माथे पर अखंड सौभाग्य के रूप में सजा सिंदूर का टीका और आंचल फैलाकर उगते सूर्य की प्रतीक्षा करती व्रती महिलाओं का सैलाब बृहस्पतिवार को सर्व मंगल की कामना के लिए गंगा-यमुना के तटों पर उमड़ा तो कुछ देर के लिए भक्ति का सागर हिलोरें मारने लगा। अरुणोदय की लाली प्रस्फुटित होते ही संगम पर ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ आतिशबाजी होने लगी और उगते सूर्य को अपनी-अपनी कामनाओं के अर्घ्य समर्पित किए जाने लगे। षष्ठी मइया की आराधना की गीतों के साथ लोक उत्सव की वह छटा निहारने के लिए घर-घर से लोग निकल पड़े थे। उदित होते सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय डाला षष्ठी के व्रत का पारण हो गया।
Chhath Puja 2021 : अरुणोदय की लाली से धरा पर उतरा सौभाग्य, उगते सूर्य को अर्घ्यदान के लिए संगम तट पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब (तस्वीरें)
अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 11 Nov 2021 09:18 PM IST
सार
संगम तट सहित बलुआ घाट, द्रौपदी घाट, दारागंज, अरैल घाट, झूंसी, छतनाग घाट आदि स्थानों पर गंगा जल के बीच भगवान भाष्कर का भोर से पौ फटने तक व्रती महिलाओं ने लंबा इंतजार किया। आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के साथ व्रतियों ने की छठ पूजा की पूर्णाहुति।
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