बड़ी मछलियों को पल भर में चोंच में दबा लेने वाली रोजी पेलिकन... पिन जैसी पूंछवाली पिनटेल... चम्मच जैसी चोंच वाली स्पूनबिल... और उड़ते वक्त जहाज की तरह लगने वाली फ्लेमिंगो.... कीठम में ये सब 15 दिन के मेहमान है। देश विदेशी से आई इन रंग बिरंगी चिड़ियाओं को आप देखना चाहते हैं तो सूर सरोवर हो आइए, वरना नवंबर तक इंतजाम करना पड़ेगा।
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सूर सरोवर पक्षी विहार में परिंदे
- फोटो : अमर उजाला
सूर सरोवर पक्षी विहार में इस बार भी परिंदे बड़ी संख्या में आए हैं। 100 से ज्यादा प्रजातिया हैं। ये मंगोलिया, साइबेरिया, रूस, चीन और हिमालय से आए हैं। जब वहां सर्दी बहुत पड़ती है और पानी जम जाता है तो ये खाने और पानी की तलाश में आते हैं।
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कीठम की झील में प्रवासी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
अब जैसे जैसे पारा चढ़ेगा, ये अपने अपने वतन वापस जाना शुरु कर देंगे। नेशनल चंबल सेंक्च्युरी प्रोजेक्ट के डीएफओ आनंद कुमार ने बताया कि ये परिंदे एक साथ नहीं जाते हैं। अलग अलग प्रजाति की चिड़िया अलग अलग समय में जाती है। 15 फरवरी से इनका जाना शुरू हो जाता है। मार्च तक सभी चली जाती हैं।
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बार हैडेड गूज
- फोटो : अमर उजाला
मंगोलिया से आए बार हेडेड गूज कीठम झील से उड़ेंगे और फिर अपने घर मंगोलिया तक जाने के बीच सिर्फ एक बार रास्ते में रुकेंगे। यह ठहराव हिमाचल में होता है। कीठम आए सभी वार हेडेड गूज एक साथ जाते हैं।
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कीठम झील में प्रवासी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
डीएफओ ने बताया कि बर्ड माइग्रेशन बहुत ही अद्भुद है। जिन परिंदों का जन्म सूर सरोवर पक्षी विहार में हुआ है, वे मां के साथ वापस जाएंगे। अगले साल मां रहे न रहे, वे बच्चे कीठम ही आएंगे। ऐसा हर साल हो रहा है।