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अमर उजाला पड़ताल: सरकारी मेडिकल कॉलेज के एक कमरे में कैद 2000 मौतों का 'राज'

Fri, 29 Nov 2019 09:39 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 29 Nov 2019 09:39 AM IST
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viscera kept in a shabby room of sn medical college agra
पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
टूटे जंगले वाला जर्जर कमरा...मकड़ी के घने जाले...और कूड़े-कबाड़ के बीच धूल से अटे जारों में रखे दो हजार मौतों के राज। इन जारों में रखे किसी विसरा में आत्महत्या की कहानी है तो किसी में जहर देकर जान लेने की। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखे ये जार खुलें, तो इनमें कैद मौत के रहस्य से पर्दा उठे लेकिन छह महीने से तो यह कमरा ही नहीं खुला है। जारों से नंबर मिट चुके हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट गुम हो चुकी है।
viscera kept in a shabby room of sn medical college agra
पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला टीम ने बुधवार दोपहर को पड़ताल की तो पता चला कि ये विसरा वर्ष 1990 से 2004 के हैं। मार्च में कमरा खुला था, तब बड़ी मुश्किल से एक विसरा निकालकर परीक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। यहां तैनात कर्मचारी बताते हैं कि किसी ने कोर्ट में पैरवी की थी। तब कोर्ट के आदेश पर विसरा की जांच हुई थी।

नंबर मिट गए, अब पहचान भी मुश्किल

2004 में इन विसरा को पुरानी बिल्डिंग में रखकर स्वास्थ्य विभाग भूल गया। एक कर्मचारी कमरे की देखरेख के लिए रखा गया है। इसके बावजूद जंगला टूट चुका है। एक साल से सफाई नहीं हुई है। धूल और मिट्टी जारों के ऊपर जमा हो गई है। जार से नंबर मिट गए हैं। यही पता नहीं चल पा रहा कि कौन से जार में किसका विसरा है?
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यूपी पुलिस
पुलिस ने नहीं भेजे परीक्षण के लिए

ये विसरा ऐसे लोगों के हैं जिनके शव के पोस्टमार्टम में मौत की वजह साफ नहीं हुई। अगर कोई जहरीली शराब पीकर मर जाए, या उसे जहर दिया गया तो विसरा संरक्षित रखा जाता है। पुलिस की जिम्मेदारी इसे विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की है लेकिन पोस्टमार्टम हाउस के सूत्रों ने बताया कि 80 फीसदी मामलों में एफआईआर ही दर्ज नहीं है। पुलिस ने सिर्फ तस्करा डालकर पोस्टमार्टम करा दिया।
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पुराने पोस्टमार्टम हाउस में रखा विसरा - फोटो : अमर उजाला
एक दूसरे पर टालने से बिगड़ी स्थिति

पांच साल पहले तक शासन ने विसरा के मामलों में सख्ती नहीं की थी। इस कारण स्वास्थ्य विभाग और पुलिस एक दूसरे पर टालते रहे। स्वास्थ्य विभाग कहता कि पोस्टमार्टम हाउस से थाना पुलिस विसरा लेकर जाएगी और लैब भेजेगी। थाना पुलिस कहती है कि स्वास्थ्य विभाग थाने भिजवाएगा।
 
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आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला - फोटो : अमर उजाला
जहरीली शराब से हुई होगी मौत, तो अब राज नहीं खुलेगा
विसरा के इतने लंबे समय पड़े रहने से कई राज की तो मौत हो गई। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डॉ. एके मित्तल का कहना है कि अगर मौत जहर से हुई है तो विसरा चाहे कितना पुराना हो, परीक्षण से पता चल सकता है। अगर मौत शराब से हुई है तो पता नहीं चल पाएगा। विसरा में अल्कोहल की मात्रा कुछ दिन तक ही रहती है।
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