मौनी अमावस्या पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने सारे अनुमान ध्वस्त कर दिए। जिसका नतीजा यह हुआ कि मेला व जिला पुलिस को आननफानन में ट्रैफिक का इमरजेंसी प्लान लागू करना पड़ा। मेला पुलिस ने छह नंबर आपातकालीन योजना का सहारा लिया तो जिला पुलिस ने होल्ड अप प्लान के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया। मेला प्रशासन की ओर से मौनी अमावस्या पर करीब तीन करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने का अनुमान जताया गया था।
हालांकि प्रशासन के दावों के अनुसार ही शाम तक करीब पांच करोड़ लोगों ने स्नान किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते मेला व जिला प्रशासन की ओर से ट्रैफिक के संबंध में बनाई गईं योजनाएं फेल हो गईं। हालात यह हुए कि दोनों स्तरों पर पुलिस को सामान्य योजनाओं को किनारे करते हुए इमरजेंसी प्लान लागू करना पड़ा। आपातकालीन योजना लागू करने के बाद ही भीड़ को नियंत्रित किया जा सका और तब जाकर पुलिस अफसरों ने राहत की सांस ली।
मेला पुलिस ने ऐसे नियंत्रित की स्थिति
श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला दो दिन पहले से ही शुरू हो गया था। हर बीतते पल के साथ भीड़ बढ़ती ही जा रही थी। हालांकि रविवार सुबह 11 बजते-बजते श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते संगम एरिया लगभग चोक होने की स्थिति में आ गया। मेला अफसरों ने बताया कि हालात यह थे कि संगम नोज पर पांव रखने की भी जगह नहीं थी। यही वजह रही कि आननफानन में 11.30 बजे के करीब इमरजेंसी प्लान छह का इस्तेमाल किया गया।
बता दें कि मेला पुलिस की ओर से आपाकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कुल 14 आपातकालीन योजनाएं बनाई गईं थीं। छह नंबर प्लान के तहत जीटी जवाहर चौराहे से मेला क्षेत्र में आ रहे श्रद्धालुओं को झूंसी की ओर डायवर्ट किया गया। इसके बाद उन्हें झूंसी साइड से मेले में प्रवेश दिया गया।
इसके चलते भीड़ को मेला क्षेत्र में पहुंचने में वक्त लगा और इसी वक्त में मेला क्षेत्र के भीतर मौजूद लोगों को स्नान कराकर बाहर निकाल दिया गया। एसपी मेला नीरज पांडेय ने बताया कि पहले एक नंबर आपातकालीन योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत भीड़ को कुछ देर के लिए मेला क्षेत्र के आसपास घुमाया जाना था। लेकिन चर्चा के बाद छह नंबर योजना लागू की गई।