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जिंदगी की जंग हारा निशांत: आठ साल पहले अस्पताल में छोड़ गए थे मां-बाप, फिर कभी नहीं ली बेटे की सुध

Sat, 21 Sep 2024 11:56 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 21 Sep 2024 11:56 AM IST
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Guillain Barre syndrome pateint nishant lost the his life in Bareilly
निशांत का वारिस बना था अस्पताल स्टाफ - फोटो : अमर उजाला

बरेली में दुर्लभ बीमारी से ग्रसित निशांत को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के बाद उसके माता-पिता तक ने उसकी सुध नहीं ली। मामला सुर्खियों में आने पर तत्कालीन डीएम की पहल पर मेडिकल कॉलेज ने आठ साल उसका इलाज किया। करीब 1.30 करोड़ रुपये खर्च हुए। मगर शुक्रवार सुबह निशांत जिंदगी की जंग हार गया। मिनी बाइपास स्थित अवध धाम कॉलोनी निवासी कांता प्रसाद गंगवार का बेटा निशांत 12 वर्ष की उम्र में गंभीर बीमारी गुलियन बैरे सिंड्रोम से ग्रसित हुआ था। 



अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद जब बेटे की हालत में सुधार नहीं हुआ तो माता-पिता उसको लेकर भोजीपुरा स्थित निजी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां जांच के बाद दुर्लभ बीमारी की पुष्टि हुई। इससे निजात मिलने की उम्मीद बेहद कम थी, पर डॉक्टरों ने माता-पिता को हौसला दिया। लंबे समय तक इलाज चलने और इसमें काफी खर्च होने की जानकारी दी गई।

Guillain Barre syndrome pateint nishant lost the his life in Bareilly
निशांत का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
इस पर निशांत के माता-पिता बगैर सूचना दिए बेटे को अकेला छोड़कर चले गए। तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह की पहल पर एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज बीते आठ वर्ष से उसका इलाज करता रहा। इस दौरान एक बार भी अभिभावक उसे देखने नहीं आए। खोजबीन के लिए कॉलेज पुलिस-प्रशासन को पत्र भेजता रहा।
 
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निशांत - फोटो : अमर उजाला

सुबह दी निधन की सूचना, दोपहर में पहुंची पुलिस
मेडिकल कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार निशांत को 18 सितंबर को कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) पड़ा था। डॉक्टर उसे बचाने का प्रयास करते रहे, पर शुक्रवार सुबह उसकी सांसें थम गईं। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पुलिस और प्रशासन को सूचना देकर मार्गदर्शन मांगा। सुबह दी गई सूचना पर अपराह्न साढ़े तीन बजे भोजीपुरा पुलिस पंचनामा कराने पहुंची। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

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मेडिकल कॉलेज के डॉ. आरपी सिंह - फोटो : वीडियो ग्रैब
ये है गुलियन बैरे सिंड्रोम
मेडिकल कॉलेज के डॉ. आरपी सिंह के मुताबिक गुलियन बैरे सिंड्रोम लाइलाज बीमारी है। इसे आटो इम्यून डिजीज भी कहते हैं। मरीज के शरीर में दर्द के साथ मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है। प्रतिरोधक क्षमता घटती जाती है। तंत्रिकाएं मस्तिष्क के आदेश को नहीं पकड़ पाती। रोगी को चीजों की बनावट पता नहीं चलती। सर्दी, गर्मी का एहसास नहीं होता। शरीर अपाहिज हो जाता है।
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निशांत का फाइल फोटो - फोटो : मेडिकल कॉलेज
जिस दिन भर्ती हुआ, उसी दिन मनाते थे जन्मदिन
निशांत का आठ वर्ष से इलाज कर रहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संध्या चौहान निधन की सूचना से गमगीन रहीं। कहा कि जिस दिन निशांत भर्ती हुआ था, उसी दिन को वे उसका जन्मदिन मनाती थीं। नर्स अर्चना गंगवार, डॉक्टर, आईसीयू स्टाफ और निशांत कुछ ऐसे जुड़ गए थे कि परिवार जैसा लगता था।
 
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