जयंत चौधरी ने आज यानि मंगलवार को रालोद अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल ली है। इसके साथ ही दादा व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह की राजनीतिक विरासत भी अब उनके कंधों पर आ गई है। जयंत चौधरी वैसे तो लंबे समय से सियासी मैदान में हैं और किसान राजनीति की अच्छी समझ रखते हैं। लेकिन वर्तमान माहौल में विधानसभा चुनाव 2022 से पूर्व पार्टी को और अधिक मजबूत बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।
27 दिसंबर 1978 को जन्मे जयंत चौधरी ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातक की पढ़ाई की है। 2009 में वह मथुरा लोकसभा सीट से सांसद बने थे। 2014 के चुनाव में उन्हें मथुरा और 2019 के चुनाव में बागपत लोकसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा था। पिछले छह माह में जयंत ने कृषि बिल व किसानों के मुद्दों पर भाजपा सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कई जिलों में पंचायतें कर किसानों की समस्याएं उठाई। जयंत चौधरी की इस मेहनत का सकारात्मक असर अभी हाल ही में हुए पंचायत चुनाव के नतीजों में दिखाई भी दिया।
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जयंत चौधरी।
- फोटो : amar ujala
रालोद ने जिला पंचायत सदस्य की कई सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों को हराया है। वहीं बागपत में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी।
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पिता और पत्नी के साथ जयंत चौधरी।
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जयंत चौधरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि जयंत चौधरी के नेतृत्व में पार्टी और मजबूत होगी। विधानसभा चुनाव 2022 में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
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अन्य नेताओं के साथ जयंत चौधरी।
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उधर, जयंत चौधरी ने अध्यक्ष पद संभालते ही संयुक्त किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कार्यकर्ताओं से बुधवार को इसमें बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। सरकार से मांग की है कि किसानों से वार्ता कर समस्या का जल्द कोई हल निकाले।
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पिता अजित सिंह के साथ जयंत चौधरी।
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बैठक में पार्टी सुप्रीमो स्व. अजित सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। देश में फैली कोरोना महामारी को लेकर जयंत चौधरी ने चिंता जताई। इससे निपटने के लिए गांवों में घर-घर टीकाकरण अभियान चलाए जाने की जरूरत पर बल दिया। कहा कि टीकाकरण के लिए पंजीकरण को सुलभ बनाने की भी आवश्यकता है।