{"_id":"5aacbaad4f1c1b8c778b61c1","slug":"school-administration-negligence-in-treatment","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"एटाः इस लापरवाही के चलते 55 छात्राओं की बिगड़ी हालत, इलाज के दौरान कम पड़ गया बेड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एटाः इस लापरवाही के चलते 55 छात्राओं की बिगड़ी हालत, इलाज के दौरान कम पड़ गया बेड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला एटा
Updated Sat, 17 Mar 2018 02:44 PM IST
विज्ञापन
अस्पताल में छात्राओं का हुआ इलाज
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के एटा में छात्राओं ने राजमा-आलू की सब्जी के साथ चावल खूब चाव से खाए, लेकिन उन छात्राओं को क्या पता था कि यह निवाला उनकी सेहत पर बन आएगा। स्कूल स्टाफ की लापरवाही से 55 छात्राओं की जान पर बन गई। अवागढ़ के कस्तूरबा स्कूल में खाना खाने के बाद बीमार पड़ी छात्राओं ने खाने में गोलियां और मीठेपन की शिकायत की थी। इसके बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
अस्पताल में भर्ती छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
वहीं अस्पताल पहुंची छात्राओं को बेड की कमी होने के चलते एक-एक बेड पर चार से पांच छात्रों का इलाज किया गया। जिला अस्पताल पहुंची छात्राओं ने बताया कि गुरुवार रात को स्कूल में मिला खाना रोज की तरह नहीं था। उनको खाने में मीठापन महसूस हुआ, तो सोचा कि चीनी डाल दी होगी। मगर जब कुछ छात्राओं ने खाने में खाद्य संरक्षण वाली गोलियां देखीं, तो कुछ शक हुआ।
ऐसे हुआ इलाज
- फोटो : अमर उजाला
ऐसा माना जा रहा है कि कि चावलों को कीड़ों से बचाने के लिए डाली जाने वाली गोलियां खाने के साथ पका दी गई हैं, लेकिन छात्राएं पूरी तरह से इसकी पुष्टि नहीं कर पा रही हैं। गुरुवार रात को खाना खाने के बाद विद्यालय की शिक्षिका प्रियंका को भी उल्टी, दस्त की शिकायत होने की बात सामने आई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
परिजन भी पहुंच गए
- फोटो : अमर उजाला
वहीं छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के बाद जब शुक्रवार को एबीएसए नीरजा चतुर्वेदी ने विद्यालय पहुंचकर रसोई देखी, तो उनको भी तमाम गंदगी मिली। इससे एक बात साफ है कि खाना बनाने में गुणवत्ता और स्वच्छता के मानक दरकिनार कर दिए गए। हालांकि असलियत मामले की जांच के बाद सामने आएगी, मगर छात्राओं की सेहत के साथ खिलवाड़ ने बा स्कूलों की हकीकत को उजागर कर दिया है।
विज्ञापन
सहमी हुई थीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
अवागढ़ पीएचसी पर तैनात डा. अवधेश कठेरिया ने बताया कि स्कूल में यह चौथी घटना है। हर तीन महीने पर छात्राओं को फूड प्वाइजनिंग होती है। हर बार दो से 36 छात्राएं इसकी शिकार होती रही हैं। फिर भी विभाग कार्रवाई से कतरा रहा है। स्कूल में तैनात रसोइया रीना और बेबी ने बताया कि वार्डन आरती यादव खाना बनाने का सारा सामान थोक में लाती हैं। इनमें सब्जियां अधिकतर खराब हो जाती हैं। कई बार मना करने के बाद भी उन्होंने खराब सब्जियां बनवाई हैं। जिससे छात्राओं की सेहत बार-बार बिगड़ती है।