भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को मौन रहते हुए संतों के बीच कुछ घंटे रहकर संत ध्रुवीकरण का संकेत दे गए। अब कुंभ के शाही स्नान के बाद अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों और अन्य अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वरों ने शाह और योगी के साथ जिस तरह संगम में डुबकी लगाई, उसके सियासी हलकों में भले ही मायने खोजे जा रहे हैं लेकिन संगम में संतों संग नेताओं का डुबकी लगाना धर्म और सत्ता के गठजोड़ से इतर नहीं रहा। हर स्थान पर संत देवतुल्य, अतिथि देवो भव: का सूत्र वाक्य फलित दिखा।
Kumbh 2019: संगम की डुबकी में धर्म-सत्ता का गठजोड़, संतों के साथ स्नान के निकाले जा रहे सियासी मायने
मुनेंद्र बाजपेयी, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: shubham
Updated Thu, 14 Feb 2019 12:29 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन