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महामंडलेश्वरों ने साझा किए विचार, बोले- कुंभ के जरिए विश्व को मानवता के सूत्र में पिरोने का प्रयास

Tue, 01 Jan 2019 11:55 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Jan 2019 11:55 PM IST
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mahanirwani akhara Peshwai Mahamandaleshvar share own thoughts related Kumbh 2019
Peshwai Mahanirvani

श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी की मंगलवार को भव्य पेशवाई निकली। पेशवाई में श्रद्धा, परंपरा और सनातनी वैभव का समावेश साफ दिखा। जिन मार्गों से पेशवाई निकली, वहां के लोगों ने महात्माओं को नमन किया। इस दौरान अमर उजाला के साथ चार महामंडलेश्वरों ने कुंभ को लेकर अपने विचार साझा किए।

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महामंडलेश्वर महेश्वरानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला

महामंडलेश्वर महेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग की तरह कुंभ पर्व की महान परंपरा को भी पूरी दुनिया में फैला दिया है। इस कुंभ में विश्व भर से लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन मुझे डर है कि कहीं चकाचौंध और वैभव के आकर्षण के चलते यह स्नान पर्व पर्यटन और मौज मस्ती के आकर्षण का केंद्र न बन जाए। इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। प्रयाग के कुंभ में आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित किया जाना चाहिए।  

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महामंडलेश्वर देवेंद्रानंद गिरि महाराज - फोटो : अमर उजाला

महामंडलेश्वर देवेंद्रानंद गिरि महाराज ने बताया कि, महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में यादगार संत समागम हुआ है। इस संत समागम में हम कुंभ के दौरान भारतीय धर्म-संस्कृति का प्रचार करेंगे। गृहस्थों को प्रेम-करुणा, दया और मानवता का पाठ पढ़ाएंगे। इस कुंभ के जरिए विश्व भर को मानवता के एक सूत्र में पिरोने का प्रयास होगा। 

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महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद महाराज

महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद महाराज बोले, इस त्रिवेणी की धारा पर पूरी दुनिया इस कुंभ में जुट रही है। ऐसी दिव्यता संसार में कहीं और नहीं देखी जा सकती। लेकिन, अफसोस है कि गंगा की निर्मलता के लिए अभी भी न्यूनतम स्तर पर ही प्रयास हो रहा है। गंगा भारतीय संस्कृति की प्राण धारा है। गंगा को अविरल-निर्मल बनाने के लिए ठोस प्रयास किया जाना चाहिए।  

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महामंडलेश्वर गिरिधर गिरि महाराज

वहीं महामंडलेश्वर गिरिधर गिरि महाराज ने कहा कि, कुंभनगरी संतमय हो गई है। विश्व भर से संत इस स्नान पर्व पर सनातनी संस्कृति पर चिंतन-मनन करने के पहुंच रहे हैं। इसका फायदा विश्व समुदाय को मिलेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार कुंभ की परंपरा समुद्र मंथन से जुड़ी है। इस कुंभ में भी मानवता और कल्याण के लिए चिंतन होगा। 

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