आगरा के सीता नगर में शादी वाले परिवार में तीन मौतों के बाद मंगलगीत की जगह करुण क्रंदन गूंजने लगा। हर्ष, प्रेम और अंकित राठौर की मौत से परिजनों का हाल बेहाल हो गया। अंकित चार बहन में अकेला भाई था। भाइयों की मौत से दुल्हन रीना भी फूट-फूटकर रो रही थी। यह देखकर मोहल्ले में हर आंख नम हो गई। बहन की डोली उठने से पहले रिश्तेदारों ने तीनों भाइयों की अर्थी उठाई। इसके बाद शादी की रस्म हुईं। परिवार के पांच लोगों के साथ दुल्हन को ग्वालियर भेजा गया था। रीना बचपन से अपने नाना के घर में पली बढ़ी थी। उसे मामा पवन कुमार ही संभाल रहे थे। कई दिन से परिवार शादी की तैयारी में लगा था। पवन का बेटा हर्ष भी कई दिन से सोया नहीं था। वह बहन की शादी में ग्वालियर जाने की तैयारी कर रहा था। रात में घटना की जानकारी पर बड़ी संख्या में रिश्तेदार घटनास्थल पर पहुंच गए। हादसा करने वाले ट्रक की तलाश करने लगे। मगर, वो नहीं मिला।
आगरा में दर्दनाक हादसा: बहन की डोली से पहले उठी तीन भाइयों की अर्थी, मंगलगीत की जगह करुण क्रंदन से हर आंख नम
हादसे में मरने वाले तुलसी चबूतरा निवासी अंकित के पिता अर्जुन सिंह मजदूरी करते हैं। मां गुड़िया देवी हैं। अंकित चार बहन में अकेला भाई था। उसकी मौत की खबर आई तो परिवार में चीत्कार मच गई। मां और बहन बेसुध हो गईं। परिजनों ने बताया कि अंकित पिता से बाइक लेकर जाने की कह रहा था। मगर, रात होने की वजह से उसे बाइक नहीं दी। अंकित ने ऑटो से रामबाग पर उतरने के बाद ही हर्ष को फोन करके बुला लिया था। घर वापस आते समय तीनों हादसे का शिकार हो गए।
मृतक प्रेम के पिता मुन्नालाल की शमसाबाद में परचूनी की दुकान है। वह दुल्हन रीना का फुफेरा भाई था। वह दो भाई और तीन बहन थे। उसका एक छोटा भाई है। प्रेम का शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। वहीं सीता नगर निवासी हर्ष दो भाइयों में बड़ा था।
दुल्हन को ग्वालियर लेकर गए परिवार के लोग
तीन मौतों के बाद परिवार के लोग एक ही बात कर रहे थे कि अब रीना की शादी करें या नहीं, इस पर बुजुर्गों ने बात की। रिश्तेदार ब्रजेश ने बताया कि दूल्हा पक्ष के लोगों से भी बात की गई। इसमें तय किया गया कि शादी करेंगे। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। गमगीन माहौल में ही सभी रस्में पूरी की जाएंगी। पहले अर्थियां उठेंगी। इसके बाद शादी की जाएगी। भाइयों की मौत से बहन रीना का रो-रोकर बुरा हाल था। उसके हाथों में मेहंदी रच चुकी थी। वह शादी नहीं करना चाहती थी। मगर, परिवार के लोगों ने उसे किसी तरह समझाया। इसके बाद शवों के पहुंचने से पहले उसे ग्वालियर परिवार के कुछ लोगों के साथ भेजा गया। उसके फेरे कराए गए।
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