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Bihar: पेपर लीक से हेरफेर तक, परीक्षा की हर गड़बड़ी को सुधार के लिए सीएम का बड़ा फैसला; अधिसूचना जारी
Sun, 23 Aug 2026 08:40 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Sun, 23 Aug 2026 08:40 PM IST
सार
परीक्षा विवाद के बीच बिहार में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की तैयारी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने पांच सदस्यीय विशेष समिति के गठन की अधिसूचना जारी की है। समिति तीन महीने में सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगी और प्रश्न-पत्र लीक, नकल, हेराफेरी के साथ AI, डिजिटल तकनीक, साइबर सुरक्षा और CCTV निगरानी जैसे पहलुओं की समीक्षा करेगी। पढ़ें पूरी खबर
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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
परीक्षा विवाद के बीच बिहार में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की तैयारी की जा रही है। परीक्षा में सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति का गठन होगा। इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कीहै। तीन महीने के भीतर सरकार को समिति अनुशंसा सौंपेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा फैसला लिया है।
वहीं, समीक्षा के दायरे में माध्यमिक-उच्च माध्यमिक से लेकर भर्ती एवं प्रतियोगिता परीक्षाएं होंगी। प्रश्न-पत्र लीक, नकल और परीक्षा में हेराफेरी रोकने के उपायों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही परीक्षा व्यवस्था में AI, डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा।
ऐसे विद्यार्थियों का रखा जाएगा विशेष ध्यान
प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित ट्रैकिंग की भी समीक्षा होगी बायोमेट्रिक सत्यापन और CCTV निगरानी को और प्रभावी बनाया जाएगा। परीक्षा संचालन से मूल्यांकन और परिणाम तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की कवायद की गई है। इसमें ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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1. परीक्षाओं का आयोजन परीक्षार्थियों की क्षमता का आकलन करने, पात्रता निर्धारित करने, उच्च शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार के लिये उम्मीदवारों का चयन करने के साथ-साथ शिक्षा एवं भर्ती प्रणाली में सर्वजन का विश्वास बनाये रखने के लिये सबसे महत्वपूर्ण साधन में एक है।
2. हाल के वर्षों में उम्मीदवारों की अधिकता, माध्यमिक और उच्च शिक्षा का विस्तार, सार्वजनिक रोजगार के लिये प्रतियोगिता परीक्षाओं, डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence) के आगमन, छात्रों एवं अभिभावकों की आकांक्षा, अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता के कारण परीक्षा का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecological System) बहुत जटिल हो गया है।
3. राज्य सरकार ने शैक्षणिक और भर्ती के अवसरों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। इस संदर्भ में परीक्षा के पूरे चक्र यथा-पंजीकरण, प्रश्न पत्र तैयारी, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, परिणाम, शिकायत निवारण एवं अभिलेखों के रख-रखाव इत्यादि में सुधार हेतु एक व्यापक परीक्षा सुधार की आवश्यकता है। अतएव सरकार वर्तमान परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करने और ऐसी परीक्षा प्रणाली स्थापित करने हेतु सुधारों की सिफारिश करने हेतु "परीक्षा सुधार पर एक विशेषज्ञ समिति" का गठन करती है, जो निष्पक्ष, सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीकी-सक्षम, समयबद्ध, योग्यता उन्मुख, सुलभ और विश्वसनीय हो।
जानें समिति का उद्देश्य
समिति का उद्देश्य होगा-(क) राज्य और उसकी परीक्षा निकायों द्वारा आयोजित परीक्षाओं की विश्वसनीयता, सत्यनिष्ठा और सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करना। (ख) प्रश्न-पत्र लीक, छद्म परीक्षार्थी, चोरी और सामूहिक नकल, परीक्षा केन्द्रों में हेरा-फेरी, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़, परीक्षा डेटा पर अनाधिकृत पहुँच, परिणाम में हेरा-फेरी और परीक्षा कदाचार को समाप्त करना। (ग) परीक्षा का समयबद्ध संचालन और परिणामों की स-समय घोषणा, साथ ही परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करना। (घ) मानवीय पर्यवेक्षण और डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए डिजिटल प्रौद्योगिकी, डाटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा उपकरणों का उचित उपयोग करना। (ङ) स्वतंत्र गुणवत्ता, पूर्ण आश्वासन और परीक्षाओं के ऑडिट की प्रणाली विकसित करना। (च) यह भी सुनिश्चित करना कि परीक्षा सुधारों से ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर, सामाजिक रूप से वंचित या डिजिटल रूप से कम जुड़े हुए पृष्ठभूमि के छात्रों का नुकसान न हो।
ये रहेगा समिति का कार्य क्षेत्र
समिति आवश्यकतानुसार बिहार में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की निम्न श्रेणी की जांच कर अनुशंसा कर सकती है:-क- माध्यमिक/उच्च माध्यमिक परीक्षायें। ख- विश्वविद्यालय की परीक्षायें। ग- व्यावसायिक एवं तकनीकी परीक्षायें। घ- प्रवेश एवं पात्रता परीक्षायें। ङ- भर्ती और प्रतियोगिता परीक्षायें। हालांकि समिति संवैधानिक / वैधानिक परीक्षा और भर्ती निकायों की वैधानिक स्वायत्तता का सम्मान करेगी और समन्वय और साझा सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिये उपरोक्त संस्थागत तंत्र की सिफारिश करेगी।
समिति निम्न बिन्दुओं की जांच और सिफारिश करेगी
(क) परीक्षा प्रशासन-(i) बिहार में परीक्षाओं को संचालन करने वाले मौजूदा संस्थागत ढांचा एवं आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा करना। (ii) परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों, विभागों, जिला प्रशासन और परीक्षा केन्द्रों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की समीक्षा करना। (iii) परीक्षा तंत्र परीक्षा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में विफलता के लिये जवाबदेही तय करने हेतु तंत्र की सिफारिश करना।
(ख) परीक्षा कैलेंडर और समयबद्धता
यह समिति से परीक्षाओं, मूल्यांकन, परिणामों की घोषणा में देरी की कारणों की समीक्षा करेगी और जहाँ तक सम्भव हो एक राज्य परीक्षा कैलेन्डर की सिफारिश करेगी, जिसमें विज्ञापन, आवेदन, प्रवेश पत्र निर्गम, परीक्षा, प्रोविजनल उत्तर पंजी का प्रकाशन, आपत्ति दर्ज करने, अंतिम उत्तर पंजी कुंजी का प्रकाशन, मूल्यांकन, परिणाम का प्रकाशन, जाँच / पैनल मूल्यांकन एवं अनुशंसा प्रेषण के लिये अधिकतम समय-सीमा निर्धारित करेगी।
(ग) प्रश्न-पत्रों में सुधार :- यह समिति प्रश्न-पत्र के निर्माण की व्यापक समीक्षा करेगी और बहु-स्तरीय प्रश्न-पत्र सेटिंग, मोडरेसन, प्रशिक्षित और सूचीबद्ध पेपर सेटर का उपयोग, कठिनाई स्तर का मानकीकरण आदि पर भी एक विस्तृत प्रणाली की अनुशंसा करेगी।
(घ) परीक्षा सुरक्षा एवं पेपर लीक की रोकथाम :-
यह समिति पूरी परीक्षा का एक व्यापक सुरक्षा ऑडिट करेगी, जिसमें प्रश्न-पत्र सेटिंग, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, वितरण, डिजिटल ट्रांसमिशन और पहुंच नियंत्रण भी शामिल होंगे। परीक्षा केन्द्रों की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन, सी.सी.टी.वी. निगरानी, वीक्षक, उत्तर पुस्तिकाओं का संकलन, परिवहन, सुरक्षित भंडारण, स्कैनिंग / डिजलिटिकरण, मूल्यांकन और परिणाम प्रोसेसिंग आदि का भी पूर्ण ऑडिट करेगी और इन बिन्दुओं पर ऐसी अनुशंसा करेगी जो सुरक्षित और पेपर लीक तथा छद्मनामी परीक्षा इत्यादि रहित हो।
समिति परीक्षा सामग्रियों के इंड-टू-इंड डिजिटल ट्रैकिंग, छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग, इंटीक्रेप्ट ट्रान्समिशन, मल्टी-फैक्टर प्रमाणीकरण, बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-टैकिंग और जियो-फेंसिंग, साइबर सुरक्षा ऑडिट, सी.सी.टी.वी. और सुरक्षित कमान्ड सेंटर की व्यवहार्यता की भी जांच कर अनुशंसा करेगी। प्रश्न-पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं के लिये एक स्पष्ट की अनुशंसा करेगी।
(ङ) समिति कानूनी और नियामक ढांचा में आवश्यक परिवर्तन हेतु मौजूदा अधिनियमों, नियमों, विनियमों, परीक्षा उप-नियम, संस्थागत नियम, गोपनीय प्रावधान, कदाचार से संबंधित प्रावधान, डाटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा आवश्यकता इत्यादि का अध्ययन करते हुए इसमें आवश्यक संशोधन हेतु अनुशंसा करेगी।
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7. समिति की संरचनाः-
राज्य सरकार द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश / माननीय उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश / माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में 05 (पांच) सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। समिति के अध्यक्ष के मनोनयन हेतु आवश्यकतानुसार माननीय उच्चतम न्यायालय/माननीय उच्च न्यायालय से आवश्यक अनुरोध किया जाएगा। 8. अवधि :- उक्त समिति अपनी गठन की तिथि से तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिश सरकार को समर्पित करेगी।
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वहीं, समीक्षा के दायरे में माध्यमिक-उच्च माध्यमिक से लेकर भर्ती एवं प्रतियोगिता परीक्षाएं होंगी। प्रश्न-पत्र लीक, नकल और परीक्षा में हेराफेरी रोकने के उपायों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही परीक्षा व्यवस्था में AI, डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा।
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ऐसे विद्यार्थियों का रखा जाएगा विशेष ध्यान
प्रश्न-पत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित ट्रैकिंग की भी समीक्षा होगी बायोमेट्रिक सत्यापन और CCTV निगरानी को और प्रभावी बनाया जाएगा। परीक्षा संचालन से मूल्यांकन और परिणाम तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की कवायद की गई है। इसमें ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के हितों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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1. परीक्षाओं का आयोजन परीक्षार्थियों की क्षमता का आकलन करने, पात्रता निर्धारित करने, उच्च शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार के लिये उम्मीदवारों का चयन करने के साथ-साथ शिक्षा एवं भर्ती प्रणाली में सर्वजन का विश्वास बनाये रखने के लिये सबसे महत्वपूर्ण साधन में एक है।
2. हाल के वर्षों में उम्मीदवारों की अधिकता, माध्यमिक और उच्च शिक्षा का विस्तार, सार्वजनिक रोजगार के लिये प्रतियोगिता परीक्षाओं, डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence) के आगमन, छात्रों एवं अभिभावकों की आकांक्षा, अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता के कारण परीक्षा का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecological System) बहुत जटिल हो गया है।
3. राज्य सरकार ने शैक्षणिक और भर्ती के अवसरों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। इस संदर्भ में परीक्षा के पूरे चक्र यथा-पंजीकरण, प्रश्न पत्र तैयारी, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, परिणाम, शिकायत निवारण एवं अभिलेखों के रख-रखाव इत्यादि में सुधार हेतु एक व्यापक परीक्षा सुधार की आवश्यकता है। अतएव सरकार वर्तमान परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करने और ऐसी परीक्षा प्रणाली स्थापित करने हेतु सुधारों की सिफारिश करने हेतु "परीक्षा सुधार पर एक विशेषज्ञ समिति" का गठन करती है, जो निष्पक्ष, सुरक्षित, पारदर्शी, तकनीकी-सक्षम, समयबद्ध, योग्यता उन्मुख, सुलभ और विश्वसनीय हो।
जानें समिति का उद्देश्य
समिति का उद्देश्य होगा-(क) राज्य और उसकी परीक्षा निकायों द्वारा आयोजित परीक्षाओं की विश्वसनीयता, सत्यनिष्ठा और सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करना। (ख) प्रश्न-पत्र लीक, छद्म परीक्षार्थी, चोरी और सामूहिक नकल, परीक्षा केन्द्रों में हेरा-फेरी, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़, परीक्षा डेटा पर अनाधिकृत पहुँच, परिणाम में हेरा-फेरी और परीक्षा कदाचार को समाप्त करना। (ग) परीक्षा का समयबद्ध संचालन और परिणामों की स-समय घोषणा, साथ ही परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करना। (घ) मानवीय पर्यवेक्षण और डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए डिजिटल प्रौद्योगिकी, डाटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा उपकरणों का उचित उपयोग करना। (ङ) स्वतंत्र गुणवत्ता, पूर्ण आश्वासन और परीक्षाओं के ऑडिट की प्रणाली विकसित करना। (च) यह भी सुनिश्चित करना कि परीक्षा सुधारों से ग्रामीण, आर्थिक रूप से कमजोर, सामाजिक रूप से वंचित या डिजिटल रूप से कम जुड़े हुए पृष्ठभूमि के छात्रों का नुकसान न हो।
ये रहेगा समिति का कार्य क्षेत्र
समिति आवश्यकतानुसार बिहार में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की निम्न श्रेणी की जांच कर अनुशंसा कर सकती है:-क- माध्यमिक/उच्च माध्यमिक परीक्षायें। ख- विश्वविद्यालय की परीक्षायें। ग- व्यावसायिक एवं तकनीकी परीक्षायें। घ- प्रवेश एवं पात्रता परीक्षायें। ङ- भर्ती और प्रतियोगिता परीक्षायें। हालांकि समिति संवैधानिक / वैधानिक परीक्षा और भर्ती निकायों की वैधानिक स्वायत्तता का सम्मान करेगी और समन्वय और साझा सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिये उपरोक्त संस्थागत तंत्र की सिफारिश करेगी।
समिति निम्न बिन्दुओं की जांच और सिफारिश करेगी
(क) परीक्षा प्रशासन-(i) बिहार में परीक्षाओं को संचालन करने वाले मौजूदा संस्थागत ढांचा एवं आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा करना। (ii) परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों, विभागों, जिला प्रशासन और परीक्षा केन्द्रों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की समीक्षा करना। (iii) परीक्षा तंत्र परीक्षा प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में विफलता के लिये जवाबदेही तय करने हेतु तंत्र की सिफारिश करना।
(ख) परीक्षा कैलेंडर और समयबद्धता
यह समिति से परीक्षाओं, मूल्यांकन, परिणामों की घोषणा में देरी की कारणों की समीक्षा करेगी और जहाँ तक सम्भव हो एक राज्य परीक्षा कैलेन्डर की सिफारिश करेगी, जिसमें विज्ञापन, आवेदन, प्रवेश पत्र निर्गम, परीक्षा, प्रोविजनल उत्तर पंजी का प्रकाशन, आपत्ति दर्ज करने, अंतिम उत्तर पंजी कुंजी का प्रकाशन, मूल्यांकन, परिणाम का प्रकाशन, जाँच / पैनल मूल्यांकन एवं अनुशंसा प्रेषण के लिये अधिकतम समय-सीमा निर्धारित करेगी।
(ग) प्रश्न-पत्रों में सुधार :- यह समिति प्रश्न-पत्र के निर्माण की व्यापक समीक्षा करेगी और बहु-स्तरीय प्रश्न-पत्र सेटिंग, मोडरेसन, प्रशिक्षित और सूचीबद्ध पेपर सेटर का उपयोग, कठिनाई स्तर का मानकीकरण आदि पर भी एक विस्तृत प्रणाली की अनुशंसा करेगी।
(घ) परीक्षा सुरक्षा एवं पेपर लीक की रोकथाम :-
यह समिति पूरी परीक्षा का एक व्यापक सुरक्षा ऑडिट करेगी, जिसमें प्रश्न-पत्र सेटिंग, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, वितरण, डिजिटल ट्रांसमिशन और पहुंच नियंत्रण भी शामिल होंगे। परीक्षा केन्द्रों की सुरक्षा, उम्मीदवारों की पहचान, बायोमेट्रिक सत्यापन, सी.सी.टी.वी. निगरानी, वीक्षक, उत्तर पुस्तिकाओं का संकलन, परिवहन, सुरक्षित भंडारण, स्कैनिंग / डिजलिटिकरण, मूल्यांकन और परिणाम प्रोसेसिंग आदि का भी पूर्ण ऑडिट करेगी और इन बिन्दुओं पर ऐसी अनुशंसा करेगी जो सुरक्षित और पेपर लीक तथा छद्मनामी परीक्षा इत्यादि रहित हो।
समिति परीक्षा सामग्रियों के इंड-टू-इंड डिजिटल ट्रैकिंग, छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग, इंटीक्रेप्ट ट्रान्समिशन, मल्टी-फैक्टर प्रमाणीकरण, बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-टैकिंग और जियो-फेंसिंग, साइबर सुरक्षा ऑडिट, सी.सी.टी.वी. और सुरक्षित कमान्ड सेंटर की व्यवहार्यता की भी जांच कर अनुशंसा करेगी। प्रश्न-पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं के लिये एक स्पष्ट की अनुशंसा करेगी।
(ङ) समिति कानूनी और नियामक ढांचा में आवश्यक परिवर्तन हेतु मौजूदा अधिनियमों, नियमों, विनियमों, परीक्षा उप-नियम, संस्थागत नियम, गोपनीय प्रावधान, कदाचार से संबंधित प्रावधान, डाटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा आवश्यकता इत्यादि का अध्ययन करते हुए इसमें आवश्यक संशोधन हेतु अनुशंसा करेगी।
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7. समिति की संरचनाः-
राज्य सरकार द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश / माननीय उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश / माननीय उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में 05 (पांच) सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। समिति के अध्यक्ष के मनोनयन हेतु आवश्यकतानुसार माननीय उच्चतम न्यायालय/माननीय उच्च न्यायालय से आवश्यक अनुरोध किया जाएगा। 8. अवधि :- उक्त समिति अपनी गठन की तिथि से तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिश सरकार को समर्पित करेगी।