प्रयागराज के शाहीन बाग बने मिर्जा गालिब रोड स्थित मंसूर अली पार्क में एनआरसी और सीएए के विरोध में जुटीं महिलाओं में जोश और जज्बे के साथ ही अपनी मुहिम के लिए ऐसा हौसला और मजबूत इरादे हैं कि वे अंजाम से पहले वहां से टस से मस हटने को तैयार नहीं। रोशनबाग की ला स्टूडेंट निमशां ने कहा, यहां जुटीं महिलाएं अपने हक के लिए आवाज उठा रही हैं क्योंकि उन्हें समझ में आ गया है कि क्या सही है और क्या गलत। यह हमारे मौलिक अधिकार पर हमला है। कमाल है जब हमारा वोट चाहिए था, तब हम नागरिक थे, अब नहीं रहे।
दूसरा शाहीन बाग बना प्रयागराज का मंसूर अली पार्क, आठवें दिन भी धरना जारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करेलाबाग लाल कॉलोनी की खदीजा उस्मानी ने कहा, आप हमसे हमारा अधिकार छीन रहे हैं। पहले तीन तलाक पर फैसला सुनाया, तो किसी ने कुछ नहीं कहा। अयोध्या मामले का फैसला सुनाया तो भी किसी से कुछ नहीं कहा, हमने सब्र किया लेकिन अब आप संविधान पर वार कर रहे हैं। बताइये जिनके पास दो वक्त की रोटी नहीं है, वह सौ बरस पुराना कागज कहां से लाएंगे। इस मामले को मुसलमानों से जोड़ना भी बेमानी है क्योंकि अगर यह सिर्फ मुस्लिम का सवाल होता तो हिंदू, दलित समाज आदि से महिलाएं नहीं जुटतीं। इसी तरह दो चार लोगों को भड़काया जा सकता है, पूरे देश को नहीं।
रोशनबाग की रुखसाना ने कहा, नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दों पर हमने सब्र किया, यह सोचकर कि देश में तो हैं, घर तो है, छत तो है लेकिन अब तो छत ही जा रही है। हमारे बच्चे का मुस्तकबिल (भविष्य) बिल्कुल भी सेफ (सुरिक्षत) नहीं है। ऐसे में अब नहीं उतरेंगे तो कभी नहीं उतरेंगे। महिलाएं सड़क पर हैं तो इसका मतलब यह बड़ा मामला है। इसको देखेंगे और रोक कर ही रहेंगे। मासूम के साथ यहां आईं माओं का सोचना है कि जब उसका कल सुरक्षित नहीं है तो फिर आज की क्या चिंता करना। दूसरे मुल्कों में रहने वाले हमारे रिश्तेदार हमारा मजाक उड़ा रहे हैं कि तुम्हें तुम्हारे देश से ही निकाला जा रहा है।
करेली की आइशा ने कहा, यहां चार दिन इंटरनेट बंद किया तो हमें कश्मीर की ‘फीलिंग्स’ समझ में आ गई। अगर सरकार इतिहास पर गौर करती तो उसे पता होता कि फ्रांस और रूस की क्रांति के समय इंटरनेट नहीं था। गुलाबबाड़ी की सना बोलीं, हम यहां के हैं तो हम क्यूं प्रूफ दें। आंदोलन के संचालकों में से एक निजी कंपनी की पूर्व अधिकारी सारा अहमद बोलीं, हमारी रगों में हमारे देश का संविधान बह रहा है और यह कानून उसी का उल्लंघन है। यह नहीं होने देंगे। सर्दी, बारिश के बावजूद औरतें यहां से हिलने का नाम नहीं ले रही हैं तो सिर्फ इसलिए कि इन्हें लग रहा है कि जो हुआ है या जो होने वाला है, वह सही नहीं है। अगर वे एक इंच भी नहीं हिलेंगे तो हम हिलेंगे ही नहीं। जब तक सीएए और एनआरसी रद्द नहीं होगा, तक तक हम लोग यहां से नहीं हटेंगे।
हां भइया हां, हां भइया हां
हिंदू से लड़ोगे, मुस्लिम से लड़ोगो
ना भइया ना, ना भइया ना
आरएसएस से लड़ोगे, भाजपा से लड़ोगे
हां भाई हां, हां भाई हां