जाने माने आलोचक पद्म श्री शम्सुर्रहमान फारूकी की शख्सियत भी अपने नाम की तरह ही रही ...सूरज की तरह रोशनी बिखरेने वाला। उर्दू आलोचना को नया मुकाम देने वाले शम्सुर्ररमान ने अफसानानिगारी को भी नई शैली से नवाजा। खत्म होती दास्तानगोई में नई जान फूंकी और ‘कई चांद थे सरे आसमां’ के जरिये गालिब और दाग के दौर के हिंदुस्तान से दुनिया को रूबरू कराया।
Prayagraj : उर्दू आलोचना को नए मुकाम तक ले गए पद्मश्री शम्सुर्रहमान फारूकी
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 26 Dec 2020 01:10 AM IST
सार
सफरनामा
पद्मश्री शम्सुर्रहमान फारूकी
जानेमाने उर्र्दू आलोचक
जन्म: 15 जनवरी, 1935
निधन: 25 दिसंबर, 2020
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए
उर्दू अदब के नामवर आलोचक शम्सुर्रहमान फारूकी को उर्दू आलोचना के टीएस एलियट के रूप में माना जाता है। उन्होंने साहित्यिक समीक्षा के नए मॉडल तैयार किए हैं।
सम्मान
साहित्य अकादमी
सरस्वती सम्मान
असर लखनवी उर्दू अंतरराष्ट्रीय अवार्ड
पाक का मशहूर सम्मान ‘सितार-ए- इम्तियाज’
बिहार का मौलवी मजहरुल हक सम्मान
दिल्ली अकादमी का बहादुरशाह जफर सम्मान
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन