इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सहायक अध्यापक के पद पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थी से इतनी परिपक्वता की उम्मीद की जाती है कि वह परीक्षा देते समय निर्देशों को ठीक से पढ़ेगा। ओएमआर शीट पर रोल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर गलत भरना मामूली गलती नहीं है। वह भी तब जब स्पष्ट रूप से इस बारे में निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने टीजीटी 2016 में सहायक अध्यापक पद के अभ्यर्थी को ओएमआर शीट में गलत रोल नंबर भरने पर सुधार की अनुमति देने से इंकार कर दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि ओएमआर शीट पर स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि सभी प्रविष्टियों को सही तरीके से भरना है। इनको बाद में सुधारने का अवसर नहीं मिलेगा। इन निर्देशों को सावधानीपूर्वक पढ़ने में असफल रहने वाले अभ्यर्थियों को बाद में सुधार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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अभ्यर्थी सुखबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने दिया है। याची का कहना था कि उसने सहायक अध्यापक एलटी ग्रेड परीक्षा की ओएमआर शीट पर भूलवश अपना रोल नंबर गलत भर दिया है, जिसकी वजह से उसकी कॉपी जांची नहीं गई। कोर्ट से मांग की गई कि इस मामूली गलती को सुधारने का मौका देते हुए उसकी ओएमआर शीट जांची जाए तथा परिणाम घोषित किया जाए। याचिका का अधिवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने प्रतिवाद किया।
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पूर्व में पारित कई न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि याची द्वारा की गई गलती को मामूली गलती नहीं कहा जा सकता। उसने ओएमआर शीट पर दिए निर्देशों को ठीक से नहीं पढ़ा। अगर इस प्रकार की गलती को सुधारने का अवसर दिया जाता है तो फिर इस प्रक्रिया का कोई अंत नहीं होगा। कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा ओएमआर शीट की गलती न सुधारने के निर्णय को सही मानते हुए याचिका खारिज कर दी।