संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से आयोजित सिविल सेवा परीक्षा-2021 में प्रयागराज के मेधावियों ने परचम लहराया है। यहां से भी आधा दर्जन से अधिक मेधावियों ने सिविल सेवा में चयनित होकर संगम नगरी का मान बढ़ाया है। किसी ने पहले से नौकरी करते हुए सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की तो किसी ने नौकरी छोड़कर तैयारी की और सफलता अर्जित की। जॉर्जटाउन की रहने वाली अंशुल सिंह, टैगोर टाउन के अतुलेश झा, बरौत हंडिया के विवेक तिवारी, एमएनएनआईटी की पूर्व छात्रा अंकिता मिश्रा सहित कई मेधावियों ने देश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में सफलता अर्जित की है।
UPSC Result : सिविल सेवा परीक्षा में प्रयागराज के मेधावियों का परचम
जॉर्जटाउन की रहने वाली अंशुल सिंह, टैगोर टाउन के अतुलेश झा, बरौत हंडिया के विवेक तिवारी, एमएनएनआईटी की पूर्व छात्रा अंकिता मिश्रा सहित कई मेधावियों ने देश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा में सफलता अर्जित की है।
नौकरी के साथ अंशुल ने की तैयारी, मिली सफलता
प्रयागराज की बेटी अंशुल सिंह को सिविल सेवा परीक्षा में 435वीं रैंक के साथ सफलता मिली है। आगरा के आरटीओ कपिलदेव सिंह की पुत्री अंशुल का चयन पीसीएस-2018 में वाणिज्य कर अधिकारी के पद पर हुआ था। इन दिनों वह प्रयागराज में ही तैनात हैं। अंशुल की मां सरोज सिंह गृहणी हैं। अंशुल ने बिशप जॉनसन मेन ब्रांच से इंटर की पढ़ाई की ओर स्नातक एवं परास्नातक की पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पूरी की। पीजी में उनका विषय भूगोल था और इसी विषय से उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा दी। अंशुल ने इविवि से फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा भी किया है। उन्हें चौथे प्रयास में यह सफलता मिली है।
पहले आईईएस और अब आईएएस में चयनित हुए विवेक
बरौत हंडिया के रहने वाले विवेक तिवारी ने 164वीं रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा में सफलता अर्जित की है। उन्होंने मेकेनिकल विषय के साथ परीक्षा दी। विवेक ने सेंट मेरी मीरजापुर से इंटर और केआईटी गाजियाबाद से बीटेक किया। वर्ष 2019 में भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (आईईएस) में उनका चयन हुआ था। इन दिनों वह देहरादून में डिफेंस की इंजीनियरिंग शाखा में तैनात हैं। विवेक ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उनके पिता शंभूनाथ तिवारी व्यवसायी और मां विजय लक्ष्मी तिवारी गृहणी हैं।
एमएनएनआईटी के छात्र रहे विकास, अंकिता भी सफल
एमएनएनआईटी की पूर्व छात्रा अंकिता मिश्रा को भी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता मिली है। उन्हें 169वीं रैंक प्राप्त हुई है। अंकिता ने वर्ष 2015 में एमएनएनआईटी से बीटेक किया था। उन्होंने चौथे प्रयास में सफलता हासिल की है। अंकिता वाणिज्य कर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं। वह लखनऊ की रहने वाली हैं। उन्होंने नौकरी के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और सफलता अर्जित की। एमएनएनआईटी के पूर्व छात्र विकास महतो को भी 110वीं रैंक के साथ सफलता मिली है। वह मूलत: बिहार के रहने वाले हैं।
मेधावियों की सलाह, रोज बनाएं लक्ष्य और पूरा करें
सिविल सेवा परीक्षा में चयनित मेधावियों की सलाह है कि परीक्षा की तैयारी के लिए रोज नया लक्ष्य निर्धारित करें और उसे पूरा भी करें। सिविल सेवा में चयनित अतुलेश झा का मानना है कि सफलता के लिए सबसे पहले स्वयं का मूल्यांकन और सेलेबस की समझ जरूरी है। खुद के मूल्यांकन से जानें कि गलती कहां की और उसे सुधारें। सिविल सेवा में चयनित अंशुल का मानना है कि नौकरी के साथ भी परीक्षा की तैयारी की जा सकती है, इसके लिए रोज नियमित रूप से पढ़ें। लक्ष्य निर्धारित करें और उसे पूरा करें। छुट्टियों पर ध्यान न दें, हर दिन तैयारी को आगे बढ़ाएं। सरकार की वेबसाइट जरूर देखें, ताकि जो भी पढ़े, वह ठोस हो। समय-समय पर रिवीजन भी करते रहें।
जीएस वर्ल्ड के रवि को 18वीं, सुनील को 22वीं रैंक
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में जीएस वर्ल्ड से जुड़े छात्र रवि कुमार सिहाग को ऑल इंडिया 18वीं और सुनील धनवंता को 22वीं रैंक प्राप्त हुई है। उनके साथ ही आनंद कुमार सिंह ने 206वीं और पवन कुमार ने 551वीं रैंक के साथ सफलता अर्जित की है। संस्थान के निदेशक नीरज का कहना है कि इस बार परिणाम में हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों ने अच्छी रैंक प्राप्त की है, जो हिंदी भाषी छात्रों के लिए एक अच्छा परिणाम है। उन्होंने संस्थान के चयनित अभ्यर्थियों को अपनी शुभकामनाएं दी हैं।
फिर खाली रह गई इविवि के हॉस्टलों की झोली
सिविल सेवा परीक्षा में कभी इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के हॉस्टलों का डंका बजा करता था, लेकिन इस बार भी हॉस्टलों की झोली खाली रह गई। पिछले कुछ वर्षों से सिविल सेवा में इविवि के हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों के चयन का ग्राफ तेजी से गिरा है। हालांकि आने वाले दिनों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही। इविवि में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से डॉ. आंबेडकर सेंटर फॉर एक्सेलेंस खोले जाने का निर्णय लिया गया है। इसमें छात्रों को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश के उन 31 चुनिंदा विश्वविद्यालयों में से एक हैं, जिसमें भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने यह सेंटर खोलने का निर्णय लिया है।