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जन्माष्टमी पर द्वापर जैसा योग: राशि के अनुसार करें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, जानें विधि-विधान

Mon, 30 Aug 2021 10:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा / मथुरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा / मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 30 Aug 2021 10:14 AM IST
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Shri Krishna Janmashtami 2021 Puja Vidhi in Hindi
वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में श्रीकृष्ण के विग्रह - फोटो : अमर उजाला

आगरा-मथुरा समेत पूरे ब्रज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम है। इस बार रोहिणी नक्षत्र में हर्षण, माला, शक्ति कमल और राजकेसरी योग में सोमवार को रात 12 बजे घर-घर कन्हाई जन्मेंगे। 101 साल बाद बन रहे योग में गृहस्थ और वैष्णव एक साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाएंगे। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर रात 12.00 बजे भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। इस अवसर पर ब्रज के मंदिरों में भव्य सजावट की गई है। 



आगरा की ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय का कहना है कि इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत अति फलदायी रहेगा। इस दिन सूर्य मंगल, सिंह राशि में चंद्रमा उच्च राशि में वृषभ में शक्ति एवं पराक्रम प्रदान करेंगे। सोमवार को अष्टमी तिथि रात्रि 1:59 बजे तक रहेगी। 

Shri Krishna Janmashtami 2021 Puja Vidhi in Hindi
श्रीराधाकृष्ण के विग्रह - फोटो : अमर उजाला
विधि-विधान से करें पूजन और व्रत
ज्योतिषाचार्य के अनुसार प्रात: काल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें। घर में मंदिर को केले के पत्ते, आम के पत्ते और अशोक के पल्लव आदि से सजाएं। दरवाजे पर मंगल कलश एवं बंदनवार सजाएं। दिन में भगवान की मूर्ति के समक्ष बैठकर कीर्तन करें। रात्रि 12 बजे गर्भ से जन्म लेने के प्रतीक स्वरूप खीरे के मध्य लड्डू गोपाल का जन्म कराएं। पंचामृत से स्नान कराकर गंगाजल से स्नान कराएं। नवीन वस्त्र, आभूषण धारण कराएं। 

बाल स्वरूप कृष्ण भगवान को पुष्पमाला पहनाकर इत्र, चंदन, अक्षत से शृंगार करें। दीप, धूप, नैवेद्य, सिंघाड़े की बरफी, पंजीरी, नारियल के मिष्ठान्न, मेवा का प्रसाद अर्पित करें। जन्मोत्सव के उपरांत घी और कपूर के दीपक से भगवान की आरती और स्तुति करें। ओम नमो: भगवते वासुदेवाय: मंत्र का जाप करें।
Shri Krishna Janmashtami 2021 Puja Vidhi in Hindi
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भव्य सजावट - फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी पर बन रहा द्वापर जैसा योग
ह। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा के वृष राशि में रहते हुआ था। इस साल बुधवार की जगह सोमवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। बाकी सभी योग द्वापर युग जैसे हैं। इस दुर्लभ योग में राशि अनुसार पूजा करने का विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होगा। 
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Shri Krishna Janmashtami 2021 Puja Vidhi in Hindi
आगरा के राधाकृष्ण मंदिर में की गई सजावट - फोटो : अमर उजाला
राशि के अनुसार पूजा
मेषः कुमकुम का तिलक लगाकर माखन और मिश्री से भगवान को भोग लगाएं। 
वृषः सफेद वस्त्र अर्पित कर दूध, दही का भोग लगाएं। 
मिथुनः पीला चंदन अर्पित कर मेवे-दही का भोग लगाएं। 
कर्कः सफेद वस्त्र पहना कर केसर युक्त दूध का भोग लगाएं। 
सिंहः गुलाबी वस्त्र पहना कर माखन मिश्री का भोग लगाएं। 
कन्याः हरे वस्त्र पहना कर दूध, इलाइची का भोग लगाएं। 
तुलाः वाले गुलाबी रंग का वस्त्र पहना कर माखन-मिश्री और घी का भोग लगाएं। 
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Shri Krishna Janmashtami 2021 Puja Vidhi in Hindi
लड्डू गोपाल को निहारती युवती - फोटो : अमर उजाला
वृश्चिकः लाल वस्त्र पहना माखन या दही का भोग लगाएं। 
धनुः पीला वस्त्र पहनाकर केला या अमरुद या दोनों का भोग लगाएं। 
मकरः नारंगी रंग का वस्त्र पहनाकर मिश्री का भोग लगाएं। 
कुंभः नीले वस्त्र पहनाकर सूखे मेवे का भोग लगाएं। 
मीनः कान्हा को पीतांबरी वस्त्र पहनाकर नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
(ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर)
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