बदायूं में शनिवार सुबह सरकारी आवास में सिविल जज जूनियर डिवीजन ज्योत्सना राय (29) का शव फंदे से लटका मिला। मौके से सुसाइड नोट भी मिला। मामले में परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। जिसके आधार पर पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज की। वहीं, सामने ये भी आया है कि महिला जज अयोध्या और लखनऊ में जमीन खरीदने वाली थीं। उन्होंने लखनऊ में ही एक जगह जमीन देख भी ली थी। अयोध्या में भी जमीन लेकर आशियाना बनाना चाहती थीं। इसका जिक्र उन्होंने अपने एक सहकर्मी से किया था।
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Judge Jyotsna Rai: अयोध्या में आशियाना तो लखनऊ में ये काम करना चाहती थीं महिला जज, जानिए क्या थी आखिरी इच्छा
Mon, 05 Feb 2024 02:51 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 05 Feb 2024 02:51 PM IST
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Judge Jyotsna Rai
- फोटो : अमर उजाला
Judge Jyotsna Rai
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, 22 जनवरी को श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा का भव्य समारोह देख दिवंगत महिला जज के मन में अयोध्या में ही आशियाना बनाने की इच्छा हुई थी। यहां की तैनाती के दौरान के एक सहकर्मी से उन्होंने इसका जिक्र करते हुए आवासीय प्लाट लेने की बात भी उसी दिन कही थी। यह मंशा अधूरी होती देखकर ही शायद उन्होंने सुसाइड नोट में सरयू तट पर अंतिम संस्कार किए जाने की बात लिखी।
Jyotsana Rai Case
- फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से मऊ के तहसील घोसी के गांव तराईडीह निवासी ज्योत्सना राय के पिता अशोक कुमार राय सहायक अभियोजन अधिकारी के रूप में अयोध्या में दो दशक पूर्व तैनात थे। उस समय ज्योत्सना राय पांच वर्ष की थीं और पिता के साथ यहीं रहती थीं। वर्ष 2018 में जब उनका उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में चयन हुआ, तब भी उनके पिता यहीं पर संयुक्त निदेशक अभियोजन के पद पर तैनात थे। 15 नवंबर 2019 को उनकी पहली कर्मभूमि भी अयोध्या रही तो यहां से उनका लगाव और गहरा हुआ।
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Jyotsana Rai Case
- फोटो : अमर उजाला
12 अप्रैल वर्ष 2021 तक वह अतिरिक्त सिविल जज जूनियर डिवीजन, 13 अप्रैल से चार जुलाई 2022 तक न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम व पांच जुलाई 2022 से 28 अप्रैल 2023 तक अतिरिक्त सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर उन्होंने दायित्व का निर्वहन किया। अपने सरल व्यवहार व सौम्य व्यक्तित्व से वरिष्ठ अधिकारियों और वादकारियों के बीच भी उनकी अच्छी साख रही। इस बीच उनका तबादला बदायूं हुआ तब भी उनका लगाव अयोध्या से कम नहीं हुआ। अपने सहकर्मियों से वह फोन के माध्यम से बराबर संपर्क में रहीं।
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Jyotsana Rai Case
- फोटो : अमर उजाला
22 जनवरी को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिव्य व भव्य समारोह को देखकर उन्होंने उसी दिन अयोध्या में निवास करने का संकल्प भी किया। अपने एक सहकर्मी से उन्होंने फोन पर इसका जिक्र किया था लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। शनिवार को उन्होंने बदायूं में ही अंतिम सांस ली और उनका यहां निवास करने का सपना अधूरा रह गया। अंतिम संस्कार में शामिल सहकर्मियों में भी यह चर्चा रही कि अयोध्या से जुड़े इसी लगाव के कारण ही शायद उन्होंने सरयू तट पर अपने अंतिम संस्कार की इच्छा जताई होगी।