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भव्य कुंभ में शाही पेशवाई, मेले में आए हर अखाड़े का खर्च 1 करोड़ के पार, जानिए कैसे होता है पूरा

Wed, 02 Jan 2019 06:13 PM IST
देव कश्यप अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज
अनिल सिद्धार्थ, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Wed, 02 Jan 2019 06:13 PM IST
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Kumbh 2019: Royal Peshwai of akhara expenditure of every akhara out of 10 million, know how it cover
Peshwai Mahanirvani

कुंभ पर्व में सिर्फ सरकार ही नहीं संत भी ‘दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ’ के सूत्रवाक्य को सार्थक करने में जुटे हैं। संगम की रेती पर शिविर बसाने से पहले भूमि पूजन, फिर रेती पर धर्मध्वजा स्थापना, धूमधाम से पेशवाई, भजन, भंडारे. पट्टाभिषेक सहित सभी कार्यक्रमों में होने वाला प्रत्येक अखाड़े का खर्च इस बार करोड़ रुपये के पार जाएगा। प्रथम दृष्टया यह रकम भले ही चौंकाए लेकिन संतों, महामंडलेश्वरों की बढ़ी हुई संख्या, ज्यादा से ज्यादा और आधुनिक सुविधाओं के साथ भंडारा आदि पर करोड़ के पार खर्च होना तय है।

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Peshwai Mahanirvani

शाही पेशवाई में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में भी शाही खर्च जारी है तो संतों, महामंडलेश्वरों, भक्तों, श्रद्धालुओं के खान-पान सहित उनके रुकने की व्यवस्था और अनुष्ठान, समारोह, स्वागत आदि में भी बड़ी रकम खर्च होगी। शाही पेशवाई और शाही स्नान में आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वरों, श्रीमहंतों के सोने-चांदी के सिंहासनों, सजे हुए रथों के अतिरिक्त हाथी, घोड़े, ऊंट सहित कई दर्जन चुनिंदा बैंडबाजों, गाड़ियों के काफिले पर भी खर्च जारी है। तकरीबन माह भर से ज्यादा समय तक रेती पर ठौर के दौरान विविध अनुष्ठानों से इतर कई नए महामंडलेश्वर भी बनेंगे। इसमें संतों, श्रद्धालुओं के स्वागत सहित उनकी दक्षिणा और भंडारे में भी लाखों खर्च होंगे।

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peshwai

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि कहते हैं, अखाड़े के पंचों के नगर प्रवेश से लेकर पेशवाई निकालने, ध्वजदंड समारोह, अनुष्ठान, पट्टाभिषेक, नियमित खान-पान, अतिथियों के स्वागत आदि पर करोड़ तो क्या इससे बहुत ज्यादा खर्च हो सकता है। श्रीशंभूपंच दशनाम आवाहन अखाड़े के सचिव श्रीमहंत सत्यगिरि कहते हैं, जब पेशवाई शाही है तो खर्च भी शाही ही होगा। वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष और निर्मल पंचायती अखाड़ा के सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री कहते हैं, मुख्यालय से लेकर कुंभ मेला क्षेत्र तक हर तरह की व्यवस्था और अस्थायी ठौर बसाने में करोड़ तो क्या सवा से डेढ़ करोड़ तक भी पहुंचे तो आश्चर्य नहीं।

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भंड़ारे के बाद ‘भेंट’ की भी परंपरा
कुंभ पर्व केदौरान प्रत्येक अखाड़े की ओर से नियमित भंडारे से इतर विशेष स्नानपर्वो और महामंडलेश्वर के पट्टाभिषेक के दौरान विशाल भंडारे होते हैं। खास यह कि प्रत्येक भंडारे के बाद न सिर्फ संतों बल्कि भंडारे में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को उसके पद के अनुरूप ‘भेंट’ दी जाती है। ऐसे में खाने के खर्च से इतर दक्षिणा में भी लाखों खर्च होंगे। अखाडे़ की हैसियत के मुताबिक यह राशि कुछ कम या ज्यादा हो सकती है।

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‘पुकार’ से पूरा होगा पर्व का खर्च
कुंभ पर्व के खर्च को अखाड़े के संत, श्रीमहंत और महामंडलेश्वर ही पूरा भी करते हैं। प्रत्येक शाही स्नान के बाद अखाड़े की छावनी में धर्मध्वजा के करीब गुरु, देवता के मंदिर के पास पुकार होती है, ‘दशनाम गुरु सुनना, अमुक महामंडलेश्वर ने गुरु महाराज के चरणों में अमुक रकम से ‘पुकार’ कराई है।’ अखाड़े के देवता को भारी भरकम रकम चढ़ाई जाती है। पुकार की इसी भेंट से अखाड़े का बड़ा खर्च पूरा होता है, तो खुद अखाड़े और संत-श्रद्धालुओं का दान भी मददगार साबित होता है।

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