कोरोना वायरस के डर बृहस्पतिवार को संगम से शहर तक सन्नाटा पसर गया। चाय-पान की दुकानों से लेकर सरकारी भवनों निदेशालयों के बाहर दिन भर खड़ी रहने वाली भीड़ छंट गई। खौफ का असर मंदिरों और तीर्र्थों पर भी पड़ा। संगम पर कर्मकांड और स्नान-दान के लिए भी लोग नहीं पहुंच रहे हैं। इससे तीर्थपुरोहितों की चौकियां सूनी हो गईं। नौकायन के लिए मल्लाह दिन भर सवारियों की राह देखते रह गए।
कोरोना का खौफः संगम से शहर की सड़कों तक पसरी सन्नाटे की चादर
हर तरफ दहशत और चिंता का माहौल बन गया है। डर इस तरह पैदा हुआ है कि घरों से निकलने और सार्वजनिक स्थानों पर घूमने से भी लोग परहेज करने लगे हैं। सघन बाजार वाले इलाकों में हमेशा भीड़ से पैक रहने वाली सड़कें खाली नजर आने लगीं, तो पार्कों में भी आवाजाही कम हो गई। यानी, हर तरफ कोरोना वायरस से बचने के लिए एहतियात बरतने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। शनिवार की शाम इसका असर चौक, कटरा समेत कई इलाकों में साफ दिखा।
बृहस्पतिवार को कोरोना वायरस का खौफ हर तरफ समा गया। चाहे पुराने शहर की सड़कें हों या सिविल लाइंस एरिया, हर तरफ सुबह से शाम तक सन्नाटा छाया रहा। एजी ऑफिस, शिक्षा निदेशालय समेत अन्य दफ्तरों के बाहर पहले जहां दिन भर फरियादियों, कर्मचारियों और नेताओं का जमावड़ा लगा रहता था, वहीं इस रोज वहां की चाय-पान की दुकानों की कुर्सियां खाली रहीं। इसी तरह निरंजन सिनेमा से लेकर जानसेनगंज, घंटाघर तक वाली रोड पर भी बंदी जैसा ही माहौल रहा।
सड़कें पूरी तरह खाली रहीं। चौक, लोकनाथ, जवाहर स्क्वायर मार्केट में भी सड़कें खाली रहीं। दुकानों पर इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे थे। लोकनाथ चौराहा के व्यवसायी राजेश सिंह के अनुसार कोरोना वायरस केडर से सड़कों पर कर्फ्यू जैसा वातावरण है।
लोग घरों से निकल ही नहीं रहे हैं। इस वजह से बाजार पूरी तरह ठंडा पड़ गया है। इसी तरह जीरो रोड केपवन जैन बताते हैं कि घरों से न निकलने, भीड़ से बचने संबंधी संदेश लगातार सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से प्रसारित होने की वजह से लोगों में डर बढ़ता जा रहा है।
उधर, तीर्थपुरोहित पं रामजी तिवारी ने बताया कि तीर्थयात्रियों की आवाजाही ठप सी पड़ गई है। इस वजह से चौकियां दिन भर खाली रह रही हैं। इसी तरह नविक ओम प्रकाश ने बताया कि दिन भर सवारियों की राह देखी जा रही है। रोज जहां एक हजार से अधिक कमाई हो जाती थी, वहीं इस दिन दो सवारियों को लेकर एक फेरा ही संगम पर लग सका। इससे सिर्फ 80 रुपये में संतोष करना पड़ा।