पूर्व 20 अप्रैल को ड्यूटी पर वापस गए थे। सोमवार शाम उनके बलिदान होने की सूचना मिली तो परिवार में कोहराम मच गया। बुजुर्ग माता-पिता, भाई, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बुधवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचने की उम्मीद है।
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मनतेज सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद
बचपन से ही दोनों को फौजी बनने का था सपना
ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, लखविंदर और मनतेज सिंह दोनों ने बचपन में पढ़ाई एक साथ की। दोनों को बचपन से ही फौजी बनने का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए दोनों ने साथ ही तैयारी की। लखविंदर सिंह डोगरा रेंजीमेंट और मनतेज सिंह एसएसबी में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए।
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भूस्खलन में बलिदान हुए हवलदार लखविंदर सिंह के घर गमगीन परिजन
- फोटो : संवाद
युवाओं को फौजी बनने के लिए करते थे प्रेरित
क्षेत्रीय नागरिक जसवंत सिंह का कहना है कि दोनों गांव आते तो देश सेवा का जज्बा दिखता। अन्य युवाओं को भी फौजी बनने के लिए प्रेरित किया करते थे। इस बीच वर्ष 2023 में मनतेज सिंह अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए थे।
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हवलदार लखविंदर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
सिक्किम के लाचुंग में हुए भूस्खलन में लखविंदर बलिदान
अपने भाई से ज्यादा दोस्त के जाने की खबर से लखविंदर दुखी हुए, लेकिन देश सेवा में जुटे रहे। सोमवार को सिक्किम के लाचुंग में हुए भूस्खलन में वह भी बलिदान हो गए। इस खबर से परिवार और आसपास के लोग टूट गए।