तमाम सख्ती के दावे के बावजूद लॉक डाउन में कालाबाजारी का खेल खूब फल-फूल रहा है। कई मुनाफाखोर मनमानी पर उतर आए हैं। गली मोहल्लों के कई परचून व्यापारी स्टॉक छिपाकर खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ा रहे हैं। 10 किलो खुले आटे का दाम भी ¹360 तक पहुंच गया है। लोगों को नामी कंपनियों का आटा ढूंढने से भी नहीं मिल पा रहा हैै।
Lockdown: मुनाफाखोरी ने 20 प्रतिशत तक बढ़ाई महंगाई, प्रशासन की सख्ती भी बेअसर
जिला प्रशासन की ओर से सुबह 7:00 बजे से रात 10:00 बजे तक किराने की दुकान को खोलने की छूट देने के निर्णय के बाद, बुधवार के मुकाबले बृहस्पतिवार को दुकानों में भीड़ अपेक्षाकृत कम जुटी। हालांकि शहर के तमाम इलाकों में लोगों की शिकायत यही रही की दुकानदार आवश्यक वस्तुओं का दाम ज्यादा वसूल रहे हैं।
काला डांडा, हिम्मतगंज में रिटायर रेलकर्मी अरुण कुमार चीनी खरीदने को पहुंचे तो उन्हें 1 किलो चीनी के लिए ¹65 रुपये चुकाने पड़े। इसी तरह बाई का बाग निवासी राम जी जैन भी आटा खरीदने गए तो उन्हें राम भवन के पास खुला आटा ¹360 रुपये में 10 किलो उपलब्ध हुआ। लॉक डाउन के पहले यही आटा अधिकतम 290 से 320 रुपये में मिल रहा था।
आजाद नगर के व्यापारी दीपक केसरवानी ने बताया की आटे के थोक विक्रेताओं ने माल देने से मना कर दिया है। वजह पूछी तो बताया कि पीछे से ही सप्लाई बंद हो गई है। हालांकि इलाहाबाद गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश केसरवानी का कहना है कि बाजार में आटा, दाल, चावल अभी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। व्यापारी माल लेने ही नहीं आ रहे हैं।
सरसों का तेल पहुंचा 130, बासमती चावल का भरपूर स्टॉक
कीडगंज थाने वाली सड़क पर रहने वाले अरविंद मिश्रा बृहस्पतिवार को किराने की दुकान पर सरसों का तेल खरीदने पहुंचे तो उसकी कीमत सुनकर वह चौंक गए । उन्हें तेल का दाम ¹120 रुपये प्रति किलो बताया गया। एक दूसरी दुकान पर गए तो वहां दाम ¹130 रुपये बताया गया। अरविंद ने कहा कि होली के पहले ही उन्होंने ¹100 रुपये प्रति किलो में तेल खरीदा था। इस पर दुकानदारों ने कहा, लेना है तो लो, नही तो यह भी नहीं मिलेगा क्योंकि स्टॉक खत्म होने वाला है ।इसी तरह राजरूपपुर के अनिकेत श्रीवास्तव ने बताया घर में चावल खत्म होने की वजह से उसे खरीदने पहुंचे लेकिन दुकानदार उन्हें महंगा बासमती चावल देने पर ही उतारू था। अनिकेत ने कहा उसे महंगा वाला नहीं नॉर्मल चावल ही चाहिए लेकिन दुकानदार ने माल उपलब्ध होने के बावजूद देने से इनकार कर दिया । कहां, अभी से बासमती चावल ही मिलेगा।