डेढ़ दशक पहले तक बरेली, बदायूं व शाहजहांपुर जिलों की सीमा से लगी रामगंगा और गंगा की कटरी में डकैतों का आतंक था। इनमें सबसे दुस्साहसिक सरगना कल्लू यादव था, जिसके हाथ 19 पुलिसवालों और अनगिनत लोगों के खून से रंगे थे। 15 जनवरी 2006 की सुबह जब लोग सोकर उठे तो पता चला कि पुलिस मुठभेड़ में कल्लू को मार दिया गया। अब जब कटरी में विकास की बयार बह रही है, तो भू-माफिया गोलीबारी कर रहे हैं। इनसे निपटने के लिए बड़े ऑपरेशन की जरूरत है। कटरी में यूं तो कई डकैतों बड़े लल्ला, रानी ठाकुर, नरेशा धीमर, नरेशा चचुआपुर का राज रहा पर सबसे ज्यादा दहशत शाहजहांपुर के परौर क्षेत्र के पूरननगला निवासी कल्लू यादव उर्फ भूरा पहलवान उर्फ बाबूराम की रही। उस पर अपहरण, हत्या जैसे 71 मुकदमे दर्ज थे और गिरोह में 30 डकैत थे। कटरी के कई गांव काफी समय तक उसकी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र रहे।
Bareilly News: डकैत कल्लू के आतंक के 17 साल बाद फिर लहूलुहान हुई कटरी, अब भूमाफिया हुए हावी
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एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राणा बोले- लोगों का भरोसा जीतकर मिली विजय
कल्लू यादव व नरेशा धीमर का एनकाउंटर करने वाली टीम में शामिल विजय राणा अब अमरोहा में सीओ सिटी हैं। उन दिनों इज्जतनगर एसओ के तौर पर वह संयुक्त टीम में शामिल थे। उन्होंने बताया कि जनता का भरोसा जीतने में बहुत वक्त लगा था। राणा के मुताबिक कल्लू यादव को मारने के लिए अधिकारियों ने टीम को पूरी छूट दे रखी थी। हमें आधुनिक हथियार भी मिले थे पर कटरी में नेटवर्क के मामले में कल्लू अक्सर पुलिस को गच्चा दे जाता था।
बांध और सड़कें बनने के बाद लहलहाईं फसलें
कटरी अपराधमुक्त हुई तो बरेली व बदायूं के सीमा क्षेत्र में सन 2012 में पूर्व राज्यसभा सदस्य वीरपाल सिंह यादव के प्रयास से 15 किमी लंबा बांध बनाया गया। बदायूं सीमा में भी कई पुल व बांध बने। कटरी को कस्बों से जोड़ने के लिए कई सड़कें बनाई गईं। साथ ही स्वास्थ्य व शिक्षा की बयार बही तो कटरी के गांव भी मुख्य धारा से जुड़े। बरेली निवासी सीएल शर्मा ने सबसे पहले तजपुरा के ग्रामीणों की लगभग 400 बीघा जमीन खरीदी। इसे हरियाणा के फौजी ने लेकर खेती योग्य बनाकर लोगों को रोजगार से जोड़ा। फिर पंजाब से आए सरदारों ने झाले बनाए।
इलाके किसान सत्येंद्र का कहना है कि भूमि विवादों का जिक्र छोड़ दें तो यहां लोगों को उन्नत खेती से रोजगार मिला और उनकी आर्थिक दशा सुधरी। बरसों बाद यहां कीमती जमीनों पर कब्जे के लिए रक्तपात हुआ है। खेतों पर जाने से डरते थे लोग डकैतों के कहर से उन दिनों लोग खेतों पर जाने से बचते थे। आज इस तरह का कोई खतरा नहीं है। गांव के तमाम लोग अब फसलों की रखवाली खेतों पर रहकर ही करते हैं। गजेंद्र सिंह बताते हैं कि सड़कों ने खोला तरक्की का रास्ता गांवों के छिटपुट विवादों को छोड़ दें तो लोग मेहनत से खेती कर रहे हैं। यूपी 112 व 108 एंबुलेंस जैसी सेवाओं ने भी गांवों की कई समस्याएं निपटा दी हैं। सड़कों ने तरक्की के द्वार खोले हैं।