माघ शुक्ल पक्ष की अचला सप्तमी पर शनिवार को संगम स्नान के साथ रेती पर लगे प्रमुख शिविरों में लोक मंगल के लिए अनुष्ठान होंगे। साथ ही मास पर्यंत अनुष्ठानों की पूर्णाहुतियां भी होंगी। इसी के साथ संतों की टोलियां विदा होने लगेंगी। इस तिथि पर सुख-समृद्धि के लिए सूर्योपासना भी की जाएगी।
माघ मेलाः अचला सप्तमी आज, सूर्योपासना करेंगे संत-कल्पवासी
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संगम पर अचला सप्तमी की डुबकी शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही लगने लगेगी। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु संगम पर दान और ध्यान करेंगे। इसके लिए शुक्रवार की आधी रात से ही लोग शिविरों से निकल कर घाटों पर पहुंचने लगे हैं। लाखों की तादाद में कल्पवासियों के अलावा संत और भक्त संगम पर डुबकी लगाएंगे। पुत्र की प्राप्ति और रक्षा के लिए संतान सप्तमी का व्रत भी रखा जाएगा। माघी सप्तमी पर शनिवार को कल्पवास करने वाली महिलाएं सुख, समृद्धि, आरोग्य की कामना से व्रत रखेंगी।
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर संगम स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाएगा। फिर विधि विधान से सूर्य देव का पूजन और अर्चन करेंगी। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार अचला सप्तमी दोपहर बाद 3:52 बजे ही लग गई। शनिवार को दिन भर स्नान का मुहूर्त रहेगा। मान्यता के अनुसार इस दिन संगम स्नान और अर्घ्यदान से आयु, आरोग्य व संपत्ति की प्राप्ति होती है। कल्पवास कर रहे श्रद्धालु इस दिन सूर्यास्त के बाद भी स्नान करेंगे। त्रिवेणी तट पर दीपदान भी किया जाएगा। इसके लिए कल्पवासियों के शिविरों में व्यापक तैयारियां की गई हैं। संतों के शिविरों में विविध अनुष्ठान किए जाएंगे। इसी के साथ संत माघ मेले से विदा होने लगेंगे।
माघ मेले से विदा होंगे पुरी के शंकराचार्य
प्रयागराज। अचला सप्तमी पर संगम में स्नान और ध्यान के बाद गोवर्धनपुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती शिविर से विदा हो जाएंगे। वह सुबह शिष्यों और दंडी सन्यासियों के अलावा भक्तों के साथ संगम में डुबकी लगाएंगे। इसी तरह तंत्र योगाचार्य आलोक चंद्र पांडेय के शिविर से भी साधकों की टोलियां विदा हो जाएंगी।
अचला सप्तमी पर बाघंबरी गद्दी मठ में आज ध्वजारोहण
प्रयागराज। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि की मौजूदगी में शनिवार को अचला सप्तमी पर विविध अनुष्ठान किए जाएंगे। सुबह छह बजे बाघंबरी गद्दी मठ में ध्वजा पूजन होगा। इसके बाद सुबह सात से 10 बजे तक रुद्राभिषेक होगा। फिर दोपहर एक बजे तक वैदिक आचार्यों व बटुकों की ओर से मंत्रोच्चार के साथ पूजन होगा।