स्मार्ट सिटी की पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना को लापरवाही का घुन लग गया है। महज आठ महीने में कई साइकिलें कबाड़ हो गईं। कई डॉकिंग स्टेशनों पर आधे से कम साइकिलें रह गईं। मंगलवार को अमर उजाला की पड़ताल में कुछ स्टेशनों के स्टैंड में टूटी साइकिलें मिलीं तो ऐसे भी स्टैंड मिले, जहां बाइक शेयरिंग की जगह आम लोगों ने अपनी साइकिलें लॉक कर रखी थीं। इससे इस योजना के हश्र का अंदाजा लगाया जा सकता है।
Smart City : बाइक शेयरिंग योजना पटरी से उतरी, कई साइकिलें पंक्चर, डॉकिंग स्टेशन भी राम भरोसे
शहर के पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने और लोगों को सेहतमंद बनाए रखने के लिए शुरू हुई यह स्मार्ट योजना पहले ही चरण में औंधे मुंह गिर गई है। शहर के सात डाकिंग स्टेशनों की पड़ताल में कहीं भी पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना पटरी पर नजर नहीं आई।
इसी तरह चंद्रशेखर आजाद पार्क के गेट नंबर तीन पर जब टीम पहुंची तो वहां 12 में से सिर्फ एक ही साइकिल मौजूद थी। इतना ही नहीं स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के इस स्टेशन में किसी ने अपनी साइकिल लॉक कर रखी थी। पता चला कि वहां रोकटोक न होने की वजह अक्सर लोग अपनी बाइक लॉक कर घंटों पार्क में तफरीह करते हैं।
इसी तरह शहर के सबसे बड़े डॉकिंग स्टेशन डॉ. लोहिया मार्ग चौराहे पर तो 18 में से सिर्फ सात साइकिलें पाई गईं। जबकि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के द्वार पर बने स्टेशन में साइकिलें तितर-बितर बिखरी नजर आईं। वहां भी देखरेख करने वाला कोई नहीं था। कमोबेश यही हाल चंद्रशेखर आजाद पार्क के गेट नंबर-एक के स्टेशन के अलावा जीएचएस और पत्थर गिरजाघर के आईपीईएम स्टेशन का भी रहा। इसके अलावा हीरा हलवाई के पास बने स्टेशन में तो टूटी साइकिलें मिलीं।
दूसरे चरण के लिए मंगाई गई करोड़ों रुपये की साइकिलें खुले आसमान के नीचे हो रहीं बर्बाद
शहर में बाइक शेयरिंग योजना दो अक्तूबर 2021 को सुभाष चौराहे से शुरू की गई थी। इस योजना के तहत कुल 75 स्टेशन खोले जाने की स्वीकृति स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ली गई है। फिलहाल पहले चरण में 30 स्टेशन स्थापित किए गए हैं। अभी 45 स्टेशनों के लिए भूमि चिह्नित करने का काम किया जा रहा है। जबकि, दूसरे चरण के लिए चार सौ से अधिक साइकिलें इस योजना को संचालित करने वाली कंपनी चार्टर्ड बाई प्राइवेट लिमिटेड के कारखाना परिसर में महीनों से खुले आसमान के नीचे रखवा दी गई हैं। अब बरसात भी शुरू हो गई है, ऐसे में साइकिलें खराब होने का खतरा है। सभी 75 स्टेशनों पर कुल 750 साइकिलें रखी जाएंगी।
टिन के घेरे में चल रहा दफ्तर
बाइक शेयरिंग योजना का दफ्तर पत्थर गिरजाघर के पास स्थित खाली जमीन पर टिन शेड के घेरे में संचालित हो रहा है। इस योजना को संचालित करने के लिए इस टिन घेरे में कारखाना भी है। हालत यह है कि इस कारखाने में 50 से अधिक टूटी हुई साइकिलें पड़ी हुई हैं। इस कारखाने के कर्मियों ने बताया कि इन साइकिलों की मरम्मत कराई जाएगी, ताकि इन्हें दोबारा सड़कों पर दौड़ाया जा सके। जबकि, इसमें कई साइकिलें टूटकर कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। आठ महीने में ही साइकलों की यह गत कैसे हुई, इसे समझा जा सकता है।
पांच साल के लिए है बाइक शेयरिंग का करार
स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड ने गुजरात की चार्टर्ड बाई प्राइवेट लिमिटेड से पांच वर्ष के लिए इस शहर में बाइक शेयरिंग के लिए करार किया है। खास बात यह है कि चार्टर्ड बाई खुद अपनी साइकिल बनाती भी है और चलवाती भी है। इसकी एक साइकिल पर 30-35 हजार रुपये की लागत आने का अनुमान है। चार्टर्ड बाई के मिशन मैनेजर राज कुमार ने बताया कि इस योजना को जीपीएस सिस्टम से संचालित किया जा रहा है। ऐसे में गायब होने वाली साइकिलों को भी ट्रैक कर लिया जाता है। रही बात खुले आसमान में साइकिलों को रखे जाने की तो यह एल्यूमीनियम की हैं, ऐसे में इनमें जंक लगने का खतरा नहीं है।