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रोजी की तलाश में आए सैकड़ों मजदूर शहर में फंसे 

Sun, 29 Mar 2020 01:14 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 29 Mar 2020 01:14 AM IST
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Hundreds of laborers trapped in the city in search of livelihood
prayagraj news - फोटो : prayagraj

रोजी की तलाश में सैकड़ों किमी का सफर कर आए मजदूर अब शहर में फंस गए हैं। लॉकडाउन के बीच घर वापसी के लि जो मजदूर यहां से निकलना चाह रहे हैं, पुलिस उन्हें वापस भेज रही है। सबसे अधिक खराब हालत मुंडेरा मंडी की है, जहां बिहार व झारखंड के 200 से अधिक मजदूर फंस गए हैं। इसके अलावा मोरारी बापू की कथा के लिए पंडाल बनाने वाले मेरठ के कारीगर भी अपनी तकदीर को कोस रहे हैं। वे राहगीरों से मुसीबत से उबारने की गुहार लगा रहे हैं।

Hundreds of laborers trapped in the city in search of livelihood
prayagraj news - फोटो : prayagraj

नवीन मंडी मुंडेरा में बिहार झारखंड के 200 से ज्यादा मजदूर लॉकडाउन की वजह से फंस गए हैं। उनका कहना है कि काम बंद होने से वह भोजन पानी के लिए तरस रहे हैं। कुछ ने वहां निकलने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें वापस मंडी परिसर में ही भेज दिया। इन मजदूरों का कहना है उनके पास न तो खाना है न ही पैसे हैं। अब करें भी तो क्या करें। इन मजदूरों ने सरकार से भोजन देने या वापस उन्हें घर भेजने की मांग की है।

Hundreds of laborers trapped in the city in search of livelihood
prayagraj news - फोटो : prayagraj

सहरसा बिहार के पंकज कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार हमें अपने घर जाने के लिए साधन उपलब्ध कराए। राशन महंगा होने की वजह से उसे खरीदने की भी हिम्मत नहीं हो रही। इसी तरह बिहार के मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुजीब ने कहा कि यहां पर हम लोगों के लिए जिला प्रशासन भोजन आदि की व्यवस्था करे, तभी यहां रुकना संभव है अन्यथा सरकार हमें बस द्वारा बिहार भिजवाने की व्यवस्था करे।

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Hundreds of laborers trapped in the city in search of livelihood
prayagraj news - फोटो : prayagraj

जानी मानी टेंट सेवा प्रदाता कंपनी लल्लू जी एंड संस के के साथ मिलकर संत मोरारी बापू की कथा के लिए जर्मन स्टाइल वाले भव्य पंडाल का निर्माण करने वाले मेरठ के कारीगर लॉक डाउन में फंसकर मुसीबत के मारे फिर रहे हैं।

जीरो रोड बस स्टेशन पर मिले ये कारीगर परिवहन निगम कर्मियों से लेकर राह चलते लोगों से इस मुसीबत से उबारने का अनुरोध करते रहे। मेरठ के तारापुरी निवासी नौशाद पुत्र शेर अली ने बताया कि कथा पूरी होने के बाद टेंट व कॉटेज के अलावा अन्य इंतजामों को उखाड़ने और समेटने का भी जिम्मा उन्हीं लोगों पर था। वह टेंट समेट कर जाने वाले ही थे कि तबतक प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने से रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया। तब से वह परेशान हैं। 

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Hundreds of laborers trapped in the city in search of livelihood
prayagraj news - फोटो : prayagraj
नौशाद के अन्य सहयोगियों में सलमान, तालिब, संजीप, राजू, बिलाल, नाजिम और मोहम्मद सलमान ने बताया कि न जेब में रकम बची है न खानेपीने का सामान ही मिल रहा है। शनिवार की सुबह एक वाहन पर कुछ खाने के पैकेट बांटे जा रहे थे। लाइन में लगकर पूड़ी-सब्जी के पैकेट लिए, तब जाकर दो दिन बाद थोड़ी राहत मिली। इन कारीगरों का कहना है कि प्रशासन को मुसीबत की घड़ी में फंसे लोगों को घर भेजने की व्यवस्था करनी चाहिए। इनका कहना था कि अगर कोई वाहन नहीं मिला तो जान बचाने के लिए वह छह सौ किमी का सफर पैदल ही तय करने के लिए मजबूर होंगे।
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