गंगा और यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी ग्रामीण क्षेत्रों पर भारी पड़ने लगी है। कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं तो सैकड़ों एकड़ फसल भी जलमग्न हो गई है। झूंसी के एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूट गया है। लोगों के पास सरकारी नाव का ही सहारा है। दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन शहर में कछारी इलाके की बस्तियाें के करीब बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
Prayagraj :खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा-यमुना, एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क टूटा
एडीएम वित्त एवं राजस्व जगदंबा सिंह का कहना है कि शहरी क्षेत्र में अभी बस्तियों में बाढ़ का पानी नहीं घुसा है। आगे भी जलस्तर में बहुत बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, लेकिन सभी संबंधित लोगों को अलर्ट पर रखा गया है। बघाड़ा, सलोरी, बेली, राजापुर आदि क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
आश्रय स्थल में पहुंचना हुआ शुरू
जलस्तर में बढ़ोतरी की वजह से निचले इलाके में बसे लोगों के घर तक पानी पहुंचने लगा है। घर में पानी आ जाने की वजह से छोटा बघाड़ा के पान पति, एक प्रतियोगी छात्र ने शनिवार शाम को एनी बेसेंट स्कूल में बने आश्रय स्थल में शरण ली।
सड़क और घर की चौखट पर पानी, पहले तल पर बनाया ठौर
गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण झूंसी के कछारी गांव के लोगों का संकट बढ़ने लगा है। पिछले दो दिनों से ग्रामीणों की जिंदगी सड़क से उठकर छह नावों पर आ गई है। इन्हीं नावों पर बाढ़ प्रभावित ग्रामीण साइकिल, मोटरसाइकिल और दूधिए बाल्टा लादकर घर से झूंसी तक का सफर तय कर रहे हैं। गंगा-यमुना के जलस्तर में शनिवार को भी बढ़ोतरी जारी रही। रातभर में बदरा-सोनौटी मार्ग पर पानी डेढ़ से दो फीट तक बढ़ गया था। इसकी वजह से बदरा, सोनौटी, ढोलबजवा, बहादुरपुर, गंजिया, हेतापट्टी, इब्राहिमपुर, खजुरी, फतेहपुर, एकलासपुर, मदारपुर, पैगंबरपुर, फैज्जुलापुर, सकरा, इब्राहिमपुर समेत तकरीबन डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
ग्रामीणों की सैकड़ों बीघे धान की फसल भी चौपट हो गई है। पानी घुसने से नई तथा पुरानी झूंसी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग मकान की ऊपरी मंजिल में ठौर बनाए हुए हैं। गंगा तट के मंदिर व आश्रमों में भी बाढ़ का पानी दाखिल हो गया है। ग्रामीणों की मदद के लिए दो बड़ी तथा चार छोटी नावों की व्यवस्था कराई गई है।
स्कूल जाना हुआ बंद
बाढ़ के चलते सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढऩे के लिए बच्चे नहीं जा पा रहे हैं। हालांकि शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही तो स्कूल पर ताला लटक सकता है।
केरोसिन की मांग
बाढ़ प्रभावित बदरा-सोनौटी गांव में शुक्रवार की शाम से बिजली आपूर्ति काट दी गई है। इसके चलते शाम होते ही गांव में अंधेरा पसर जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित घरों में केरोसिन का वितरण कराए जाने की मांग की थी लेकिन शनिवार की शाम तक ऐसा हो नहीं सका था। ऐसे में रात के अंधेरे में जहरीले जतुंओं खतरा भी ग्रामीणों को सताने लगा है।
श्रृंग्वेरपुर में बढ़ा खतरा, तीर्थपुरोहितों ने हटाईं चौकियां
श्रृंगवेरपुरधाम के श्रीराम घाट, भैरव घाट, सीताकुंड, गऊघाट एवं पटना क्षेत्र में भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जलस्तर बढ़ने की वजह से तीर्थ पुरोहितों ने चौकियों को हटाना शुरू कर दिया है। ग्रामीणों में श्रृंग्वेरपुर धाम में अव्यवस्था की शिकायत भी की लेकिन कुछ नहीं हुआ।