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विजय दिवस: शहीदों के ख्वाबों को हकीकत में बदला, वीरनारियों ने शहादत की बगिया में खिलाए 'देशभक्ति के फूल'
Tue, 15 Dec 2020 11:07 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 15 Dec 2020 11:07 AM IST
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1971 के युद्ध में शहीद हुए जवानों की पत्नियां
- फोटो : अमर उजाला
1971 की जंग में बाह के पुरा चौधरी के ऊधम सिंह और फतेहपुरा के राजबहादुर सिंह ने पाकिस्तानी सेना को खदेड़कर उनकी चौकियों पर तिरंगा फहराया था। अपनी जान कुर्बान कर दी। वीरनारियों का सुहाग उजड़ा तो अपनों ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। शहीदों के ख्वाबों को हकीकत में बदलने के लिए उन्होंने बच्चों को देशभक्ति की तालीम दी। दिन-रात मेहनत की। शहीदों के बेटे ही नहीं, नाती भी देश की सीमा की हिफाजत कर रहे हैं।
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वीर नारी कलावती
- फोटो : अमर उजाला
वीर नारी कलावती
बाह के फतेहपुरागांव के सूबेदार राजबहादुर सिंह सीमा पर हिल्ली चौकी पर तैनात थे। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की चौकी पर कब्जा करने वाले दल में शामिल रहे। जान कुर्बान कर चौकी पर तिरंगा फहराया। मरणोपरांत उनको वीर चक्र दिया गया। उनकी शहादत के बाद वीर नारी कलावती ने साहस नहीं छोड़ा। पांचवीं की पढ़ाई कर रहे बेटे रमेश भदौरिया और तीसरी की पढ़ाई कर रहे सुरेश भदौरिया की परवरिश का सवाल सामने था।
बाह के फतेहपुरागांव के सूबेदार राजबहादुर सिंह सीमा पर हिल्ली चौकी पर तैनात थे। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की चौकी पर कब्जा करने वाले दल में शामिल रहे। जान कुर्बान कर चौकी पर तिरंगा फहराया। मरणोपरांत उनको वीर चक्र दिया गया। उनकी शहादत के बाद वीर नारी कलावती ने साहस नहीं छोड़ा। पांचवीं की पढ़ाई कर रहे बेटे रमेश भदौरिया और तीसरी की पढ़ाई कर रहे सुरेश भदौरिया की परवरिश का सवाल सामने था।
शहीद राजबहादुर सिंह के नाम पर बनवाया प्रवेशद्वार
- फोटो : अमर उजाला
रिश्तेदारों ने मदद नहीं की। खेत-खलिहान तक मेहनत की और दोनों बेटों को पढ़ाया। रिश्तेदारों ने ताने दिए लेकिन कदम नहीं डगमगाए। उनको सेना में भर्ती कराकर शहीद पति के ख्वाब को पूरा किया। नाती दीपक भी फौज में है। गांव में उन्होंने शहीद राजबहादुर सिंह के नाम पर प्रवेशद्वार बनवाया हुआ है।
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वीर नारी फुलहानी देवी
- फोटो : अमर उजाला
वीर नारी फुलहानी देवी
पुरा चौधरी के ऊधम सिंह ने अकोरा चौकी पर तैनात थे। 1971 में पाकिस्तान की चौकी पर कब्जे के लिए गए दल में शामिल थे। कुर्बानीी देकर मकसद पा लिया। वीर नारी फुलहानी देवी के सामने बेटों 12 साल के भारत सिंह, 10 साल के अनूप सिंह और एक साल के सुघर सिंह को पालने की चुनौती थी। परिजनों ने मुंह मोड़ लिया था।
पुरा चौधरी के ऊधम सिंह ने अकोरा चौकी पर तैनात थे। 1971 में पाकिस्तान की चौकी पर कब्जे के लिए गए दल में शामिल थे। कुर्बानीी देकर मकसद पा लिया। वीर नारी फुलहानी देवी के सामने बेटों 12 साल के भारत सिंह, 10 साल के अनूप सिंह और एक साल के सुघर सिंह को पालने की चुनौती थी। परिजनों ने मुंह मोड़ लिया था।
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विजय दिवस की गौरवगाथा का स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
शहीद ऊधम सिंह का ख्वाब था कि उनके बेटे भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें। पति के ख्वाब को पूरा करने के लिए वीर नारी ने खेतों में हल चलाया। लोगों के लिए घर पर चकिया से गेहूं पीसा। बेटों को तालीम दिलाकर सेना में भर्ती कराया। अनूप सिंह का बेटा अरविंद भी सेना में है।