जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए संगमनगरी भी एकजुट दिखी। तमाम विरोध और राजनीनिक बंदी देखने वाले लोगों का बस यही कहना था कि रविवार जैसी बंदी कभी नहीं देखी। बड़े-बुजुर्गों को भी याद नहीं है कि कभी उनके बचपन या किशोरावस्था के दिनों में ऐसा सन्नाटा सड़कों पर पसरा रहा हो। सभी का कहना था कि ये कोरोना को जड़ से खत्म करने के लिए एकजुटता की मिसाल है।
प्रयागराज में बोले शहरी, ऐसी बंदी कभी नहीं देखी
जनता कर्फ्यू के समर्थन में सामाजिक, धार्मिक व व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों की एकजुटता का भी असर रविवार को सड़कों पर साफ दिखा। चाहे चौराहे हों या फिर तिराहे। रातोंरात हर जगह कोरोना वायरस के प्रति सजगता और पीएम मोदी की अपील पर जनता कर्फ्यू में हिस्सा लेने वाले होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर इस बात की गवाही देते रहे कि इस आपदा की घड़ी में शहर कितना जागरूक है।
त्रिवेणी संगम संगम तट पर न स्नानार्थी पहुंचे न पंडे- पुरोहित। प्रयागवाल तीर्थपुरोहित सभा के राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि इस आपदा की रोकथाम के लिए पीएम की अपील पर संगम क्षेत्र में किसी भी तरह का कर्मकांड व अनुष्ठान नहीं कराया गया।
सिविल लाइंस स्थित हल्दीराम भुजिया वाले के पास रहने वाले 78 वर्षीय मुकुल जायसवाल बताते हैं कि चाहे जितना भी प्रभावशाली व्यक्ति, नेता या संगठन का आह्वान रहा हो, लेकिन अब तक के अपने जीवन में उन्होंने ऐसी बंदी कभी नहीं देखी थी। बेनी बांध के नीचे संगम के किनारे भूखमुक्त भारत अभियान के तहत भैयाजी का दाल-भात भी लोगों को नहीं मिल सका।
इसी तरह जनता कर्फ्यू के दौरान आर्य समाज के सभी मंदिरों में रविवार को सत्संग नहीं हुआ। इस दौरान सिर्फ आर्य समाज के पुरोहित और सेवकों ने यज्ञ कर कोरोना माहामारी के नाश के लिए आहुति दी।
नमामि गंगे के तहत गंगा विचार मंच, सिविल लाइंस व्यापार मंडल, प्रयाग व्यापार मंडल, प्रयाग केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, पीडब्ल्यूडी नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ, इरिगेशन मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के अलावा अन्य संगठनों ने एकजुटता का परिचय दिया।