फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

UP: आम की गुठली और मटर के छिलके कचरे में न फेंके...इनकी खूबी जानकर रह जाएंगे हैरान, ये हैं सेहत का गुप्त भंडार

Fri, 29 Aug 2025 08:27 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अबरार अहमद, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अबरार अहमद, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 29 Aug 2025 08:27 AM IST
सार

आगरा के आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने कचरे से सेहत का खजाना खोज निकाला। मटर के छिलके से बिस्किट, आम की गुठली से कस्टर्ड पाउडर और बेल के खोल से पर्यावरण हितैषी पैकेजिंग तैयार की है।

विज्ञापन
rbs engineering students discover health treasure from waste
student innovation - फोटो : अमर उजाला न्यूज नेटवर्क
फल और सब्जियों के छिलके जिन्हें आप कचरा (वेस्ट) फेंक देते हैं, वह पोषक तत्वों का भंडार हैं। हरे मटर के छिलके में विटामिन बी1, बी2, विटामिन सी, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम उपयुक्त मात्रा में पाया जाता है। आम की गुठली में भी कई पोषक तत्व होते हैं।


राजा बलवंत सिंह (आरबीएस) इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस, बिचपुरी के फूड टेक्नोलॉजी विभाग के छात्रों व शिक्षकों ने हरे मटर के छिलके और आम की गुठली को प्रसंस्कृत कर बिस्किट व कस्टर्ड पाउडर तैयार किया है। इस शोध का उद्देश्य है कि कचरे के तौर पर फेंकने के बजाय इनका इस्तेमाल कर अपनी और पर्यावरण की सेहत सुधारी जा सकती है।

कॉलेज के फूड टेक्नोलॉजी विभाग के शिक्षक अमित प्रताप सिंह के निर्देशन में छात्र निखिल चौहान, श्रुति त्रिपाठी, वर्षा चाहर, यश राठौर और वतन कुमार ने मटर के छिलकों को वैज्ञानिक विधि से उपचारित किया और उचित तापमान पर निर्जलीकरण कर पाउडर बनाया। इस पाउडर को अलग-अलग अनुपात में मैदा के साथ मिलाकर बिस्किट तैयार किया। बनावट विश्लेषण (टेक्चरल एनालिसिस) और संवेदी मूल्यांकन (सेंसरी इवैल्युएशन) के आधार पर इनमें से श्रेष्ठ बिस्किट चुने गए। अब तक के परीक्षण के अनुसार, मटर के छिलके से बने बिस्किट को लगभग 90 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

 
rbs engineering students discover health treasure from waste
student innovation - फोटो : अमर उजाला न्यूज नेटवर्क
विभागाध्यक्ष प्रो. अपूर्व विहारी लाल ने बताया, मटर की फली में 60 प्रतिशत हिस्सा दाना और 40 फीसदी हिस्सा छिलके के रूप में होता है, इस हिस्से को हम कचरे के तौर पर फेंक देते हैं जबकि इसमें प्रोटीन व फाइबर समेत कई पोषक तत्व होते हैं। यह हमारी सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। इसे उपयोग में लाकर हम पर्यावरण को दूषित होने से भी बचा सकते हैं।

 
rbs engineering students discover health treasure from waste
student innovation - फोटो : अमर उजाला न्यूज नेटवर्क
आम की गुठली में 80 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट
फूड टेक्नोलॉजी विभाग के शिक्षक डाॅ. आशीष खरे के निर्देशन में आम की गुठली पर भी शोध किया गया। उन्होंने बताया कि पहले पके व ताजे आमों से गुठली निकाली गई। फिर सुखाकर उनका कठोर आवरण हटाया गया। गुठली के भीतरी बीज (केरनेल) को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर वैज्ञानिक विधि द्वारा वसा (फैट) मुक्त किया गया ताकि बनने वाले पाउडर का रंग और गुणवत्ता बरकरार रहे। कटे हुए टुकड़ों को उचित सांद्रता के नमक के घोल में उबालकर उनकी कड़वाहट हटाई गई। फिर उचित तापमान पर वैज्ञानिक विधि से सुखाकर पाउडर तैयार किया गया। इस पाउडर में कार्बोहाइड्रेट (लगभग 80 प्रतिशत), प्रोटीन (लगभग 9 प्रतिशत), खनिज और फाइबर की पर्याप्त मात्रा पाई गई। वहीं, इसमें मौजूद बायो-एक्टिव यौगिक (फाइटोकेमिकल्स, टैनिन, फ्लेवोनॉयड्स आदि) इसे स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं। इस पाउडर में लगभग 70–80% स्टार्च पाया गया जो उसे कॉर्न फ्लोर का अच्छा विकल्प है। आगे इस पाउडर का उपयोग कस्टर्ड पाउडर बनाने में किया गया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
rbs engineering students discover health treasure from waste
student innovation - फोटो : अमर उजाला न्यूज नेटवर्क
बेल के खोल में मिला सेल्यूलोज
इसी तरह बेल के फल के बाहरी हिस्से यानी कठोर आवरण (खोल) पर विभाग की शिक्षिका दिव्या सिंह चौहान के निर्देशन में शोधकार्य किया गया। दिव्या सिंह ने बताया, बेल के खोल को वैज्ञानिक विधि से सुखाकर पाउडर बनाया गया और उससे बहुशर्करा (सेल्यूलोज) का निष्कर्षण किया गया। फिर उसमें आवश्यक बदलाव कर खाद्य उद्योग में प्रयोग होने वाले प्रगाढक (थिकनर) एवं स्थिरीकरण तत्व (स्टेबलाइजर) तैयार किये गए। बाद में इससे पर्यावरण हितैषी व प्राकृतिक सुग्गनशील (बायोडिग्रेडेबल) पैकेजिंग फिल्म व सामग्री बनाई गई। इस शोध कार्य में छात्र भव्यपाल, अनमोल, विपाशा, अर्नव, एवं आशीष का विशेष योगदान रहा।
 
विज्ञापन
rbs engineering students discover health treasure from waste
student innovation - फोटो : अमर उजाला न्यूज नेटवर्क
आरबीएस इंजीनिरयरिंग कॉलेज के निदेशक प्रो. ब्रजेश कुमार ने बताया कि फूड टेक्नोलॉजी विभाग के शिक्षक और छात्र नवाचार को बढ़ावा देते हुए लगातार नए शोध कर रहे हैं। मुझे प्रसन्नता है कि इस तरह के शोध से मानव जीवन के साथ पर्यावरण की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed