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राधा अष्टमीः मुगलों के हमले के बाद आखिर क्यों कहलाईं विजया लाडली, जानिए पूरी कहानी

Fri, 06 Sep 2019 12:17 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नंदगांव-मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नंदगांव-मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 06 Sep 2019 12:17 AM IST
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Radha ashtami 2019 Why Called Vijaya Ladli Know Story Barsana Mathura
लाडली जी का श्री विग्रह (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मुगलों द्वारा बरसाना पर आक्रमण के दौरान श्रीजी मंदिर में विराजमान लाडली जी के श्री विग्रह को सुरक्षा कारणों के चलते श्योपुर ले जाया गया। बाद में हालात सामान्य होने पर करीब 8 माह बाद बरसाना श्रीजी मंदिर में पुन: विधि विधान पूर्वक विराजमान किया गया। इस दौरान जिस विग्रह की श्रीजी मंदिर में पूजा की गई वो विजया लाडली कहलाईं।


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मंदिर बरसाना राधारानी - फोटो : अमर उजाला
स्थानीय इतिहास की जानकारी देते हुए योगेंद्र सिंह छौंकर ने बताया कि 1773 में भरतपुर रजवाडे पर मुगल बादशाह शाह आलम ने अपने सेनापति नजफ खान को भेजा। उन दिनों बरसाना भरतपुर रजवाडे का ही अंग था। दोनों सेनाओं के बीच युद्ध हुआ। भरतपुर की सेना पीछे हटने को विवश हो गई। 

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मंदिर राधारानी - फोटो : अमर उजाला
इसकी खबर मिलते ही बरसाना श्रीजी मंदिर के सेवायत मंदिर की सुरक्षा को देख राधा रानी के विग्रह को लेकर श्योपुर मध्यप्रदेश चलेे गए। नजफ खान ने अगले दिन बरसाना में प्रवेश किया और करीब एक हफ्ते तक जमकर लूटपाट की। बरसाना के लाडलीजी मंदिर में राधा रानी के स्थान पर एक सखी की प्रतिमा को स्थापित कर सेवा पूजा यथावत कर दी गई।
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राधारानी - फोटो : अमर उजाला
उस स्वरूप को विजय लाडली का नाम दिया गया। हालात सामान्य हो जाने के बाद राधा रानी की मूल प्रतिमा को करीब 8 माह बाद श्योपुर से वापस लाकर बरसाना के मंदिर में विराजमान किया गया। तब से विजय लाडलीजी की प्रतिमा मंदिर के गर्भगृह में ही विराजमान है। परंतु इस प्रतिमा के दर्शन किसी को नहीं कराए जाते हैं। गर्भगृह में ही इनकी समस्त सेवा पूजा की जाती है।
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राधारानी के विग्रह का पंचामृत का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
इस बार राधारानी 6 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे प्राकट्य होंगी। इस पल का साक्षी बनने को देश-दुनिया के लाखों श्रद्धालु बरसाना पहुंचते हैं। इसके लिए बरसाना के साथ आसपास के सभी गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं फुल होती जा रही हैं।
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