मथु्रा में गुरुवार को यमुना छठ का पर्व धूमधाम से मनाया गया। ब्रजवासियों ने अपने आराध्य श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना का विधि विधान से पूजन किया। यमुना घाटों पर सैकड़ों दीपों से महाआरती हुई। यमुना माता का दुग्धाभिषेक किया। नगर में शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद यमुना मैया को चुनरी ओढ़ाई गई। इस दौरान घाटों पर अद्भुत दृश्य था। यमुना मैया के जयकारों से घाट गुंजायमान हो रहे थे।
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यमुना घाट
- फोटो : अमर उजाला
ब्रज में यमुना सिर्फ एक नदी नहीं आस्था का सागर है। कालिंदी के घाट पर कन्हैया की क्रीड़ाओं के निशान, भावभरी गोपियों की गाथाएं और बरसाने वाली के संग नंदलाल की लीलाएं बसती हैं। कृष्णप्रिया कालिंदी के जन्मोत्सव को सभी यमुना छठ के रूप में मनाते हैं। यही श्रद्धा भाव गुरुवार को देखने को मिला।
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यमुना मैया का दुग्धाभिषेक करते श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद के सदस्य
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यमुना छठ पर तड़के ही घाटों पर श्रद्धा उमड़नी शुरू हो गई। सुबह तकरीबन नौ बजे श्रीमाथुर चतुर्वेद परिषद के तत्वावधान में विश्राम घाट पर यमुना मैया का दुग्धाभिषेक किया गया। इस दौरान यमुना मैया के जयकारे के साथ सभी घाट मंत्रोच्चार से गूंज उठे। इस अवसर पर लोगों ने यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का संकल्प लिया।
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यमुना छठ पर निकाली गई कलश यात्रा
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यमुना छठ के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा विश्राम घाट, सती बुर्ज, प्रयाग घाट, बंगाली घाट, आर्य समाज रोड, होली गेट, छत्ता बाजार से विश्राम घाट स्थित विट्ठल द्वार पहुंची। यहां यमुना जी का फूल बंगला सजाया गया। इसके बाद छप्पन भोग लगाया गया।
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शोभायात्रा में कलश लेकर चलतीं महिलाएं
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यमुना मैया की शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं। यात्रा का समापन विश्राम घाट पर यमुना-पूजन के साथ हुआ। वहीं यमुना महारानी के डोले के दर्शन की होड़ मची थी।