डमरू बजाकर, त्रिशूल घुमाकर, दंड उठाकर और गंगाजल में भीगी हुई जटाओं को लहराकर संतों और नागा संन्यासियों ने मौनी अमावस्या पर संगम में डुबकी लगाई। अमावस के इस शाही स्नान पर इस बार कुछ नया भी नजर आया, जिसने कतारबद्ध होकर हाथ जोड़े खड़े श्रद्धालुओं में भी जोश भर दिया। संत और नागा संन्यासी अपने इष्ट देवताओं की आराधना के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भी जयकारे लगा रहे थे।
संतों और नागा संन्यासियों की टोलियों से जब जयश्रीराम के नारे गूंजते तो श्रद्धालुओं की तरफ से इस नारे को दोनों हाथ उठाकर बोला जाता। लोगों में रोमांच उस समय और भर आया जब किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने रथ पर खड़े होकर पूरे जोश में जयश्रीराम का नारा लगाया। यह सिर्फ एक बार नहीं हुआ। सुबह ६ बजे से लेकर दोपहर बाद तक जब-तक शाही स्नान चलता रहा, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर शंखनाद होता रहा। बीच-बीच में मीडिया वालों की तरफ से ली जाने वाली बाइट में भी संतों ने जोर देकर कहा अगला कुंभ अयोध्या में भव्य राम मंदिर की आरती और पूजन के साथ ही शुरू होगा।
राम मंदिर निर्माण को लेकर संघ, विहिप, अखाड़ों की राय भले ही अलग-अलग हो, लेकिन हर कोई अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण चाहता है। इसके लिए कुंभ क्षेत्र में स्नान करने पहुचे श्रद्धालुओं का भी इस मामले में साथ मिल रहा था। जैसे-जैसे जय श्रीराम का शंखनाद तेज होता जाता, आसमान में उड़ रहे हेलीकाप्टर से उसी रौ में फूलों की वर्षां भी होती रही। इस दृष्य को देखकर आम श्रद्धालु अनायास ही कह उठते थे, लगता है इस बार फिर केंद्र में मोदी सरकार आ सकती है।
लोग यह भी कहते सुने गए कि योगी सरकार ने इस बार कुंभ को भव्य बनाने के पीछे जो भी रणनीति बनार्ई हो, उसमें वह कुछ हद तक सफल होते दिख रहे हैं। अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर ब्रह्मचारी कैलाशानंद महाराज के रथ के साथ चल रहे श्रद्धालु जयकारे के बीच बड़े आकार के डमरूओं को इस अंदाज में बजा रहे थे, जैसे कह रहे हों कि अब शंखनाद हो चुका है।
सिर्फ नागा संन्यासियों में ही नहीं बैरागी अखाड़ों, खालसा के संतों में भी अयोध्या सिर चढ़कर बोल रही थी। भले ही कोई मध्य प्रदेश से हो, दक्षिण भारत के राज्यों से हो लेकिन जब भी जय श्रीराम के नारा लगता तो सभी अपने रथ पर खड़े हो जाते थे। यहां तक संगम में पहुंचकर डुबकी लगाते समय भी जय श्रीराम का नारा गूंज रहा था।