अब सनातन और हिंदुत्व का वैभव पूरी दुनिया में दिख रहा है। हर कोई शांति खोज रहा है। दूसरे देशों के लोग भी सनातन धर्म से जुड़कर दीक्षा ले रहे हैं। महाकुंभ में आज ही कई देशों से आए श्रद्धालुओं ने आश्रम में दीक्षा ली है। इसके बाद वह पूरी तरह सनातन धर्म के आधार पर अपना जीवनयापन करेंगे।
यह कहना है अमेरिका में रहने वाली अनंतश्री विभूषित जगद्गुरु भक्तिमयी मीराबाई साईं मां लक्ष्मी देवी का। महाकुंभ क्षेत्र के सेक्टर 20 में बने शक्तिधाम आश्रम में उन्होंने नीरज मिश्रा से विशेष बातचीत की।
जगद्गुरु साई मां लक्ष्मी देवी मॉरीशस में पैदा हुई। कुछ वर्षों के बाद वह फ्रांस चली गई। इसी दौरान वह सत्य साईं बाबा से मिली और उनकी शिष्य बन गई।
2007 में उन्हें जगद्गुरु की उपाधि से सम्मानित किया गया। साईं मां लक्ष्मी के माता-पिता दक्षिण भारतीय हैं और वह अमेरिका में रहते हैं। उनके आश्रम भारत में वाराणसी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों में है। 40 देशों में उनके शिष्य हैं।
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जगद्गुरु साईं मां लक्ष्मी देवी
- फोटो : अमर उजाला
आपके आश्रम में अधिकतर विदेशी दिख रहे हैं। क्या यह सभी सनातनी हो गए हैं?
सनातन के बारे में अब पूरे विश्व में चर्चा हो रही है। पिछले एक दशक से अधिक समय से मेरे आश्रम में लोग जुड़ रहे हैं। विदेशों से अनेक भक्त भारत आकर सनातन का वैभव देख रहे हैं। यही नहीं, वह सनातनी बनने के लिए आश्रम से दीक्षा लेकर हमारे अनुसार योग, जाप और तप कर रहे हैं। आश्रम में अभी अमेरिका, फ्रांस समेत पश्चिम के कई देशों से करीब 40 साधु-संत पहुंचे हैं। इनमें नौ महामंडलेश्वर हैं। यह सभी सनातन के प्रचार में लगे हैं।
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जगद्गुरु साईं मां लक्ष्मी देवी
- फोटो : अमर उजाला
कुछ देशों में युद्ध चल रहा है, यह कब रुकेंगे?
कुछ देशों में अपनी ताकत दिखाने की होड़ है। अमेरिका सैन्य हथियारों के निर्यात में अपना वर्चस्व चाहता है। जब तक हथियार बनने कम नहीं होंगे, उनका प्रयोग होता रहेगा।
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जगद्गुरु साईं मां लक्ष्मी देवी
- फोटो : अमर उजाला
अमृत स्नान के दौरान एक संत के रथ पर एक एंकर के जाने से विवाद हो रहा है। आपका क्या कहना है?
मुस्कराते हुए। मैं आपका सवाल समझती हूं। लेकिन मुझे इसमें कोई विवाद समझ में नहीं आता है। यह आत्मा के परिवर्तन की बात है। अगर किसी का मन धर्म और अध्यात्म में लग रहा है। उसे आश्रमों में खुशी और शांति मिल रही है। वह अध्यात्म की राह पर चलना चाहता है, तो इसमें बुराई क्या है। धर्म के लिए आगे आना हम सबका फर्ज है।
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सनातन बोर्ड क्यों जरूरी है?
सनातनियों के देश में सनातन बोर्ड नहीं होगा, तो कहां होगा। भारत के लिए सनातन बोर्ड बहुत जरूरी है। हमारे धर्म के पूजा-पाठ बहुत प्रभावी हैं। जब सुनामी आई थी तब लाखों लोग मारे गए थे। मैं वाराणसी से ब्राह्मणों को लेकर गई और विदेशों में अनुष्ठान कराए। उसका प्रतिफल मिला कि सुनामी जैसी आपदा फिर नहीं आई। ऐसा वहां के लोग भी मानते हैं।