इस बार सूर्य शोभन योग में मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस योग में सूर्य का राशि परिवर्तन बेहद फलदायी होगा। माघ कृष्ण पंचमी पर 15 जनवरी को मकर संक्रांति स्नान पर्व पर संगम पर पुण्य की डुबकी हर किसी के लिए खास होगी। इस तिथि पर सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही खरमास उतर जाएगा और शुभ घड़ी आरंभ हो जाएगी।
मकर संक्रांति पर शोभन योग में लगेगी पुण्य की डुबकी, जानिए कब है स्नान का सबसे उत्तम मुहूर्त
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के साथ शोभन योग में मकर संक्रांति हर क्षेत्र में सफलता का सूचक बनेगी। इस योग से इस बार संगम स्नान का महत्व काफी बढ़ गया है। प्रयाग में मंगलवार की मध्यरात्रि के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, लेकिन स्नान सूर्योदय के साथ ही आरंभ होगा। इस मकर संक्रांति पर किया गया दान -पुण्य और अनुष्ठान फलदायी होगा। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही शनि-सूर्य का मिलन भी होगा। सूर्य और शनि दोनों ही ग्रह पराक्रमी हैं। ऐसे में सूर्य देव के मकर राशि में आने पर शनि की प्रिय वस्तुओं के दान से भक्तों के मार्ग की बाधाएं दूर होंगी।
ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार प्रयाग में यमुना का वास होने के कारण सूर्य और शनि की युति महापुण्य फलदायी होगी। इस संक्रांति पर्व पर स्नान, अन्न, वस्त्र के दान से आंतरिक ऊर्जा का संचार बढ़ेगा और कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। मकर संक्रांति के दिन तिल से बनी वस्तुओं का दान कर लोग शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकेंगे। डॉ देवी प्रसाद गौड़ प्राच्य विद्या अनुसंधान संस्थान के निदेशक आचार्य अमिताभ के अनुसार बुधवार की सुबह 7:26 बजे सूर्य का मकर राशि में संचरण आरंभ हो जाएगा।
मोक्ष की सीढ़ी के रूप में मकर संक्रांति पर्व की मान्यता
ज्योतिषाचार्य लोकनाथ चतुर्वेदी के अनुसार सनातन धर्म में मकर संक्रांति की मान्यता मोक्ष की सीढ़ी के रूप में है। इस तिथि पर भीष्म पितामह को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। इस तिथि पर सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण होते हैं और खरमास समाप्त हो जाता है। प्रयाग में कल्पवास भी मकर संक्रांति से पूर्ण रूप से शुरू होता है। सनातन संस्कृति में इस दिन को सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
7:26 बजे सूर्य का मकर राशि पर संचरण
पुण्यकाल
भोर में चार बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
महा पुण्यकाल
प्रात: 6:51 से 9:03 बजे तक