रोजी की तलाश में सैकड़ों किमी का सफर कर आए मजदूर अब शहर में फंस गए हैं। लॉकडाउन के बीच घर वापसी के लि जो मजदूर यहां से निकलना चाह रहे हैं, पुलिस उन्हें वापस भेज रही है। सबसे अधिक खराब हालत मुंडेरा मंडी की है, जहां बिहार व झारखंड के 200 से अधिक मजदूर फंस गए हैं। इसके अलावा मोरारी बापू की कथा के लिए पंडाल बनाने वाले मेरठ के कारीगर भी अपनी तकदीर को कोस रहे हैं। वे राहगीरों से मुसीबत से उबारने की गुहार लगा रहे हैं।
रोजी की तलाश में आए सैकड़ों मजदूर शहर में फंसे
नवीन मंडी मुंडेरा में बिहार झारखंड के 200 से ज्यादा मजदूर लॉकडाउन की वजह से फंस गए हैं। उनका कहना है कि काम बंद होने से वह भोजन पानी के लिए तरस रहे हैं। कुछ ने वहां निकलने का प्रयास भी किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें वापस मंडी परिसर में ही भेज दिया। इन मजदूरों का कहना है उनके पास न तो खाना है न ही पैसे हैं। अब करें भी तो क्या करें। इन मजदूरों ने सरकार से भोजन देने या वापस उन्हें घर भेजने की मांग की है।
सहरसा बिहार के पंकज कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार हमें अपने घर जाने के लिए साधन उपलब्ध कराए। राशन महंगा होने की वजह से उसे खरीदने की भी हिम्मत नहीं हो रही। इसी तरह बिहार के मोहम्मद आजम और मोहम्मद मुजीब ने कहा कि यहां पर हम लोगों के लिए जिला प्रशासन भोजन आदि की व्यवस्था करे, तभी यहां रुकना संभव है अन्यथा सरकार हमें बस द्वारा बिहार भिजवाने की व्यवस्था करे।
जानी मानी टेंट सेवा प्रदाता कंपनी लल्लू जी एंड संस के के साथ मिलकर संत मोरारी बापू की कथा के लिए जर्मन स्टाइल वाले भव्य पंडाल का निर्माण करने वाले मेरठ के कारीगर लॉक डाउन में फंसकर मुसीबत के मारे फिर रहे हैं।
जीरो रोड बस स्टेशन पर मिले ये कारीगर परिवहन निगम कर्मियों से लेकर राह चलते लोगों से इस मुसीबत से उबारने का अनुरोध करते रहे। मेरठ के तारापुरी निवासी नौशाद पुत्र शेर अली ने बताया कि कथा पूरी होने के बाद टेंट व कॉटेज के अलावा अन्य इंतजामों को उखाड़ने और समेटने का भी जिम्मा उन्हीं लोगों पर था। वह टेंट समेट कर जाने वाले ही थे कि तबतक प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने से रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया। तब से वह परेशान हैं।