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वट सावित्री व्रत: प्रेम के धागों से सुहागिनों ने लगाई सौभाग्य की फेरियां

Thu, 10 Jun 2021 10:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 10 Jun 2021 10:49 PM IST
सार

  • सज-धजकर निकलीं महिलाएं, वट वृक्षों की सविधि पूजा के साथ की गई परिक्रमा

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Vat Savitri Vrat: With the threads of love, the married women made rounds of good luck
वट सवित्री वत्र पर अलोपीदेवी मंदिर में वृक्ष की परिक्रमा कर पूजन करती महिलाएं। - फोटो : prayagraj

सोलह शृंगार कर सुहागिन महिलाओं ने बृहस्पतिवार को प्रेम के धागों में सौभाग्य की फेरियां लगाईं। मौका था वट-सावित्री व्रत का। व्रत रखकर सुहागिनों ने अखंड सुहाग के लिए भगवान विष्णु की सविधि आराधना की। इस दौरान भगवान विष्णु के रूप में वट वृक्षों की पूजा की गई। कोरोना कर्फ्यू हटने के बाद इस पूजन के लिए घरों से निकली व्रती महिलाओं ने जगह-जगह समूहों में वट की परिक्रमा की।


  

Vat Savitri Vrat: With the threads of love, the married women made rounds of good luck
वट सवित्री वत्र पर अलोपीदेवी मंदिर में वृक्ष की परिक्रमा कर पूजन करती महिलाएं। - फोटो : prayagraj

बृहस्पतिवार को वट वृक्षों के नीचे व्रतियों के पहुंचने का सिलसिला सुबह से ही आरंभ हो गया। संगम के अलावा गंगा, यमुना के घाटों पर डुबकी लगाने के बाद सज धज कर महिलाएं वट सावित्री की पूजा के लिए निकलीं। द्रोपदी घाट पर वटवृक्ष की पूजा के लिए अशोक नगर से लेकर सीडीए पेंशन कॉलोनी तक की महिलाएं पहुंची। वहां वट की पूजा के बाद कलावा के धागों से परिक्रमा की जाती रही। इस दौरान पूजा के लिए वटों की छाया में पहुंचने वाली सुहागिनों में से किसी के हाथ में पूजा की थाली तो किसी के हाथ में डलिया दिखी। महिलाओं के साथ परिवार के सदस्य भी पूजा की सामग्री लेकर चल रहे थे। इस दौरान वट वृक्ष के नीचे पूजा कर सावित्री और सत्यवान की प्रतिमाओं की भी प्रतिष्ठापना की गई। फिर, वेदियां सजाकर तरह-तरह के फल, बांस के पंखे, पूड़ी, हलवा, गुलगुला अर्पित किया गया।

Vat Savitri Vrat: With the threads of love, the married women made rounds of good luck
वट सवित्री वत्र पर अलोपीदेवी मंदिर में वृक्ष की परिक्रमा कर पूजन करती महिलाएं। - फोटो : prayagraj

गऊघाट के अलावा मुट्ठीगंज, मीरापुर, झूंसी में वट वृक्षों की पूजा के लिए महिलाओं भीड़ लगी रही। महिलाओं ने वट वृक्ष को रोली, सिंदूर लगाने के बाद धूप-दीप जलाया और उसके बाद मिट्टी के पात्र में घर में बनाए गए पकवान और फल अर्पित किया तथा बांस से बने पंखे को डोलाकर हवा दी। पूजा के बाद महिलाओं ने सावित्री और सत्यवान से जुड़ी कथाएं भी सुनीं। पौराणिक मान्यता के अनुसार कभी सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। तभी से सनातनी संस्कृति में सुहागिन महिलाएं इस व्रत को करती आ रही हैं।

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