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नरेंद्र गिरि मौत प्रकरण : शक की सुई विद्यार्थियों-सेवादारों की ओर, महंत की मौत के समय मठ में नहीं था कोई साधु

Tue, 28 Sep 2021 02:27 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 28 Sep 2021 02:27 AM IST
सार

  • महंत की मौत की सूचना पर शाम को बड़े हनुमान मंदिर से मठ पहुंचे थे अमर गिरि, आनंद गिरि के निष्कासन पर अमर को मिली है मंदिर की जिम्मेदारी

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Narendra Giri Death Case: The needle of suspicion towards the students-servants, there was no monk in the monastery at the time of the death of the Mahant
Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि और योग गुरु आनंद गिरि। फाइल फोटो - फोटो : प्रयागराज

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के पीछे सेवादारों और विद्यार्थियों की ओर शक की सुई घूमने लगी है। इसलिए कि उस दिन बाघंबरी मठ में निरंजनी अखाड़े का कोई साधु मौजूद नहीं था। एक साधु था भी तो वह बड़े हनुमान मंदिर की व्यवस्था में लगा था। ऐसे में मौत का राज उन्हीं विद्यार्थियों, सेवादारों के बीच माना जा रहा है,जो महंत की सेवा में होने के साथ ही उनके करीब भी थे।



शाम पांच बजे मठ के आगंतुक कक्ष में मौत के दिन महंत की दिनचर्या आम दिनों की तरह सामान्य होने की बात कही जा रही है। किसी वजह से उनके असहज होने या फिर डिप्रेशन में रहने की बात इसलिए भी किसी को हजम नहीं हो रही है, क्योंकि एक दिन पहले ही डिप्टी सीएम केशव मौर्य की मौजूदगी में भाजपा सरकार में विकास और कानून-व्यवस्था, हिंदुत्व की रक्षा को लेकर उन्होंने एक न्यूज चैनल को साक्षात्कार दिया था, जिसमें वह बेहद प्रसन्न मुद्रा में नजर आ रहे हैं।

Narendra Giri Death Case: The needle of suspicion towards the students-servants, there was no monk in the monastery at the time of the death of the Mahant
Prayagraj News : योग गुरु आनंद गिरि और महंत नरेंद्र गिरि। फाइल फोटो - फोटो : प्रयागराज

वह बहुत ही सधे अंदाज में रिपोर्टर के एक-एक सवालों का जवाब देते दिख रहे हैं। उनके चेहरे पर तनिक भी तनाव या किसी बात को लेकर परेशानी के भाव नहीं थे। जबकि, उनके गले से मौत का फंदा काटने वाले सेवादार बता रहे हैं कि महंत कई दिनों से डिप्रेशन में थे। हालांकि मौत के दिन भी वह रोज की तरह समय से उठने के बाद बाघंबरेश्वर महादेव की पूजा, आरती में शामिल हुए थे।

Narendra Giri Death Case: The needle of suspicion towards the students-servants, there was no monk in the monastery at the time of the death of the Mahant
Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि की हत्या के आरोपी संदीप तिवारी, आद्या प्रसाद तिवारी और योग गुरु आनंद गिरि। फाइल फोटो - फोटो : प्रयागराज

निर्धारित समय पर ही उन्होंने खाना भी खाया था। पता चला है कि उस दिन मठ में कोई साधु मौजूद नहीं था। मौत की सूचना के बाद जब आईजी केपी सिंह वहां पहुंचे, तभी अमर गिरि उर्फ पवन महराज उस कक्ष में दाखिल हुए। अमर गिरि अकेले ऐसे संत हैं, जो उस दिन मठ में महंत के शव के साथ देखे गए थे।

जबकि, घटना से पहले उनके संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर में मौजूद होने की बात कही जा रही है। आनंद गिरि से बड़े हनुमान मंदिर की व्यवस्था छीने जाने के बाद महंत नरेंद्र गिरि ने वहां की जिम्मेदारी अमर गिरि को दी थी। अमर गिरि की तहरीर पर ही दारागंज थाने में महंत की मौत का केस दर्ज कराया गया है। ऐसे में इस घटना के पीछे सेवादारों और विद्यार्थियों की भूमिका शक के दायरे में है।

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Prayagraj News : महंत नरेंद्र गिरि मौत प्रकरण। - फोटो : प्रयागराज
महंत की मौत के दिन हरिद्वार में थे बलवीर गिरि
प्रयागराज। महंत के सुसाइड नोट में उत्तराधिकारी के तौर पर निरंजनी अखाड़े के जिस साधु बलवीर गिरि का नाम लिखा गया है, उनके भी उस दिन हरिद्वार में होने की बात कही जा रही है। पहले आगंतुक कक्ष में महंत के शव के साथ जिसे बलवीर गिरि कहा जा रहा था, वह बड़े हनुमान मंदिर के नए व्यवस्थापक अमर गिरि थे। बलवीर गिरि महंत की मौत की सूचना मिलने के बाद हरिद्वार के विल्केश्वर मंदिर से दूसरे दिन यहां पहुंचे।

वैसे आनंद गिरि से बढ़ती दूरियों के बीच महंत नरेंद्र गिरि ने 2019 के कुंभ में ही बलवीर गिरि को बाघंबरी मठ बुला लिया था। लेकिन, कुंभ के बाद कहा जा रहा है कि वह चले गए थे। इस बीच उनका आना जाना लगा रहा। इस बार गुरु पूर्णिमा पर 24 जुलाई को मठ से निष्कासित शिष्य आनंद गिरि और बलवीर गिरि दोनों को ही गुरु पूजा के लिए आना था, लेकिन अखाड़े में वापसी पर निर्णय न होने से आनंद नहीं आ सके थे। बलवीर ने ही गुरु के पांव पखारे थे।
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Prayagraj News : सीबीआई टीम ने मठ बाघंबरी गद्दी में पहुंचकर छानबीन की। - फोटो : प्रयागराज

सेवादारों के साथ साधु संन्यासियों भी आए पूछताछ के दायरे में 

सीबीआई की पूछताछ के दायरे में अब सेवादारों और शिष्यों के साथ मठ से जुड़े साधु संन्यासी भी आ गए हैं। सोमवार को निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी समेत तमाम साधु संन्यासियों से पूछताछ की। उनसे मठ से जुड़े पुराने विवाद, उत्तराधिकार और वसीयत से जुड़े सवाल पूछे गए। 

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