नए वर्ष और क्रिसमस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को परेड मैदान पर आयोजित नारी शक्ति कार्यक्रम में लाखों महिलाओं को विभिन्न योजनाओं की सौगात दी। उन्होंने बटन दबाकर 1.60 लाख स्वयं सहायता समूहों के खातों में एक हजार करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इसका लाभ 16 लाख महिलाओं को मिलेगा। इसी क्रम में उन्होंने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की 1.01 लाख लाभार्थियों के खातों में भी 20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए।
मातृशक्ति महाकुंभ : प्रधानमंत्री ने 2.61 लाख लाभार्थी महिलाओं के खाते में ट्रांसफर की योजना की राशि
सामुदायिक निवेश फंड के तहत 80 हजार समूहों के खाते में धनराशि ट्रांसफर की गई। हर समूह को 1.10 लाख रुपये मिले। 60 हजार समूहों के खातों में 15-15 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
एक घंटा पहले पहुंचे मुख्यमंत्री, देखी तैयारी
विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को जोड़े रहने की जद्दोजहद कहें या फिर प्रधानमंत्री के स्वागत का उत्साह. लेकिन मंत्री तथा अन्य नेता निर्धारित कार्यक्रम से दो घंटे से पहले भी पहुंच गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम से सवा घंटे पहले ही परेड मैदान में पहुंच गए थे। निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री को आयोजन स्थल पर 1.05 बजे आना था लेकिन 12.59 मिनट पर ही बीसी सखियों संग वार्ता करने पहुंच गए।
इनसे पहले पौने बारह बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आ गए थे। तैयारियां देखने के बाद वह बम्हरौली एयरपोर्ट गए और फिर प्रधानमंत्री के साथ आए। मुख्यमंत्री से पहले करीब साढ़े ग्यारह बजे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मंच पर मौजूद रहे। इनसे पहले मंत्री, सांसद, विधायक तथा अन्य नेता मंच पर अपनी-अपनी कुर्सी संभाल चुके थे। प्रधानमंत्री के आगमन से पहले उप मुख्यमंत्री मंच पर लगातार सक्रिय रहे तथा अफसरों, संचालक तथा अन्य लोगों को लगातार निर्देश देते रहे।
देश की तकदीर संवारने निकली मातृ शक्ति ने दिखाई ताकत
त्रिवेणी के तट पर मंगलवार को अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से देश की तस्वीर संवारने में जुटीं ढाई लाख से अधिक महिलाओं का संगम हुआ। प्रधानमंत्री ने बटन दबाकर आर्थिक संबल प्रदान किया तो पूरे आयोजन के दौरान के उनके जोश एवं उत्साह ने यह दिखाया कि वह अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए तत्पर हैं।
आयोजन स्थल पर महिलाओं के पहुंचने का क्रम नौ बजे से ही शुरू हो गया था। हर तरह से रेला चला आ रहा था। पीली तथा केसरिया साड़ी में पहुंचीं हजारों महिलाएं देश की समृद्धि की कहानी बयां कर रही थीं। काली सड़क से त्रिवेणी मार्ग के बीच पूरे मैदान में उनकी मौजूदगी रही। मंच से जब नारी शक्ति की बात की गई तो उन्होंने तालियों से उसका स्वागत किया। एनएसएस, स्काउट गाइड, एनसीसी से जुड़ी छात्राओं में काफी उत्साह दिखा तथा उन्होंने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
आगे की कतार से जब भी कोई महिला मंच की ओर से बढ़ने की कोशिश करती तो छात्राएं दीवार बनकर उसके सामने खड़ी हो जातीं। जोश और उत्साह के बीच भी उनकी मुस्कान बनी रही। दूर बैठी महिलाओं को नेता नजर नहीं आ रहे थे। इसलिए जगह-जगह स्क्रीन लगाई गई थीं, जिन पर कार्यक्रम का सजीव प्रसारण हो रहा था।
मोदी के कटआउट को लेकर रही चर्चा
पूरे मैदान में योजनाओं वाले होर्डिंग-पोस्टर के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कटआउट लगे थे। इन्हें लेकर चर्चा होती रही तो युवाओं में उत्साह भी दिखा। युवाओं ने कटआउट केसाथ सेल्फी भी ली।
किनारे बैठी महिलाओं की नजर से दूर रहा मंच, नाराजगी
बैठने की व्यवस्था को लेकर महिलाओं में नाराजगी भी रही। लाल सड़क की तरफ हजारों महिलाओं को बैठाया गया था, लेकिन मंच तथा उनके बीच में पंडाल बना था। इसकी वजह से उन्हें मंच नजर ही नहीं आ रहा था। बड़ी संख्या में महिलाओं को बैठने की भी जगह नहीं मिली। इससे उनमें नाराजगी रही।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी नहीं मिला दूध
रात में तथा सुबह मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर महिलाओं ने नाराजगी जताई। सीतापुर की अनीता, मोहनी, माधुरी देवी आदि का कहना था कि सब्जी तो खाते ही नहीं बन रही थी। माधुरी और किरन के छोटे बच्चे थे। उन्हें दूध भी नहीं मिला। जबकि, मुख्यमंत्री ने दूध के इंतजाम का निर्देश दिया था।
मातृ शक्ति के उद्घोष के बीच निराश लौटीं पीड़िताएं
परेड मैदान में प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए सजे मंच से मातृ शक्ति का लगातार उद्घोष होता रहा। महिला सशक्तीकरण तथा सुरक्षा को लेकर नेताओं ने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन वहां पीड़िताओं की आवाज किसी को नहीं सुनाई दी। पीएम को अपना दुखड़ा सुनाने पहुंचीं महिलाओं को निराश होना पड़ा।
मंच के सामने बैठीं मोहनी तथा कई अन्य महिलाएं प्रधानमंत्री से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहती थीं। उनका कहना था कि आवास तथा कई योजनाओं के लिए उन्होंने काफी पहले आवेदन किया था लेकिन उन्हें किसी का लाभ नहीं मिला। उन्हाेंने चहेतों को ही योजनाओं का लाभ दिए जाने का आरोप लगाया। इनमें से कई महिलाएं अपना दर्द बयां करते हुए रो भी पड़ीं। पुलिस कर्मियों तथा एनसीसी की छात्राओं ने उन्हें आगे बढ़ने से रोके रखा। स्वरूपरानी अस्पताल में संविदा पर तैनात नर्सिंग स्टॉफ ने भी प्रधानमंत्री से मिलने और ज्ञापन सौंपने की कोशिश की।
वह मंच के करीब तक पहुंच गईं थीं। उनका कहना था कि जुलाई से ही उन्हें मानदेय नहीं मिला। इसके अलावा कभी पूरा मानदेय भी नहीं मिला। वीवीआईपी दीर्घा में बैठी एक महिला भी प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने की जिद कर रही थी। इनके अलावा कई अन्य महिलाओं ने भी प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री से मिलकर अपना दुखड़ा सुनाने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा घेरे और शोर के बीच उनकी आजा दबी रह गई।