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श्री पारस अस्पताल ऑक्सीजन मॉकड्रिल प्रकरण: 22 लोगों से पूछताछ...नतीजा शून्य, पीड़ितों की शिकायतों पर नहीं हुई जांच

Tue, 13 Jul 2021 12:06 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 13 Jul 2021 12:06 AM IST
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Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: Investigate With 22 People In 35 Days But No Result
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
आगरा के श्री पारस अस्पताल मामले में 35 दिन से पुलिस की महज पूछताछ चल रही है। 22 लोगों से पूछताछ के बाद भी नतीजा शून्य ही है। न तो महामारी अधिनियम में दर्ज केस में विवेचना आगे बढ़ सकी और न ही पीड़ितों की शिकायत पर कोई सुनवाई की गई। पीड़ित सामने होने पर भी जांच तो दूर, बयान तक दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में सभी न्याय के लिए भटक रहे हैं। श्री पारस अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अरिन्जय जैन का वीडियो सामने आने के बाद 8 जून को थाना न्यू आगरा में महामारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें आक्सीजन की कमी को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया गया। वीडियो में ऑक्सीजन की कमी पर मॉकड्रिल करने और 22 मरीजों के छंटने की बात कही गई थी। 

 
Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: Investigate With 22 People In 35 Days But No Result
श्री पारस अस्पताल: स्वास्थ्य विभाग की टीम (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की जांच में अस्पताल संचालक को क्लीन चिट दे दी गई। पुलिस ने मुकदमे की विवेचना को वीडियो बनाने वाले और वायरल करने वाले तक ही सीमित कर दिया। यह वीडियो कब बना, किसने बनाया और इतने दिन बाद वायरल क्यों किया गया, जैसे सवालों को पूछा गया। तकरीबन 22 लोगों से पूछताछ की गई। इनमें डॉक्टर और 26 अप्रैल के बाद डॉक्टर से मिलने गए लोग शामिल हैं। चांदी कारोबारी और अन्य लोगों को भी थाने लाया गया। इस पूछताछ का नतीजा कुछ नहीं निकल सका।
Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: Investigate With 22 People In 35 Days But No Result
श्री पारस अस्पताल: डीवीआर ले जाता पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
दो मोबाइल जब्त, डाटा रिकवर नहीं
पुलिस ने सबसे पहले छत्ता क्षेत्र के एक युवक का मोबाइल जब्त किया। आशंका जताई गई कि युवक ने ही मोबाइल से वीडियो बनाया। युवक 16 मई को अस्पताल में मरीज के इलाज के बारे में बात करने गया था। युवक ने पूछताछ में वीडियो बनाने से इनकार कर दिया। इस पर पुलिस ने मोबाइल चेक किया। मोबाइल में वीडियो नहीं मिला। मोबाइल को जब्त किया गया। मोबाइल से डिलीट डाटा रिकवर करने के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। इसी तरह एक चांदी कारोबारी को भी पकड़ा गया। उन पर भी वीडियो बनाने का शक जताया गया। वह अस्पताल में डॉक्टर से मिलने गए थे। उनसे पूछताछ की गई। उन्होंने मना कर दिया। इस पर उनका मोबाइल जब्त कर लिया गया। उसे भी लैब भेजा गया है। मगर, रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
 
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Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: Investigate With 22 People In 35 Days But No Result
श्री पारस अस्पताल: मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल का डीवीआर जांच के लिए भेजा, रिपोर्ट का इंतजार
श्री पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की बात कही गई थी। पीड़ितों ने मांग की थी कि अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर को कब्जे में लिया जाए। मॉकड्रिल की गई होगी तो अस्पताल में हलचल जरूरी रही होगी। यह फुटेज में आया होगा। फुटेज डॉक्टर के खिलाफ सुबूत बन सकते हैं। यह सवाल उठाए जाने के बाद अस्पताल के डीवीआर को कब्जे में लिया गया था। दो दिन पहले डीवीआर को फोरेंसिक लैब लखनऊ भेजा गया है। अब पुलिस को डीवीआर की रिपोर्ट का इंतजार है। इसमें फुटेज कितने दिन के हैं, डिलीट फुटेज मिल पाएंगे या नहीं, यह सब पता करना है। मगर, जब रिपोर्ट नहीं आ जाती, पुलिस की जांच भी आगे नहीं बढ़ेगी।
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Shri Paras Hospital Oxygen Mockdrill Case: Investigate With 22 People In 35 Days But No Result
श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
‘डीवीआर को लैब पहुंचाने में भी हुई देरी, कैसे होगी सही जांच’
श्री पारस अस्पताल के डीवीआर को विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ जांच के लिए भेजा गया है। इसमें फुटेज हैं या नहीं, इसका पता प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद ही चल सकेगा। इस डीवीआर को पहले कब्जे में लेने में देरी की गई। कब्जे में लेने के बाद भी लैब पहुंचाने में देर की गई। अब सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को रिकवर कराया जाए। इसकी रिपोर्ट जल्द मंगाई जाए। युवा अधिवक्ता संघ और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सोमवार को एडीजी राजीव कृष्ण से मुलाकात कर यही कहा। उन्हें ज्ञापन देकर जल्द रिपोर्ट की मांग की।
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