यमुना किनारे को ओर ताजमहल की उत्तर-पश्चिम मीनार का 95 साल बाद ‘इलाज’किया जाएगा। मीनार की छतरी में दिखाई दी दरार और कई पत्थरों के गल जाने की रिपोर्ट के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इसका संरक्षण शुरू किया है। वहीं ताजमहल के पीलेपन को हटाने के लिए मुख्य गुंबद पर भी मडपैक ट्रीटमेंट करने की अनुमति मिल गई है।
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ताजमहल की उत्तर-पश्चिम मीनार
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, मीनार में लगे लोहे की क्लैंप के गल जाने के कारण पत्थर चटक गए हैं, जिससे 30 पीस मार्बल के बदले जाएंगे, जबकि अंदर छतरी के नीचे 15 सीढ़ियों के पत्थरों को भी बदला जाएगा। इससे पहले 1924 में छतरी और कलश का संरक्षण हुआ था। एएसआई 48 लाख की लागत से यह कार्य करा रहा है।
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ताजमहल की उत्तर-पश्चिम मीनार बांधी जा रही पाड़
- फोटो : अमर उजाला
मीनार के चारों ओर स्केफोल्डिंग (पाड़) बांधने का काम जारी है। यहां अंदर मीनार के हर मंजिल पर लोहे की क्लैंप गल गई हैं। सबसे ऊपर छतरी से बारिश का पानी मीनार के अंदर आने के कारण ऊपर की 15 सीढ़ियां भी गली हैं। बंद मीनार में चमगादड़ों के रहने के कारण कई पत्थरों पर नुकसान हुआ है। इन्हें भी बदला जाना है।
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ताजमहल की उत्तर-पश्चिम मीनार
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अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि मीनार के अंदर बारिश का पानी जाने के कारण कई पत्थर गल गए हैं, जबकि कुछ निकल गए हैं। अगस्त तक मीनार के पत्थरों को बदलने का काम पूरा कर लेंगे। छतरी की मरम्मत का काम भी किया जाएगा।
1941 में एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट में ताजमहल की दक्षिण-पश्चिमी मीनार सबसे ज्यादा 21.6 सेमी झुकी पाई गई थी। इस कमेटी ने उत्तर पश्चिमी मीनार को 3.5 सेमी का झुकाव पाया था। तब से 2004-05 तक सर्वे ऑफ इंडिया ने हर पांच साल में झुकाव की जांच की है, जिसमें 1971 के बाद झुकाव बंद हो गया।