सोमवार से शुरू हो रहे लॉकडाउन-5 में भले ही आठ जून से मठ-मंदिर खुलेंगे, लेकिन उससे पहले संगम पर सन्नाटा टूट गया है। गंगा दशहरा से पहले संगम पर डुबकी, दीपदान शुरू होने से रौनक बढ़ गई है। पुरोहितों की चौकियों पर चंदन घिसे जाने लगे हैं।
70 दिन बाद गुलजार हुआ संगम, घिसे जाने लगे चंदन, मोक्ष के लिए अस्थि विसर्जन भी आरंभ
प्रसाद और फूलमाला की दुकानें भी खुली रहीं। चूड़ी, बिंदी, सिंदूर और नारियल की दुकान चलाने वाले नरेश और मालती ने बताया कि तीर्थयात्रियों की आवाजाही शुरू हो गई है। ऐसे में धीरे -धीरे जिंदगी की गाड़ी पटरी पर आने लगी है। संगम पर गंगा पुजैया होने लगी। मंगल गीत भी महिलाएं गाने लगी हैं। तीर्थपुरोहित बड़का गुरु ने बताया कि संगम पर अब अस्थि विसर्जन व पिंडदान के लिए भी लोग आ रहे हैं।
इससे चौकियों पर तिलक-त्रिपुंड लगने के साथ ही संकल्प दिलाए जाने लगे हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी कड़ाई के साथ पालन कराया जा रहा है। अस्थि विसर्जन के दौरान भी नावों से सिर्फ दो लोग ही दूरी बनाकर संगम की धारा में जा रहे हैं। पिंडडान और पूजा के दौरान भी सामूहिकता से बचने की पूरी कोशिश की जा रही है।
हालांकि जिस संगम तट पर हर रोज देश, दुनिया से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचते रहे हैं, वहां अभी कोरोना वायरस के डर की वजह से धीरे-धीरे आवाजाही शुरू हुई है। रविवार को को पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के कटनी, रीवा समेत कई जिलों के वाहनों से लोग गंगा स्नान और कर्मकांड के लिए पहुंचे।
संगम पर श्रद्धालु आने लगे हैं। ऐसे में तीर्थपुरोहितों को भी काम मिलने लगा है। संगम पर छाई उदासी टूटने लगी है।
राजेंद्र पालीवाल, महामंत्री, प्रयागवाल तीर्थपुरोहित सभा।
संगम पर नौका संचालन भी आरंभ
प्रयागराज। संगम पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही शुरू होने के साथ ही नावों का संचालन भी आरंभ हो गया है। रविवार को श्रद्धालुओं ने नावों से बीच संगम पहुंचकर डुबकी लगाई। घाट पर प्रसाद, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, रोली, चंदन की दुकानें भी खुल गई हैं। नाविक संघ के जिलाध्यक्ष पप्पू लाल निषाद ने बताया कि तीन महीने के बाद कुछ नावें खुली हैं, लेकिन अभी श्रद्धालुओं के आने का क्रम धीमा होने की वजह से दिक्कतें बनी हुई हैं।
कोरोना से जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति को संगम पर पिंडदान
प्रयागराज। देश-दुनिया में अब तक कोरोनावायरस की चपेट में आकर जान गवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए रविवार को संगम तट पर तीर्थ पुरोहितों की ओर से पिंडदान किया गया। इस दौरान पंडित दीपू शास्त्री के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी कर्मकांड पूरे किए गए।साथ ही मां गंगा से भी प्रार्थना की गई कि महामारी की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की आत्मा को शांति मिले। ऐसे दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए त्रिवेणी तट पर पिंडदान, पूजन करने वालों में राजेंद्र पालीवाल, संतोष भारद्वाज, राजेश तिवारी, प्रदीप पांडेय, दिनकर पांडेय, अनुज तिवारी, राजेश पांडेय, आशुतोष पालीवाल, रमेश यादव, संजय श्रीवास्तव आदि तीर्थ पुरोहित शामिल थे।