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MahaKumbh 2025: 21 शृंगार कर नागा संन्यासियों ने अमृत स्नान की लगाई डुबकी; धारण की दीक्षा की दिगंबर वेशभूषा
Tue, 14 Jan 2025 03:30 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 14 Jan 2025 03:30 PM IST
सार
Naga Sadhus: 21 शृंगार कर नागा संन्यासियों ने अमृत स्नान की पहली डुबकी लगाई। दीक्षा की दिगंबर वेशभूषा धारण की। महाकुंभ के पहले अमृत स्नान में अपने इष्ट महादेव की तरह ही नागा साधुओं का शृंगार भी देश भर के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।
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MahaKumbh
- फोटो : पीटीआई
Maha Kumbh Mela: नख से शिख तक भभूत। जटाजूट की वेणी, आंखों में सूरमा, हाथों में चिमटा, होठों पर सांब सदाशिव का नाम। भभूत लपेटे, दिगंबर, हाथ में डमरू, त्रिशूल और कमंडल के साथ ही अवधूत की धुन में झूमते हुए नागा त्रिवेणी के तट पर पहले अमृत स्नान के लिए प्रस्थान किया। साधुओं ने 21 शृंगार के साथ अमृत स्नान की पहली डुबकी लगाई।
स्नान के लिए जाते हुए साधु
- फोटो : अमर उजाला
नागा साधुओं ने आदियोगी शिव के स्वरूप में खुद को सजाया
त्रिवेणी के तट पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान पुष्य और पुनर्वसु नक्षत्र में आरंभ हुआ। प्रथम पूज्य भगवान गणेश का पूजन करने के बाद नागा साधुओं ने आदियोगी शिव के स्वरूप में खुद को सजाया। शरीर पर भस्म लगाने के बाद चंदन, पांव में चांदी के कड़े, पंचकेश यानी जटा को पांच बार घुमाकर सिर में लपेटा, रोली का लेप, अंगूठी, फूलों की माला, हाथों में चिमटा, डमरू, कमंडल, माथे पर तिलक, आंखों में सूरमा, लंगोट, हाथों व पैरों में कड़ा और गले में रुद्राक्ष की माला धारण करने के बाद नागा साधुओं ने प्रस्थान किया।
त्रिवेणी के तट पर महाकुंभ का पहला अमृत स्नान पुष्य और पुनर्वसु नक्षत्र में आरंभ हुआ। प्रथम पूज्य भगवान गणेश का पूजन करने के बाद नागा साधुओं ने आदियोगी शिव के स्वरूप में खुद को सजाया। शरीर पर भस्म लगाने के बाद चंदन, पांव में चांदी के कड़े, पंचकेश यानी जटा को पांच बार घुमाकर सिर में लपेटा, रोली का लेप, अंगूठी, फूलों की माला, हाथों में चिमटा, डमरू, कमंडल, माथे पर तिलक, आंखों में सूरमा, लंगोट, हाथों व पैरों में कड़ा और गले में रुद्राक्ष की माला धारण करने के बाद नागा साधुओं ने प्रस्थान किया।
स्नान के लिए जाते हुए साधु
- फोटो : अमर उजाला
दिखावा करना नहीं होता इस शृंगार का मतलब
महानिर्वाणी अखाड़े के शंकरपुरी महाराज ने बताया कि हिंदू धर्म में सुहागिन 16 शृंगार करती हैं, लेकिन नागा साधु अमृत स्नान के लिए 21 शृंगार करते हैं। इसमें शरीर के साथ ही मन और वचन का भी शृंगार शामिल होता है। इसके साथ ही सर्वमंगल की कामना भी होती है। इस शृंगार का मतलब दिखावा करना नहीं होता है। नागा साधु इसे अंदर तक महसूस भी करते हैं। महादेव को प्रसन्न करने के लिए 21 शृंगार के साथ ही नागा साधुओं ने संगम में अमृत स्नान की डुबकी लगाई।
महानिर्वाणी अखाड़े के शंकरपुरी महाराज ने बताया कि हिंदू धर्म में सुहागिन 16 शृंगार करती हैं, लेकिन नागा साधु अमृत स्नान के लिए 21 शृंगार करते हैं। इसमें शरीर के साथ ही मन और वचन का भी शृंगार शामिल होता है। इसके साथ ही सर्वमंगल की कामना भी होती है। इस शृंगार का मतलब दिखावा करना नहीं होता है। नागा साधु इसे अंदर तक महसूस भी करते हैं। महादेव को प्रसन्न करने के लिए 21 शृंगार के साथ ही नागा साधुओं ने संगम में अमृत स्नान की डुबकी लगाई।
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स्नान करते साधु
- फोटो : PTI
इष्टदेव महादेव से जुड़ा है शृंगार
महानिर्वाणी अखाड़े और अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि सिर से नख तक शृंगार के साथ ही मन का भी शृंगार जरूरी होता है। नागा साधु जो भी शरीर पर शृंगार करते हैं वह उनके इष्टदेव महादेव से जुड़ा हुआ है।
भभूत : क्षणभंगुर जीवन की सत्यता का आभास कराती है भभूत। नागा साधु भभूत को सबसे पहले अपने शरीर पर मलते हैं।
चंदन : हलाहल का पान करने वाले भगवान शिव को चंदन अर्पित किया जाता है। नागा साधु भी हाथ, माथे और गले में चंदन का लेप लगाते हैं।
रुद्राक्ष : रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। नागा साधु सिर, गले और बाजुओं में रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं।
तिलक : माथे पर लंबा तिलक भक्ति का प्रतीक होता है।
महानिर्वाणी अखाड़े और अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी ने बताया कि सिर से नख तक शृंगार के साथ ही मन का भी शृंगार जरूरी होता है। नागा साधु जो भी शरीर पर शृंगार करते हैं वह उनके इष्टदेव महादेव से जुड़ा हुआ है।
भभूत : क्षणभंगुर जीवन की सत्यता का आभास कराती है भभूत। नागा साधु भभूत को सबसे पहले अपने शरीर पर मलते हैं।
चंदन : हलाहल का पान करने वाले भगवान शिव को चंदन अर्पित किया जाता है। नागा साधु भी हाथ, माथे और गले में चंदन का लेप लगाते हैं।
रुद्राक्ष : रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। नागा साधु सिर, गले और बाजुओं में रुद्राक्ष की माला धारण करते हैं।
तिलक : माथे पर लंबा तिलक भक्ति का प्रतीक होता है।
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स्नान करते साधु
- फोटो : PTI
सूरमा : नागा साधु आंखों का शृंगार सूरमा से करते हैं।
कड़ा : नागा साधु हाथों व पैरों में कड़ा पीतल, तांबें, सोने या चांदी के अलावा लोहे का कड़ा पहनते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव भी पैरों में कड़ा धारण करते थे।
चिमटा : चिमटा एक तरह से नागा साधुओं का अस्त्र भी माना जाता है। नागा साधु हमेशा हाथ में चिमटा रखते हैं।
कड़ा : नागा साधु हाथों व पैरों में कड़ा पीतल, तांबें, सोने या चांदी के अलावा लोहे का कड़ा पहनते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव भी पैरों में कड़ा धारण करते थे।
चिमटा : चिमटा एक तरह से नागा साधुओं का अस्त्र भी माना जाता है। नागा साधु हमेशा हाथ में चिमटा रखते हैं।