सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहते हैं, मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होने लगते हैं और देवताओं का दिन प्रारम्भ होता है इसलिए मकर संक्रांति का महत्व सर्वाधिक माना गया है। संक्रांति काल में जो भी वस्तु दान की जाती है या कृत्य-कृत्यादि जो भी दिया जाता है, सूर्य नारायण उसे जन्म जन्मान्तर प्रदान करते रहते हैं। ज्योतिषाचर्य गुंजन वार्ष्णेय के अनुसार कुम्भ पर्व पर मकर संक्रांति के दिन स्नान, पुण्य, दान, जप, धार्मिक अनुष्ठानों का बहुत महत्व है। मकर संक्रांति के दिन दिया हुआ दान ‘पुनर्जन्म’ होने पर सौ गुणा होकर प्राप्त होता है। संगम के पावन तट पर इस दिन हजारों श्रद्धालुओं को स्नान, दानादि द्वारा पुण्यार्जन करते देखा जा सकता है। मकर संक्रांति पर्व के महत्व के संबंध में संत तुलसीदास जी कहते हैं, माघ मकर रवि गति होई। तीरथपतिहिं आवै सब कोई।ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य का धनु से मकर राशि में प्रवेश बारह राशियों को इस प्रकार फल प्रदान करेगा... आगे की स्लाइड में पढ़ें...
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मकरस्थ सूर्य की किरणों के साथ हुआ कुम्भ का शुभारंभ, पढ़ें, दान और स्नान का क्या है माहात्म्य
Mon, 14 Jan 2019 09:54 PM IST
देव कश्यप
ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय, प्रयागराज
ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 14 Jan 2019 09:54 PM IST
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Makar sankranti
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राशि
मेष राशि- गोचर से दशम भाव में सूर्य के जाने पर धन, स्वास्थ्य, मित्र आदि का सुख प्राप्त होता है। राज्य अधकारियों और प्रतिष्ठित लोगों से मित्रता बढ़ती है। सज्जनों द्वारा लाभ होता है, प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है। पदोन्नति का सुअवसर प्राप्त होता है, मान, गौरव तथा प्रताप बढ़ता है।
राशि
वृष राशि- गोचर से नवम स्थान में सूर्य के जाने पर कांति का क्षय, झूठा आरोप, बिना कारण धन और पुण्य की हानि, आय की कमी, रोग एवं अशांति उत्पन्न होती है। बड़ों से तथा मित्रों तथा भाइयों से विरोध रहता है। अपमान का भय रहता है, हर उद्योग में असफलता मिलने के कारण व्यक्ति दीन बन जाता है।
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मिथुन
मिथुन राशि - गोचर से अष्टम स्थान में सूर्य के जाने पर जातक को शत्रुओं से भय, अकारण वाद-विवाद होता है, अधिक खर्च होता है, अपमान का विशेष भय रहता है।
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राशि
कर्क राशि - गोचर से सातवें स्थान में सूर्य के जाने से दाम्पत्य जीवन में वैमनस्य की उत्पत्ति होती है, स्त्री और पुत्र बीमार रहते हैं। कार्यों में असफलताएं प्राप्त होती हैं। व्यवसाय में बाधाऐं उत्पन्न होती हैं, कष्टकारी यात्राएं करती पड़ती हैं। उदर पीड़ा, सिर पीड़ा आदि रोग होते हैं। धन और मानहानि के कारण व्यक्ति के मन को क्लेश रहता है।