आगरा के थाना ताजगंज क्षेत्र में पूर्व फौजी अनिल कुमार राजावत और उनकी पत्नी संगीता पर एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें चौकी से छोड़ने के लिए चौकी प्रभारी ने 60 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। यह आरोप खुद अनिल कुमार ने लगाया है। अनिल ने कहा है कि रुपये लेने के बाद दरोगा ने उन्हें छोड़ा था। उन्हें एससी-एसटी एक्ट हटाने का भी आश्वासन दिया था। इस संबंध में अनिल ने जिलाधिकारी पीएन सिंह और एसएसपी बबलू कुमार से शिकायत की है। चौकी प्रभारी को पहले की लाइन हाजिर किया गया है। अब आरोप लगने के बाद इसकी जांच कराई जा रही है।
संगीता हत्याकांड: मृतका के पति का आरोप- चौकी से छोड़ने के लिए दरोगा ने लिए थे 60 हजार रुपये
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ताजगंज की पुष्पांजलि ईको सिटी कॉलोनी निवासी अनिल कुमार राजावत की पत्नी संगीता रविवार को घर के बाहर जल गई थीं। उनकी सोमवार की सुबह मौत हो गई थी। इस मामले में चार नामजद और 12 अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी भरत खरे, उसकी पत्नी सुनीता, कपिल और सोनू को जेल भेजा था। गुरुवार को क्षत्रिय महासभा के सदस्य शोक संवेदना प्रकट करने अनिल के घर गए थे। इसी दौरान जिलाधिकारी और एसएसपी पहुंच गए। उन्होंने अनिल से बातचीत की।
अनिल ने अधिकारियों से कहा कि छह अक्तूबर को बच्चों में विवाद हुआ था। बिना जांच के ही दूसरे दिन थाना ताजगंज में मारपीट और एससी-एसटी एक्ट की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। विवेचना सीओ सदर महेश कुमार को करनी थी। मगर, एकता चौकी के प्रभारी योगेश कुमार पंचायत करा रहे थे। आरोप लगाया कि 10 अक्तूबर को चौकी पर 10 घंटे तक बैठाकर रखा। इसके बाद 60 हजार रुपये रिश्वत ली। यह रकम पत्नी संगीता घर से लेकर आई थीं। चौकी प्रभारी ने उनसे कहा था कि मुकदमे से एससी-एसटी एक्ट भी हटा देंगे। समझौते के लिए बोल रहे थे। इस मामले में सीओ सदर महेश कुमार का कहना है कि आरोप की जांच कराई जा रही है।
क्षत्रिय सभा जिला आगरा ने शुक्रवार को वाटर वर्क्स स्थित क्षत्रिय सदन में बैठक की। इसमें पदाधिकारियों ने कहा कि दरोगा ने पीड़ित से 60 हजार रुपये लिए थे। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। यह भी कहा कि दरोगा घटना के लिए बराबर का दोषी है। उसे भी हत्या के मुकदमे में नामजद किया जाए। उसे जेल भेजा जाना चाहिए। दरोगा को सिर्फ लाइन हाजिर किया गया है। उसके खिलाफ निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई होनी चाहिए। अधिकारियों के रवैये से लगता है कि उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्रवाई पर सवाल
- एससी-एसटी एक्ट के मुकदमे की जांच सीओ स्तर के अधिकारी करते हैं। मगर, दरोगा क्यों पंचायत करा रहे थे। चौकी पर पीड़ित को क्यों बुलाया गया। इसकी जानकारी सीओ को क्यों नहीं दी गई।
- बच्चों के झगड़े में मुकदमे की बात सामने आने पर भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से पहले जांच क्यों नहीं की।
- सिर्फ दरोगा को लाइन हाजिर किया गया। इसके अलावा भी पुलिसकर्मी दोषी हैं। उन पर कब कार्रवाई होगी।
- पुलिस पर रिश्वत लेने के आरोप लग रहे है। इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई।