कुंभ क्षेत्र में स्थापित भूले बिसरे शिवरों से अब जो आवाजें आ रही हैं, उसे सुनकर कलेजा दहल रहा है। पिछले करीब पांच दिनों से इन शिविरों में अपने से बिछड़ने वालों में ज्यादातर माताएं ही रह गई हैं, जिनकी उम्र 60 से लेकर 90 वर्ष के बीच है। इनकी आंखें रो-रोकर सूज गई हैं, आंसू सूख चुके हैं और गले में आवाज रुक गई है। यह सभी माताएं अपने बच्चों, परिजनों के साथ कुंभ में डुबकी लगाने शायद यह सोचकर आई थीं कि जीवन की आखिरी बेला में गंगा मइया को प्रणाम कर लें और संतों के चरण रज माथे पर लगाकर जीवन धन्य बना लें।
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इंतजार की हद टूटी तो दहाड़े मार रो पड़ी माताएं, भूले बिसरे शिविरों में 'ममता का रूदन', तस्वीरें
Thu, 07 Feb 2019 11:43 AM IST
vivek shukla
पंकज प्रसून, अमर उजाला, प्रयागराज
पंकज प्रसून, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 07 Feb 2019 11:43 AM IST
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Kumbh 2019
Kumbh 2019
इन माताओं के चेहरें पर सूख चुके आंंसू की परतों को देखकर हर कोई गमगीन हो रहा है। इनके पास कोई पहुंचता है तो इन्हें लगता है कि वह उन्हें उनके परिजनों के पास ले जाने आया है। इन माओं के इंतजार की उम्मीद भी टूटने लगी है। यह सभी भूले विसरे शिविरों में अपने लोगों की राह देखते-देखते चेतना शून्य हो गई हैं। बहुत कोशिश करने के बाद कुछ-बताते हुए रोने की कोशिश भी करती हैं, तो इनके आंसू निकल ही नहीं पाते हैं।
Kumbh 2019
इनकी हालत देखकर मन में यही भाव अचानक से आता है कि कुंभ में डुबकी लगाने का प्रतिफल क्या यही हैं जो इन माताओं पर बीत रही है। ज्यादातर माताएं यह कहती रहीं कि उनके बेटों की गृहस्थी अभी कच्ची है, वे सबको बिना उनके संभाल नहीं पाएंगे। इसलिए उनका घर जाना जरूरी है, लेकिन कैसे कहकर वह फिर से रोने लगती।
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कुछ ऐसी भी थी जो परिवार का नाम लेने पर चुप होकर आंसू बहाने लगतीं। इनमें से किसी भी महिला को अपने परिजनों का मोबाइल नंबर पता नहीं है। मजे की बात यह भी है कि किसी परिजन ने कुंभ में आने से पहले यह सोचा ही नहीं कि मां यदि बिछड़ गई तो कम से कम घर का फोन नंबर लिखकर उसके आंचल में बांध देते।
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केस स्टडी
-मधुबनी बिहार की इंदिरा झा की उम्र 90 वर्ष के करीब है। बताती है कि उनका बेटा बेचन झा और पति वैद्यनाथ झा सहित भरा पूरा परिवार है। पिछले पांच दिनों से सिर्फ वहीं अकेली पड़ गई है। यह कहकर वह रोने लगती है कि परिवार के लोग अब उन्हें मिलेंगे भी या नहीं।
-वृंदावन सुराज कालोनी की बिन्नू ने बताया कि वह अपने घर के कई लोगों के साथ यहां आई थीं। वह भीड़ में अपने साथ ही एक महिला का आंचल पकड़े-पकड़े चल रहीं थी, हाथ छूट गया, लोग आगे बढ़ गए। बच्चों के बारे में पूछा तो आंसू टपकने लगे।
-शक्तिनगर की छोटकी की १२ साल की बेटी कुंभ क्षेत्र में कहां गुम हो गई, उन्हें पता ही नहीं चला। भूले बिसरे शिविर में पिछले कई दिनों से वह अपनी बेटी के मिलने का इंतजार कर रही हैं। हर आने वालों से कहती हैं, मेरी बेटी को खोज दो।
ये महिलाएं भी अपनों से खो चुकी हैं
छिबरामऊ गुरसहायगंज की शिवकुमारी, जसोदा देवी दरभंगा बिहार, श्यामा देवी सुल्तानपुर बाईपास करमचंदपुर के अलावा ऐसी बहुत सी माताएं अपनों का इंतजार कर रही हैं।
-मधुबनी बिहार की इंदिरा झा की उम्र 90 वर्ष के करीब है। बताती है कि उनका बेटा बेचन झा और पति वैद्यनाथ झा सहित भरा पूरा परिवार है। पिछले पांच दिनों से सिर्फ वहीं अकेली पड़ गई है। यह कहकर वह रोने लगती है कि परिवार के लोग अब उन्हें मिलेंगे भी या नहीं।
-वृंदावन सुराज कालोनी की बिन्नू ने बताया कि वह अपने घर के कई लोगों के साथ यहां आई थीं। वह भीड़ में अपने साथ ही एक महिला का आंचल पकड़े-पकड़े चल रहीं थी, हाथ छूट गया, लोग आगे बढ़ गए। बच्चों के बारे में पूछा तो आंसू टपकने लगे।
-शक्तिनगर की छोटकी की १२ साल की बेटी कुंभ क्षेत्र में कहां गुम हो गई, उन्हें पता ही नहीं चला। भूले बिसरे शिविर में पिछले कई दिनों से वह अपनी बेटी के मिलने का इंतजार कर रही हैं। हर आने वालों से कहती हैं, मेरी बेटी को खोज दो।
ये महिलाएं भी अपनों से खो चुकी हैं
छिबरामऊ गुरसहायगंज की शिवकुमारी, जसोदा देवी दरभंगा बिहार, श्यामा देवी सुल्तानपुर बाईपास करमचंदपुर के अलावा ऐसी बहुत सी माताएं अपनों का इंतजार कर रही हैं।