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Sharad Purnima 2020: बांकेबिहारी मंदिर में छाया शरद उत्सव का उल्लास, दर्शन को उमड़े भक्त
Sat, 31 Oct 2020 12:22 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 31 Oct 2020 12:22 AM IST
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्त
- फोटो : अमर उजाला
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शरद पूर्णिमा पर वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में शरद उत्सव का उल्लास छाया हुआ है। ठाकुरजी विशेष पोशाक और शृंगार धारण कर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। इस विशेष पोशाक शृंगार को दिल्ली और जयपुर के कारीगरों ने तैयार किया है। सोने-चांदी के आभूषण ठाकुरजी के शृंगार का हिस्सा बने हैं। शरद उत्सव पर मंदिर के पट आम दिनों से एक घंटे अधिक समय तक खुले रहेंगे।
बांकेबिहारी मंदिर में भक्त
- फोटो : अमर उजाला
शरद पूर्णिमा श्रीबांकेबिहारी के लिए खास है। श्रीबांकेबिहारी मंदिर के सेवा अधिकारी प्रदीप गोस्वामी एवं अरविंद गोस्वामी, मुन्ना श्याम गोस्वामी ने बताया कि वर्ष में सर्फ एक दिन ही ठाकुरजी बंशी, मोर-मुकुट, कट-कछनी, पोशाक, हार लकुटी धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं।
बांकेबिहारी मंदिर में भक्त
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा के ठाकुरजी का विशेष शृंगार संपूर्ण रूप से सोने चांदी का जयपुर में कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है। जबकि ठाकुर जी की सफेद पोशाक दिल्ली के चांदनी चौक में विशेष कारीगरों द्वारा तैयार कराई गई है। पोशाक और शृंगार धारण कर ठाकुर बांकेबिहारी जगमोहन में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्त (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि श्रीमद्भागवत में वर्णन के अनुसार शरद पूर्णिमा वाले दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना किनारे गोपियों के साथ वृंदावन में बंसीवट पर महारास किया था। इसीलिए शरद पूर्णिमा वाले दिन श्रीबांकेबिहारी जी को शृंगार में मोर मुकुट कछनी बंसी धारण कराई जाती है।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्त
- फोटो : अमर उजाला
शरद पूर्णिमा पर ठाकुरजी को विशेष रुप से खीर एवं चंद्रकला का भोग चंद्रमा के दर्शन करने के बाद लगाया जाता है। इसी दिन के बाद से ठाकुर जी की शीतकालीन भोग राग की सेवाएं प्रारंभ हो जाती हैं। प्रसाद में मेवा का प्रयोग इत्र में हिना का प्रयोग एवं दूध भात में केसर का प्रयोग प्रारंभ हो जाता है।