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Women's Day: बाधाओं को हराकर 'अपराजिता' बनीं ये बेटियां, दुनिया में चमक रहीं 'सितारा' बनकर

Fri, 08 Mar 2019 07:43 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 08 Mar 2019 07:43 AM IST
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Women's Day 2019 successes story of girls who became aparajita
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स
ताजनगरी की बेटियों ने खेल के मैदान में कामयाबी के परचम फहराए हैं। क्रिकेट हो या पावर लिफ्टिंग, शतरंज हो या निशानेबाजी, हर खेल में इन खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इनके खेल कौशल से ताजनगरी का नाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका है। इन्होंने न केवल तमाम कीर्तिमान बनाए हैं, बल्कि पदक जीतकर देश का नाम भी रोशन किया है। पढ़िए बाधाओं को पाकर अपराजिता बनीं इन बेटियों की सफलता की कहानी...
Women's Day 2019 successes story of girls who became aparajita
शतरंज की खिलाड़ी संस्कृति गोयल - फोटो : अमर उजाला
शतरंज की बिसात में संस्कृति का जादू 
सेंट एंड्रूज स्कूल की छात्रा संस्कृति गोयल ने यूनान में आयोजित हुई विश्व यूथ शतरंज चैंपियनशिप में अंडर-16 में कांस्य पदक पर कब्जा किया। इस चैंपियनशिप में संस्कृति अंतरराष्ट्रीय स्तर की सबसे मजबूत खिलाड़ी को हराकर कांस्य पदक विजेता बनीं। अंडर-16 आयु वर्ग में शतरंज की सर्वश्रेष्ठ महिला खिलाड़ी रह चुकी हैं। वर्ष 2017 में संस्कृति ने नेशनल चैंपियनशिप में अंडर-15 में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। वर्ष 2018 में थाईलैंड में हुई एशियन यूथ चेस चैंपियनशिप में अंडर-16 में उन्होंने सिल्वर मेडल पर कब्जा किया। दिल्ली में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ चेस चैंपियनशिप में संस्कृति चौथे स्थान पर रहीं। अहमदाबाद में वर्ष 2017 में हुई अंडर-15 नेशनल गर्ल्स चेस चैंपियनशिप में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
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फेन्सिंग की कोच भाग्यश्री सिंह
भाग्य श्री ने तलवार से बनाया भाग्य
एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में फेन्सिंग की कोच भाग्यश्री सिंह ने विदेशी धरती पर तलवारबाजी में तीन बार इंडिया टीम का कोच बनकर महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल पेश की है। इस समय भाग्यश्री सिंह जॉर्डन में चल रही एशियाई जूनियर फेंसिंग चैंपियनशिप में भारतीय टीम की कोच के रूप में प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इससे पहले भी उन्हें दो बार यह गौरव मिल चुका है। 

पहली बार फिलीपींस में और दूसरी बार फिनलैंड में वह भारतीय फेंसिंग टीम की कोच बनकर गई थीं। उन्होंने तलवारबाजी में कई मेडल्स भी जीते हैं। भारत में कम खेले जाने वाले खेल तलवारबाजी को वह देश में एक अलग पहचान दे रही हैं। कुश फेन्सिंग कोच के रूप में उनका नाम प्रख्यात होता जा रहा है। उनके द्वारा प्रशिक्षित किए गए फेन्सिंग खिलाड़ी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में 45 पदक जीत चुके हैं। भाग्यश्री सन 2015 से स्टेडियम में फेन्सिंग कोच की भूमिका निभा रही हैं। साथ ही उनके द्वारा प्रशिक्षित फेन्सिंग के पंद्रह खिलाड़ी सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर चुके हैं।
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Women's Day 2019 successes story of girls who became aparajita
शूटर सोनिया शर्मा
दिव्यांगता को हरा सोनिया ने छू लिया आसमां 
ताजनगरी की बेहतरीन शूटर सोनिया शर्मा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाजी में शहर का नाम रोशन कर रही हैं। एक हाथ से दिव्यांग होने के बाद भी उनकी निशानेबाजी इतनी सटीक रहती है कि अच्छे-अच्छे निशानेबाज उनके कायल हो चुके हैं। शूटर सोनिया शर्मा ने सन 2017 में दुबई में हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल में पांचवां स्थान प्राप्त किया। 

सन 2017 में ही उन्होंने बैंकॉक में आयोजित हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। सन 2018 में दुबई में हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में दस मीटर एयर पिस्टल में आठवीं रैंक रही। फ्रांस में हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में 10 मीटर एयर पिस्टल में 11वां स्थान प्राप्त किया। साउथ कोरिया में सन 2018 में हुई पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने प्रतिभाग किया। पूना में सन 2017 में हुई नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल विजेता रहीं।
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इंडियन कॉर्फबाल टीम की कप्तान रह चुकीं हैं रीना सिंह
तीन वर्ल्ड कप खेलने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनीं रीना
तानजगरी की होनहार बेटी रीना सिंह इंडियन कॉर्फबाल टीम की कप्तान रह चुकी हैं। रीना ने वर्ष 1993 में अपने खेल सफर की शुरुआत की। उस समय क्रिकेट और हॉकी को छोड़कर किसी अन्य खेल में महिलाओं का प्रतिभाग ज्यादा नहीं था। रीना ने सन 1998 में उत्तर प्रदेश की ओर से खेलते हुए टीम को कई मेडल्स दिलाने में अहम भूमिका निभाई।  सन 2002 में एशियन-ओशियाना चैंपियनशिप में टीम को कांस्य पदक दिलाया। 

नीदरलैंड में सन 2003 में हुई वर्ल्ड कप कॉर्फबाल चैंपियनशिप में उप कप्तान बनाया गया। बेल्जियम में हुई एशिया-यूरो चैंपियनशिप में भारतीय टीम के लिए कांस्य पदक जीता। भारतीय कॉर्फबाल टीम का उन्हें सन 2006 में कप्तान बनाया गया। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम को रीना ने हांगकांग में आयोजित हुई एशिया-ओशियाना चैंपियनशिप में कांस्य पदक दिलाया। चेक गणराज्य में हुए वर्ल्ड कप कॉर्फबाल चैंपियनशिप में भी रीना देश की पहली तीसरा वर्ल्ड कप खेलने वाली खिलाड़ी बनीं।
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