बाढ़ की विभिषिका के बीच लगातार बारिश कहर बनकर टूटी है। इससे बाढ़ का दायरा बढने के साथ फंसे लोगों की दुश्वारियां भी बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि दो दिन से लगातार बारिश की वजह से कोरांव तहसील को छोडक़र पूरा जिला बाढ़ की चपेट में आ गया है। 98 मोहल्ले और गांव तो बाढ़ के पानी में चारों तरफ से घिर गए हैं तथा उनका अन्य स्थानों से संपर्क टूट गया है। इसकी वजह से लाखों परिवारों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए नावें चलाई गईं हैं।
2 of 10
prayagraj news : करेली स्थित गौस नगर में बाढ़ का पानी पहुंच जाने से घरों में कैद लोगों को राहत सामग्री पहुंचाते स्वयंसेवी संस्था के सदस्य।
- फोटो : prayagraj
गंगा और यमुना दोनों ही नदियां खतरे के निशान से सवा मीटर से भी अधिक ऊंचाई से बह रही हैं। पीछे पानी नहीं छोड़े जाने की बात कही जा रही है। इससे राहत की उम्मीद की जा रही थी लेकिन दो दिनों से जारी बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बाढ़ के खतरे को इससे ही समझा जा सकता है कि कोरांव के पठारी इलाके को छोड़ सभी सात तहसील इसकी चपेट में आ गए हैं।
3 of 10
prayagraj news : राजापुर क्षेत्र में बाढ़ का पानी घुस जाने से मकान के एक तल डूब गए है।
- फोटो : prayagraj
सबसे अधिक खराब स्थित शहरी क्षेत्र और फूलपुर में हैं। फूलपुर तहसील के 38 गांव पूरी तरह से बाढ़ में घिर गए हैं। गंगा के किनारे घरों में पानी भर गया है। वहीं शहर में बघाड़ा, सलोरी, ऊंचवागढ़ी, राजापुर, करेली समेत 20 मोहल्लों में पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सडक़ों पर नावें चलाई जा रहीं हैं तो निचले इलाके में ज्यादातर घरों की पहली मंजिल की सिर्फ छत दिख रही है। प्रशासन तथा समाजेवी संगठनों की ओर से मदद के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन नाकाफी साबित हो रहे हैं।
4 of 10
prayagraj news : गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण छोटा बघाड़ा क्षेत्र में घर के एक तल डूब गए है।
- फोटो : prayagraj
स्थिति यह है कि लोगों को पीने के पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। बिजली नहीं है। इसकी वजह से पानी की आपूर्ति भी ठप है। इतना ही नहीं नल भी जल में डूब गए हैं। बाढ़ में फंसे लोगों की पूरी दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित हो गई है। लोगों ने प्रथम तल पर खाने की व्यवस्था तो कर रखी है लेकिन पानी नहीं होने की वजह से बाजार के खाने तथा लोगों की मदद पर ही निर्भर हैं। इन दुश्वारियों के बीच लगातार बारिश ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हजारों परिवारों का एक ही तल का मकान है, जिसमें पानी भर गया है। ऐसे में लोगों ने छतों पर शरण ले रखी है लेकिन वहां भी राहत नहीं है। बेली के सूर्य प्रकाश, मटरू मिश्रा का कहना है कि त्रिपाल ही एक सहारा है। पूरी रात इसकी मदद से खुद और सामान को बचाने की जद्दोजहद में बीत गई।।
5 of 10
पुलिस कमिश्नर कार्यालय परिसर में बारिश के कारण हुआ जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला
पड़ोसियों ने दी मदद
0 ऊंचवागढ़ी के नीरज पासवान का एक मंजिला मकान है। उन्होंने परिवार को सोरांव स्थित गांव में भेज दिया है। बेटे के साथ वह यहीं रुक गए हैं। मकान में पानी घूस गया है। इसलिए पूरा सामान छत पर रखे हैं लेकिन लगातार बारिश से गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद पर पानी फिर गया है। हालांकि उनकी परेशानी को देखते हुए बृहस्पतिवार को पड़ोसी मदद के लिए आगे आए। उनके पड़ोसी का दो तल का मकान है। रस्से की मदद से जरूरी सामान पड़ोसी के घर में रखा गया। उनका कहना है कि बाढ़ का पानी कम नहीं हुआ तो छत पर पड़ा शेष सामान छोडक़र वह भी बेटे संग गांव चले जाएंगे।